Bhartiy Upbhashayen aur boliyan भारतीय उपभाषाएँ और बोलियाँ

By | July 13, 2016

प्रत्येक भाषा के तहत वर्गीकृत भाषा और मातृभाषाओं के नाम व्यक्तियों की संख्या है जो अपनी मातृभाषा के रूप में प्रयोग करते हैं प्रत्येक भाषा के तहत वर्गीकृत भाषा और मातृभाषाओं के नाम व्यक्तियों की संख्या है जो अपनी मातृभाषा के रूप में प्रयोग करते हैं
1. असमिया= 13,168,484
1. असमिया= 12,778,735
अन्य= 389,749
2. बंगाली= 83,369,769
1. बंगाली= 82,462,437
2. चकमा =176,458
3. हैजोंग़= 63,188
4 .राजबंग्सी= 82,570
अन्य =585,116
3 बोडो=1,350,478
1 बोडो= 1,330,775
अन्य =19,703
4 डोगरी =2,282,589
1 डोगरी= 2282547
अन्य =42
5 गुजराती =46,091,617
1 गुजराती =45,715,654
2 गुजराओ =43,414
3 सौराष्ट्र =185,420
अन्य= 4 147129
6 हिन्दी =422,048,642
1 अवधी =2,529,308 2 बघेली =2,865,011
3 बागड़ी राजस्थानी= 1,434,123
4 बंजारी =1,259,821
5 भद्रावाही =66,918
6 गद्दी =66246
7 भोजपुरी= 33,099,497
8 ब्रजभाषा= 574245
9 बुन्देली= 3,072,147
10 चम्बैली= 126,589
11 छत्तीसगढ़ी= 13,260,186
12 चुराही= 61,199
13. धौंधरी =1,871,130
14 .गढ़वाली= 2,267,314
15 गोजरी= 762,332
16. हरौती= 24,62,867
17. हरियाणवी= 7,997,192
18. हिंदी= 257,919,635
19. जौनसारी= 114,733
20. कांगड़ी= 1,122,843
21. खैराड़ी= 11,937
22 खड़ी बोली= 47,730
23 खोर्ठा= 4,725,927
24 कुल्वी= 170,770
25 कुमायनी= 2,003,783
26 कुर्माली= 425,920
27 लबानी= 22,162
28 लामणी= 27,07,562
29 लरिया= 67,697
30 लोधी= 139,321
31 मगही= +1,39,78,565
32 मालवी= 5565167
33 Mandeali =611,930
34 मारवाड़ी= 7,936,183
35 मेवाड़ी= 5,091,697
36 मेवाती= 645,291
37 नागपुरिया= 1,242,586
38 निमाडी= 2,148,146
39 पहाड़ी= 2,832,825
40 पंच परजानिया= 193769
41 पेंगवाली= 16,285
42 पवाड़ी= 425,745
43 राजस्थानी= 18,355,613
44 सादरी= 2,044,776
45 सिरमौरी= 31144
46 सोंदवारी= 59,221
47 सुगाली= 160,736
48 सुरगुजा= 1,458,533
49 सुर्जापुरी / सुरजापुरी
=12,17,019
अन्य =1,47,77,266

– – – –
7 कन्नड़ =37924011
1 बड़गा =134,514
2 उड़िया =32,110,482
3 Proja =92,774

2 कन्नड़ =37742232
3 कुरुबा / Kurumba =14613
4 Relli =21,965
5 Sambalpuri= 518,803
अन्य= 56,482

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अन्य= 32,652
8 कश्मीरी= 5,527,698
1 कश्मीरी= 5,362,349
2 किश्तवाड़ी= 33,429
3 सिराजी= 87,179
अन्य =44741
9 कोंकणी= 2,489,015
1 कोंकणी =2,420,140 2 कुडुबी / कुडुम्बी =10192
3 मल्वाणी =46,851
अन्य =11,832 ,
10 मैथिली =12,179,122
1 मैथिली =12,178,673
अन्य =449
19 सिंधी =2,535,485
11 मलयालम =33,066,392
1 मलयालम =+3,30,15,420
2 येरावा =19,643
अन्य= 31,329
20 तमिल =60793814
12 मणिपुरी= 1,466,705 1 कैकड़ी =23,694
1 मणिपुरी= 1466497 2 तमिल =60,655,813
अन्य= 208 3 येरुकला= 69533
अन्य= 44,774
13 मराठी= 71,936,894
1 मराठी 71,701,478= 21 तेलुगु= 74,002,856
अन्य= 235,416 =1 तेलुगू 73,817,148
2 =वदारी 171,725
14 नेपाली = अन्य 13,983
1 नेपाली= 2867922
अन्य =3,827 22 उर्दू 51,536,111
1 उर्दू =51,533,954
15 उड़िया =33,017,446 अन्य= 2,157
16 पंजाबी= 29,102,477
1 बागड़ी= 646,921
2 बिलासपुरी / Kahluri =179,511
3 पंजाबी =2,81,52,794
अन्य= 123,251
17 संस्कृत= 14,135
1 संस्कृत =14,099
अन्य =36
18 संथाली =6,469,600
2 संताली =5,943,679
1 करमाली= 368853
अन्य= 157,068
1 कच्छी= 823,058
अन्य= 18,366
2 सिंधी= 1694061

