Hajari prasad dviewdi ka jeevan parichay आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय

By | September 26, 2016

जीवन परिचय- आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म सन 1907 ईस्वी में बलिया जिले के ‘दुबे का छपरा’ नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री अनमोल द्विवेदी एवम माता का नाम श्रीमती ज्योतिष्मती था। उनकी शिक्षा का आरंभ संस्कृत से हुआ। इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ज्योतिष तथा साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की। सन 1940 ईस्वी में हिंदी एवं संस्कृत के अध्यापक के रूप में शांतिनिकेतन चले गए। यही इन्हें विश्वकवि रविंद्र नाथ टैगोर का सान्निध्य मिला और साहित्य सृजन की ओर अभिमुख हो गए। सन 1956 ईस्वी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष नियुक्त हुए कुछ समय तक पंजाब विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग अध्यक्ष के रुप में भी कार्य किया। सन 1949 ईस्वी में लखनऊ विश्वविद्यालय ने उन्हे डि-लीट तथा सन 1957 ईस्वी में भारत सरकार ने पद्मभूषण की उपाधि से विभूषित किया। 19 मई 1979 ईस्वी को इनका देहावसान हो गया।
साहित्यिक परिचय- द्विवेदी जी ने बाल्यकाल से ही श्री ब्योमकेश शास्त्री से कविता लिखने की कला सीखनी आरंभ कर दी थी। शांति निकेतन पहुंचकर इनकी प्रतिभा और निकलने लगी कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का इन पर विशेष प्रभाव पड़ा। बांग्ला साहित्य से बहुत प्रभावित हुए। यह उच्च कोटि के शोधकर्ता निबंधकार उपन्यासकार एवं आलोचक थे। सिद्ध साहित्य, जैन साहित्य एवं अपभ्रंश साहित्य को प्रकाश में लाकर कथा भक्ति साहित्य पर उच्च स्तरीय समिक्षात्मक ग्रंथों की रचना करके इन्होंने हिंदी साहित्य की महान सेवा की। वैसे तो द्विवेदी जी ने अनेक विषयों पर उत्कृष्ट कोटि के निबंधों एवं नवीन शैली पर आधारित उपन्यासों की रचना की है पर विशेष रुप से व्यक्तिक एवं भावात्मक निबंधों की रचना करने में यह अद्वितीय रहे। द्विवेदी जी ‘उत्तर प्रदेश ग्रंथ अकादमी’ के अध्यक्ष एवं ‘हिंदी संस्थान’ के उपाध्यक्ष भी रहे। कबीर पर उत्कृष्ट आलोचनात्मक कार्य करने के कारण इन्हें ‘मंगला प्रसाद’ पारितोषिक प्राप्त हुआ। इसके साथ ही सूर साहित्य एवं इंदौर साहित्य समिति में स्वर्ण पदक प्रदान किया।
रचनाएं-द्विवेदी जी की प्रमुख कृतियां इस प्रकार है-
निबंध- विचार और वितर्क, कल्पना, अशोक के फूल, कूटज, साहित्य के साथी, कल्पलता, विचार-प्रवाह, आलोक पर्व आदि ।
उपन्यास- पुनर्नवा, बाणभट्ट की आत्मकथा, चारू चंद्रलेख, अनामदास का पोथा आदि ।
आलोचना साहित्य- सूर साहित्य, कबीर, सूरदास और उनका काव्य, हमारी साहित्यिक समस्याएं, हिंदी साहित्य की भूमिका, साहित्य का साथी, साहित्य का धर्म, हिंदी साहित्य समीक्षा, नख दर्पण में हिंदी कविता, साहित्य का मर्म, भारतीय वाग्मय, कालिदास की लालित्य योजना आदि ।
शोध साहित्य- प्राचीन भारत का कला विकास, नाथ संप्रदाय, मध्यकालीन धर्म साधना, हिंदी साहित्य का आदिकाल।
अनुदित साहित्य- प्रबंध चिंतामणि, पुरातन प्रबंध संग्रह, प्रबंधकोश, विश्व परिचय, मेरा बचपन, लाल कनेर आदि।
संपादित साहित्य- नाथ सिद्धों की बानिया, संक्षिप्त पृथ्वीराजरासो, संदेशरासक आदि ।
भाषा शैली-द्विवेदी जी भाषा के प्रकांड पंडित थे। संस्कृतनिष्ठ शब्दावली के साथ साथ आपने निबंधों में उर्दू, फारसी, अंग्रेजी एवं देशज शब्दों का भी प्रयोग किया है। इनकी भाषा प्रौढ़ होते हुए भी सरल संयत तथा बोद्धगम्य है। मुहावरेदार भाषा का प्रयोग भी इन्होंने किया है। विशेष रूप से इनकी भाषा शुद्ध संस्कृतनिष्ठ साहित्यिक खड़ी बोली है। उन्होंने अनेक शैलियों का प्रयोग विषयानुसार किया है जिनमें प्रमुख है –
गवेषणात्मक शैली
आलोचनात्मक सहेली
भावात्मक शैली
हास्य व्यंगात्मक शैली
उद्धरण शैली

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3 thoughts on “Hajari prasad dviewdi ka jeevan parichay आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय

  1. Anand kumar singh

    क्या हजारी प्रसाद को डि लिट की उपाधी दी गयी थी?

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