घर्षण Friction

By | July 2, 2016

Friction hindi

घर्षण बल से आप क्या समझते हैं?
जब एक पिण्ड दूसरे पिण्ड के ऊपर फिसलता है या फिसलने का प्रयास करता है तो उनके सम्पर्क तलों के मध्य एक बल कार्य करता है जो पिण्डों की सापेक्ष गति का विरोध करता है। इस गति विरोधी बल को ही घर्षण बल कहते हैं।’
घर्षण के कारण बताएँ।’,’प्रत्येक सतह पर आण्विक अनियमितता होती है। जब एक सतह दूसरी सतह के सम्पर्क में आती है तो आण्विक अनियमितता के कारण उनमें अन्तर्ग्रन्थन हो जाता है। जब एक पिण्ड के ऊपर दूसरे पिण्ड को चलाने का प्रयास किया जाता है तो इस अन्तर्ग्रन्थन के कारण गति विरोधी बल कार्य करने लगता है जिसे घर्षण बल कहते हैं।’
घर्षण कितने प्रकार के होते हैं?
घर्षण तीन प्रकार के होते हैं:-
(1):- स्थैतिक घर्षण:-जब  एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड पर चलाने का प्रयास किया जाता है फिर भी पहला पिण्ड विरामावस्था में ही रहता है तो दोनों पिण्डों के संपर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को स्थैतिक घर्षण कहते हैं।
(2):- सीमान्त घर्षण:- जब  एक पिण्ड को दूसरे पिण्ड पर चलाने का प्रयास किया जाता है और पहला पिण्ड ठीक चलने को तैयार होता है तो इस स्थिति
को सीमान्त संतुलन की स्थिति कहते हैं। सीमान्त संतुलन की स्थिति में कार्य करने वाले घर्षण को सीमान्त घर्षण कहते हैं।
(3):-गतिक घर्षण :- जब एक पिण्ड दूसरे पिण्ड के ऊपर चलता है तो दोनों पिण्डों के सम्पर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को गतिक घर्षण कहते हैं।’
स्थैतिक घर्षण या सीमान्त घर्षण के नियम बताएँ।’,’स्थैतिक घर्षण या सीमान्त घर्षण के नियम:-

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(1) घर्षण सदैव गति का विरोध करता है। उसकी दिशा सदैव गति की दिशा के विपरीत होती है।

(2) सीमान्त घर्षण सम्पर्क तलों की प्रकृति पर निर्भर करता है।

(3) सीमान्त घर्षण सम्पर्क तलों के क्षेत्रफल या आकृति पर निर्भर नहीं करता यदि अभिलम्ब अभिक्रिया नियत हो।

(4) सीमान्त घर्षण का मान fs अभिलम्ब अभिक्रिया R के अनुक्रमानुपाती होता है।’
गतिक घर्षण के नियम बताएँ।’,’गतिक घर्षण के नियम:-
(1) गतिक घर्षण सदैव गति की दिशा के विपरीत  कार्य करती है।
(2) गतिक घर्षण सम्पर्क तलों की प्रकृति पर निर्भर करता है।
(3) गतिक घर्षण का मान fk अभिलम्ब अभिक्रिया R के अनुक्रमानुपाती होता है।’
घर्षण कोण व विराम कोण किसे कहते हैं?
घर्षण-कोण:-सीमान्त घर्षण और अभिलम्ब प्रतिक्रिया या परिणामी, अभिलम्ब प्रतिक्रिया से जो कोण बनता है, उसे घर्षण कोण कहते है।
विराम कोण:- जब कोई पिण्ड किसी नत समतल पर सीमान्त सन्तुलन की स्थिति में होता है तो नत समतल का क्षैतिज से झुकाव विराम कोण कहलाता है।’
सर्पी और बेल्लन घर्षण किसे कहते हैं?
सर्पी घर्षण:- जब एक पिण्ड दूसरे पिण्ड पर फिसलता है तो उनके सम्पर्क तलों के मध्य कार्य करने वाले घर्षण को सर्पी घर्षण कहते हैं।फिसलने वाले पिण्ड का वही तल सदैव दुसरे पिण्ड के सम्पर्क में होता है। सर्पी घर्षण का मान अधिक होता है।
बेल्लन घर्षण:- जब एक पिण्ड दूसरे पिण्ड पर घूमता है तो दोनों के सम्पर्क तलों में कार्य करने वाले घर्षण को बेल्लन घर्षण कहते हैं।घुमने वाले पिण्ड के भिन्न-
भिन्न भाग दूसरे पिण्ड के सम्पर्क में क्रमशः आते है। बेल्लन- घर्षण का मान कम होता है।’
घर्षण से लाभ एवं हानियाँ बताएँ।’,’हानियाँ:-(1) घर्षण के कारण मशिनों के कल पुर्जे घिसते हैं।
(2) घर्षण के कारण मशीनों की दक्षता कम हो जाती है।
(3) घर्षण के कारण मशीनों को दी गई ऊर्जा का कुछ भाग ऊष्मा के रूप में व्यय हो जाता है।
लाभ:- घर्षण से हानियाँ बहुत कम हैं किन्तु लाभ अनेकानेक हैं।
(1) पैरों और जमीन के मध्य घर्षण होने के कारण ही हम पृथ्वी पर चल सकते हैं।
(2) घर्षण के कारण ही हम भोजन को चबा पाते हैं।
(3) घर्षण से ही आग उत्पन्न करते हैं।
(4) घर्षण के कारण ही रस्सी बना पाते हैं।
(5) घर्षण के कारण ही वाहनों पर ब्रेक लगाकर उन्हें रोक पाते हैं।
(6) घर्षण के कारण ही दीवारों पर कील ठोक पाते हैं।
हमारे लिए घर्षण अति आवश्यक है।’

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