DBMS in hindi डाटा बेस मैनेजमेंट सिस्टम

By | May 19, 2016

DBMS क्या होता है?
D = Data
B =Base
M = Management
S = System
Data– डेटा कंप्युटर को दिया गया row मटेरियल होता है जिसका प्रयोग कंप्युटर से सूचना प्राप्त करने के लिए करते हैं।
Base-means डाटा का प्रकार, हमारे पास जो डाटा है वो किस तरह का है किस format में है। अगर हम अपने system की बात कहे तो उसमे हम अपने डाटा को अलग-अलग managed करते है जैसे mp3 base वाला डाटा etc.
Management-का मतलब simple है। हमे अपने डाटा को इस तरह से रखना की उसे जल्दी से जल्दी retrieve (खोज) किया जा सके और system का मतलब एक ऐसी मशीन या तरीका जिस से हम अपने डाटा को एक systematic रूप से रख सके। डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम को हम संछिप्त रूप में बोले तो डाटा को सही और managed way में स्टोर करना ताकि समय पर उसे जल्दी से जल्दी रिकॉल कियाजा सके। अब बात करते है, हमें Oracle की ज़रुरत क्यों पड़ी हमारे पास और भी डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम हैं जैसे आप जानते हो MS-Access, FoxPro, Oracle आदि।

डाटाबेस, सूचनाओं का एक ऐसा व्यवस्थित संग्रह (organized collection) होता है, जिससे हम किसी भी सूचना को सरलता से प्राप्त कर सकते हैं। डाटाबेस व्यवस्थित होता है क्योंकि इसमें किसी भी डेटा या सूचना को एक निश्चित स्थान पर पहले से निर्धारित स्थान पर रखा जाता है।
Types of Database डाटाबेस के प्रकार-
डाटाबेस मुख्यतः तीन प्रकार का होता है-
1 Network Database नेटवर्क डाटाबेस- इस प्रकार के डाटाबेस में, डेटा रिकार्ड के समूह के रूप में तथा डेटा के बीच सम्बन्ध लिंक के माध्यम से दर्शाया जाता है।
2 Hierarchial Database हैरारिकल डाटाबेस- इस प्रकार के डाटाबेस में, डेटा को वृक्ष के रूप में नोड आपस में लिंक के माध्यम से जुडी होती है।
3 Relational Database रिलेशनल डाटाबेस- रिलशनल डाटाबेस को संचरित डाटाबेस भी कहा जाता है, जिसमे डेटा को सारणी के रूप में स्टोर किया जाता है। इन डेटा टेबल में स्तम्भ(column) टेबल में स्टोर होने वाले डेटा के प्रकार को तथा पंक्तियाँ( rows) डेटा को दर्शाती है।
Need of Computerised Database डाटाबेस की आवश्यकता-
हाथ से बनाये गए डाटाबेस में बहुत सी समस्याएं होती हैं जैसे कि
1 नया डेटा जोड़ने में समस्या
2 डेटा को बदलने की समस्या
3 डेटा को अपनी शर्तों के अनुसार प्राप्त करने की समस्या।
इन सभी समस्याओं को दूर करने के लिये कम्प्यूटरीकृत डाटाबेस का निर्माण किया गया। इसमें सभी सूचनाएं कम्प्यूटर की सहायता से ही उनका रख रखाव तथा प्रोसेसिंग की जाती है। कम्प्यूटर पर डाटाबेस बनाने के कई कारण हैं जो निम्न है।
1 कम्प्यूटर पर बड़े आकार का डाटाबेस सरलता से बनाया जा सकता है।
2 कम्प्यूटर पर कार्य करने की गति तेज होने के कारण कितने भी बड़े डाटाबेस में से कोई भी इच्छित सूचना निकालना और डाटाबेस पर विभिन्न क्रियाएँ करना आदि कार्य बहुत कम समय में ही सम्पन्न हो जाते हैं। इतना ही नहीं तेज गति के कारण उस पर कोई लंबी चौड़ी रिपोर्ट निकलना और छापना मिनटों का कार्य होता है।
3 इसमें हस्तचलित डाटाबेस की तुलना के खर्च बहुत कम आता है।