1 Bhatri =216940
हिन्दी की उपभाषाएँ एवं बोलियाँ
हिन्दी की उपभाषाएँ व बोलियाँ=
उपभाषा= बोलियाँ= मुख्य क्षेत्र
—-
उपभाषा =राजस्थानी
बोलियाँ =मारवाड़ी(पश्चिमी राजस्थानी),
जयपुरी या ढुँढाड़ी(पूर्वी राजस्थानी), मेवाती (उत्तरी राजस्थानी), मालवी(दक्षिणी राजस्थानी),
मुख्य क्षेत्र =राजस्थान
—–
उपभाषा =पश्चिमी हिन्दी
बोलियाँ =(आकार बहुला)कौरवी या खड़ी बोली,बाँगरू या हरियाणवी
(ओकार बहुला)ब्रजभाषा, कन्नौजी, बुंदेली

मुख्य क्षेत्र =हरियाणा, उत्तर प्रदेश
—–
उपभाषा =पूर्वी हिन्दी
बोलियाँ =अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी मध्य प्रदेश,
मुख्य क्षेत्र =छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश
——-
उपभाषा= बिहारी
बोलियाँ =भोजपुरी, मगही
मुख्य क्षेत्र =बिहार, उत्तर प्रदेश
——
उपभाषा =पहाड़ी
बोलियाँ= पहाड़ी, कुमाऊँनी, गढ़वाली
मुख्य क्षेत्र =उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश
हिन्दी भाषी क्षेत्र/हिन्दी क्षेत्र/हिन्दी पट्टी— हिन्दी पश्चिम में अम्बाला (हरियाणा) से लेकर पूर्व में पूर्णिया (बिहार) तक तथा उत्तर में बद्रीनाथ–केदारनाथ (उत्तराखंड) से लेकर दक्षिण में खंडवा (मध्य प्रदेश) तक बोली जाती है। इसे हिन्दी भाषी क्षेत्र या हिन्दी क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र के अंतर्गत 9 राज्य—उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश—तथा 1 केन्द्र शासित प्रदेश (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र)—दिल्ली—आते हैं। इस क्षेत्र में भारत की कुल जनसंख्या के 43% लोग रहते हैं।
बोली— एक छोटे क्षेत्र में बोली जानेवाली भाषा बोली कहलाती है। बोली में साहित्य रचना नहीं होती है।
उपभाषा— अगर किसी बोली में साहित्य रचना होने लगती है और क्षेत्र का विकास हो जाता है तो वह बोली न रहकर उपभाषा बन जाती है।
भाषा— साहित्यकार जब उस भाषा को अपने साहित्य के द्वारा परिनिष्ठित सर्वमान्य रूप प्रदान कर देते हैं तथा उसका और क्षेत्र विस्तार हो जाता है तो वह भाषा कहलाने लगती है।
एक भाषा के अंतर्गत कई उपभाषाएँ होती हैं तथा एक उपभाषा के अंतर्गत कई बोलियाँ होती हैं।
सर्वप्रथम एक अंग्रेज़ प्रशासनिक अधिकारी जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने 1927 ई. में अपनी पुस्तक ‘भारतीय भाषा सर्वेक्षण (A Linguistic Survey of India)’ में हिन्दी का उपभाषाओं व बोलियों में वर्गीकरण प्रस्तुत किया। चटर्जी ने पहाड़ी भाषाओं को छोड़ दिया है। वह इन्हें भाषाएँ नहीं मानते।
धीरेन्द्र वर्मा का वर्गीकरण मुख्यतः सुनीति कुमार चटर्जी के वर्गीकरण पर ही आधारित है। केवल उसमें कुछ ही संशोधन किए गए हैं। जैसे—उसमें पहाड़ी भाषाओं को शामिल किया गया है।
इनके अलावा कई विद्वानों ने अपना वर्गीकरण प्रस्तुत किया है। आज इस बात को लेकर आम सहमति है कि हिन्दी जिस भाषा–समूह का नाम है, उसमें 5 उपभाषाएँ वर 17 बोलियाँ हैं।
हिन्दी क्षेत्र की समस्त बोलियों को 5 वर्गों में बाँटा गया है। इन वर्गों को उपभाषा कहा जाता है। इन उपभाषाओं के अंतर्गत ही हिन्दी की 17 बोलियाँ आती हैं।[1]

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बोली, विभाषा एवं भाषा

विभिन्न बोलियाँ राजनीतिक–सांस्कृतिक आधार पर अपना क्षेत्र बढ़ा सकती हैं और साहित्य रचना के आधार पर वे अपना स्थान ‘बोली’ से उच्च करते हुए ‘विभाषा’ तक पहुँच सकती हैं।
विभाषा का क्षेत्र बोली की अपेक्षा अधिक विस्तृत होती है। यह एक प्रान्त या उपप्रान्त में प्रचलित होती है। इसमें साहित्यिक रचनाएँ भी प्राप्त होती हैं। जैसे—हिन्दी की विभाषाएँ हैं—ब्रजभाषा, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी व मैथिली।
विभाषा स्तर पर प्रचलित होने पर ही राजनीतिक, साहित्यिक या सांस्कृतिक गौरव के कारण भाषा का स्थान प्राप्त कर लेती है। जैसे—खड़ी बोली मेरठ, बिजनौर आदि की विभाषा होते हुए भी राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत होने के कारण राष्ट्रभाषा के पद पर अधिष्ठित हुई है।
इस प्रकार दो बातें स्पष्ट होती हैं—
बोली का विकास विभाषा में और विभाषा का विकास भाषा में होता है। बोली—विभाषा—भाषा
उदाहरण
भाषा— खड़ी बोली हिन्दी
विभाषा— हिन्दी क्षेत्र की प्रमुख बोलियाँ–ब्रजभाषा, अवधी, खड़ी बोली, भोजपुरी व मैथिली
बोली — हिन्दी क्षेत्र की शेष बोलियाँ

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