डाटाबेस के अवयव-
1 Table सारणी- वैसे तो डेटाबेस के कई प्रकार होते हैं परन्तु सबसे अधिक प्रचलित और प्राकृतिक डाटाबेस रिलेशनल डाटाबेस है। जिसमे डेटा एक सारणी के रूप में स्टोर होता है। सारणी स्तम्भ तथा पंक्तियों के कटाव से बने सेल (cell) से मिलकर बनी होती है। यही सेल सारणियों में डेटा को स्टोर करने के लिए प्रयोग की जाती है।
इन सारणियों में विभन्न प्रकार के आपरेशन जैसे कि डेटा को स्टोर करना , निस्पंदन( filtering) करना, पुनः प्राप्त करना , डेटा का संपादन करना आदि कार्य किये जाते है।
मुख्य रूप से सारणी फील्ड और रिकार्ड से मिलकर बनी होती है।
2 Field फील्ड- सारणी के प्रत्येक स्तम्भ को फील्ड कहते हैं। प्रत्येक फील्ड का एक निश्चित नाम होता है, जिससे उसे पहचाना जाता है। प्रत्येक फील्ड का नाम उस फील्ड में स्टोर होने वाले डेटा के प्रकार को बताता है। उदाहरण के लिए विद्यार्थी का नाम, शहर, देश, टेलीफोन नम्बर, आदि फील्ड के नाम हो सकते हैं।

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3 Record रिकार्ड-सारणी की प्रत्येक पंक्ति को रिकार्ड कहा जाता है। दूसरे शब्दों में रिकार्ड एक एंटिटी( जैसे कि वस्तु, व्यक्ति, आदि) से सम्बंधित सभी फिल्डो में उपस्थित डेटा का सन्ग्रह होता है।
4 Queries क्वैरीकिसी सारणी या डाटाबेस से आवश्यतानुसार डेटा निकलने के लिए जो आदेश दिया जाता है, उसे क्वैरी कहा जाता है।
उदाहरण के लिए, आप अगर अपने वाराणसी शहर में रहने वाले मित्रों की सूची निकलना चाहें तो इसे एक क्वैरी कहेंगे। क्वैरी आपकी आवश्यक्तानुसार डेटा को निकालने के लिए आवश्यक फील्ड, शर्तों, सारणी का नाम आदि को दर्शता है। किसी क्वैरी के उत्तर में जो सूचनाएं या रिकार्ड डाटाबेस से निकाले जाते है, उसे उस क्वैरी का डायनासेट (Dyna set) कहते हैं।
5 Forms फॉर्म- यद्यपि आप सारणी में डेटा को स्टोर कर सकते हैं तथा सुधार भी सकते हैं लेकिन सारणी में डेटा को स्टोर करना तथा सुधारना आसान नहीं होता है। इस समस्या को फार्म की सहयता से दूर कर सकते हैं।
फार्म आपकी स्क्रीन पर एक ऐसी विंडो होती है , जिसकी सहायता से आप किसी सारणी में भरे गए डेटा को देख सकते हैं, सुधार सकते हैं और नया डेटा भी जोड़ सकते हैं । समान्यतः फार्म एक समय पर एक रिकार्ड को देखने तथा सुधारने के लिए प्रयोग किया जाता है।
6 Report रिपोर्ट- सरल शब्दों में कोई रिपोर्ट एक ऐसा डायनासेट है, जिसे कागज पर छापा गया हो। आप किसी डायनासेट की सूचनाओं को किन्ही आधारों पर समूहबद्ध कर सकते हैं।
Architecture of -DBMS- की संरचना DBMS की संरचना तीन स्तरों से मिलकर बनी होती है, जिनका विवरण निम्नलिखित है
1 Internal Level आंतरिक स्तर- इस स्तर में, डाटाबेस के भौतिक संग्रहण की संरचना का वर्णन करता है। यह वर्णित करता है कि वास्तव में डेटा डाटाबेस में कैसे संग्रहित और व्यवस्थित होता है। वह यह भी निर्धारित करता है कि स्टोर किये गए रिकार्ड किस क्रम में हैं। इसे भौतिक स्तर (physical level) भी कहा जाता है।
2 Conceptual Level विचार संबंधी स्तर- इस स्तर में पूर्ण डाटाबेस की संरचना होती है। यह स्तरों के मध्य जानकारी के रूपांतरण की प्रक्रिया होती है। यह डाटाबेस में संग्रहित डेटा के प्रकार को तथा डेटा के बीच सम्बन्ध को वर्णित करता है। इसे तर्कसिद्ध (Logical level) स्तर भी कहा जाता है।
3 External Level बाहरी स्तर- इस स्तर में, डेटा व्यक्तिगत उपयोगकर्ता द्वारा उपयोग में लाया जाता है। यह डाटाबेस के उस भाग का वर्णन करता है जो उपयोगकर्ता के लिए उपयोगी होता है। यह उपयोगकर्ता को उनकी आवश्यक्तानुसार डेटा को एक्सिस करने की अनुमति इस प्रकार प्रदान करता है, ताकि एक ही डेटा एक ही समय पर कई उपयोगकर्ताओ द्वारा प्रयोग किया जा सके । यह स्तर डाटाबेस की सूचि को उपयोगकर्ता से छिपाता है। यह स्तर अलग- अलग उपयोगकर्ता के लिए अलग-अलग होता है। इसे दर्शनीय स्तर (View level) भी कहा जाता है।
Advantages of DBMS के लाभ
DBMS के कई लाभ हैं जो निम्नलिखित हैं –
1. Reduction in Data Repetition डाटा के दोहराव में कमी-अच्छी तरह से व्यवस्थित किये गये डाटाबेस में सामान्यतः डाटा का कोई दोहराव नहीं होता | समस्त डाटा को एक जगह रखे जाने के कारण हर सूचना को केवल एक बार स्टोर किया जाता है |
2. Data Consistency डाटा की स्थिरता- डाटा के एक ही स्थान पर केन्द्रित होने के कारण डाटा की स्थिरता बनी रहती है, क्योंकि उसमे एक ही सुचना के दो मानों की सम्भावना समाप्त हो जाती है | डाटा अस्थिर तब होता है जब डाटा दो जगह रखा गया हो और केवल एक जगह सुधारा गया हो |
3. Data Sharing डाटा की साझेदारी- डाटा की साझेदारी करके एक समय पर कई प्रोग्राम डाटा का प्रयोग कर सकते हैं | जिससे प्रोग्रामों को अपना डाटाबेस तैयार करने की आवश्यकता नहीं होती और इससे बहुत-सा समय और परिश्रम बच जाता है |
4. Security of Data डाटा की सुरक्षा – डाटाबेस प्रबंधन प्रणाली डाटा को निषिद्ध उपयोगकर्ताओं तथा अवैध परिवर्तन से बचाता है | यह केवल अधिकृत उपयोगकर्ता को डाटा का प्रयोग करने की अनुमति प्रदान करता है |
5. Data Integrity डाटा की सम्पूर्णता- डाटा की सम्पूर्णता, सटीकता, तथा निरंतरता को संदर्भित करती है | यह एक डाटा रिकार्ड के दो अपडेट्स के बीच परिवर्तन के आभाव को दर्शाता है | यह दर्शाता है कि डाटाबेस में स्टोर डाटा बिलकुल सही है और नवीनतम है |
Limitation of DBMS की सीमाएं- DBMS के कई लाभ हैं लेकिन साथ ही इसकी कुछ सीमाए भी हैं जो निम्नलिखित हैं –
1. Cost of hardware and Software हार्डवेयर और सोफ्टवेयर की लागत- साफ्टवेयर को चलाने के लिए डाटा को तीव्र गति से प्रोसेस करने वाले प्रोसेसर और अधिक क्षमता वाली मेमोरी की आवश्यता होती हैं, जिनकी लागत अधिक होती है |
2. Complexity कठिनता- एक डाटाबेस प्रबंधन प्रणाली के अच्छे कार्य करने की क्षमता की पूर्व कल्पना करना उस DBMS साफ्टवेयर को कठिन बना देती है | डाटाबेस प्रबंधन प्रणाली को समझने की विफलता एक संगठन के लिए गंभीर परिणामों का कारण बन सकती है |
3. Database Failure डाटाबेस की विफलता- अधिकांश संगठन में, सभी डाटा एक ही डाटाबेस में एकीकृत होता है | यदि पॉवर बंद हो जाने के कारण डाटाबेस विफल हो जाता है या डाटाबेस स्टोरेज डिवाइस पर ही Fail हो जाता है तो हमारा सभी मूल्यवान डाटा लुप्त Loss हो सकता है या हमारी पूरी प्रणाली बंद हो सकती है |