Internet in hindi इंटरनेट और सेवाएं

By | June 29, 2016

इंटरनेट तथा इसकी सेवाएं ( internet and its services )
इंटरनेट कम्युनिकेशन का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसने काफी लोकप्रियता अर्जित की है| इंटरनेट के माध्यम से लाखों व्यक्ति सूचनाओं विचारों (ध्वनि, वीडियो  इत्यादि) को कंप्यूटरों के जरिए पूरी दुनिया में एक दूसरे के साथ शेयर कर सकते हैं| यह विभिन्न आकार व प्रकारों के नेटवर्क से मिलकर बना होता है|
इंटरनेट ( internet )
इसका पूरा नाम इंटरनेशनल नेटवर्क है जिसे वर्ष 1950 में विंट सर्फ ने शुरू किया इन्हें इंटरनेट का पिता कहा जाता है| इंटरनेट नेटवर्को का नेटवर्क है, जिसमें लाखों निजी व सार्वजनिक लोकल से ग्लोबल स्कोप वाले नेटवर्क होते हैं|
सामान्यतः नेटवर्क दो या दो से अधिक कंप्यूटर सिस्टम को आपस में जोड़ कर बनाया गया एक समूह है | इंटरनेट पर उपलब्ध डाटा, प्रोटोकॉल द्वारा नियंत्रित किया जाता है | टीसीपी आईपी द्वारा एक फाइल को कई छोटे भागों में फाइल सर्वर द्वारा बाटा जाता है, जिन्हें पैकेट्स कहा जाता है | इंटरनेट पर सभी कंप्यूटर आपस में किसी प्रोटोकॉल का प्रयोग करके वार्तालाप करते है |
इंटरनेट का इतिहास ( history of internet )
सन 1969 में लॉस एंजेल्स में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया तथा यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह अरपानेट की शुरुआत के रूप में जुड़े| इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के कंप्यूटरों को आपस में कनेक्ट करना था | यह दुनिया का पहला पैकेट स्विचिंग नेटवर्क था | मध्य 80 के दशक में एक और संघीय एजेंसी राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन ने एक नया क्षमता वाला नेटवर्क NSF नेट बनाया है, जो आरपानेट से अधिक सक्षम था | NSF नेट में केवल यही कमी थी कि अपने नेटवर्क पर केवल शैक्षिक अनुसंधान की अनुमति देता था| किसी भी प्रकार के निजी व्यापार की अनुमति नहीं | इसी कारण निजी संगठनों तथा लोगों ने अपने खुद के नेटवर्क का निर्माण करना शुरु कर दिया जिसके बाद में अरपानेट तथा NSF नेट से जुड़कर इंटरनेट का निर्माण किया |
इंटरनेट के लाभ ( advantage of internet )
1. दूसरे व्यक्तियों से आसानी से संपर्क बनाने की अनुमति देता है |
2. इसके माध्यम से दुनिया में कहीं भी किसी से भी संपर्क बनाया जा सकता है |
3. इंटरनेट पर डॉक्यूमेंट को प्रकाशित करने पर पेपर इत्यादि की बचत होती है |
4.
यह कंपनियों के लिए कीमती संसाधन है | जिस पर वे व्यापार का विज्ञापन तथा लेनदेन भी कर सकते हैं|
5. एक ही जानकारी को वाकई बार एक्सेस करने के बाद उसे पुनः सर्च करने में कम समय लगता है |
इंटरनेट की हानियां ( disadvantage of internet )
1. कंप्यूटर में वायरस के लिए यह सर्वाधिक उत्तरदाई है |
2. इंटरनेट पर भेजे गए संदेशों को आसानी से चुराया जा सकता है |
3. बहुत सी जानकारी जांची नहीं जाती | अनैतिक तथा अनुचित डाकुमेंट तत्व कभी-कभी गलत लोगों द्वारा इस्तेमाल कर लिए जाते हैं |
4. साइबर धोखेबाज क्रेडिट डेबिट कार्ड की समस्त जानकारी को चुराकर उसे गलत तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं |
इंटरनेट कनेक्शन ( internet connection )
बैंडविड्थ व कीमत इन दो घटकों के आधार पर ही कौन से इंटरनेट कनेक्शन को उपयोग में लाना है | यह सर्वप्रथम निश्चित किया जाता है | इंटरनेट की गति बैंडविथ पर निर्भर करती है |
इंटरनेट एक्सेस करने के लिए कुछ कनेक्शन इस प्रकार है –
डायल अप कनेक्शन ( dial up connection )
डायल अप पूर्व उपस्थित टेलीफोन लाइन की सहायता से इंटरनेट से जुड़ने का माध्यम है | जब भी उपयोगकर्ता डायल अप कनेक्शन को चलाता है, तो पहले मोडम इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर का फोन नंबर डायल करता है, जिसे डायल अप कॉल्स को प्राप्त करने के लिए तैयार किया गया है | वह फिर ISP कनेक्शन स्थापित करता है | इसमें सामान्य रूप से 10 सेकंड लगते हैं | सामान्यतः शब्द ISP उन कंपनियों के लिए प्रयोग किया जाता है जो उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करते हैं | उदाहरण के लिए- कुछ प्रसिद्ध इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के नाम है AIRTEL, MTNL, IDEA आदि
ब्राडबैंड कनेक्शन ( broadband connection)
ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल हाई स्पीड इंटरनेट एक्सेस के लिए सामान्य रूप से होता है | यह इंटरनेट से जुड़ने के लिए टेलीफोन लाइनों को प्रयोग करता है | ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ता को डायल अप कनेक्शन से तीव्र गति पर इंटरनेट से जुड़ने की सुविधा प्रदान करता है | ब्रॉडबैंड में विभिन्न प्रकार की हाई स्पीड संचरण तकनीके भी सम्मिलित है जो कि इस प्रकार है |
1. डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन- यह एक लोकप्रिय ब्राडबैंड कनेक्शन है, जिस में इंटरनेट एक्सेस डिजिटल डाटा को लोकल टेलीफोन नेटवर्क के तारों द्वारा सूचित किया जाता है | यह डायल सेवा की तरह की तो उससे अधिक तेज गति से कार्य करता है | इसके लिए DSL मार्डम की आवश्यकता होती है | जिस से टेलीफोन लाइन तथा कंप्यूटर को जोड़ा जाता है |
2. केबल मार्डम- इसके अंतर्गत केबल ऑपरेटर को केबल के माध्यम से इंटरनेट इत्यादि की सुविधा प्रदान कर सकते हैं | इसकी ट्रांसमिशन 1.5 MBPS से भी अधिक हो सकती है |
3. फाइबर ऑप्टिक- फाइबर ऑप्टिक तकनीक वैद्युत संकेतों के रूप में उपस्थित डाटा को प्रकाशीय रूप में बदलकर, उस प्रकाश को पारदर्शी ग्लास फाइबर जिसका व्यास मनुष्य के बाल के लगभग बराबर होता है, के जरिए प्राप्तकर्ता तक भेजता है |
4. ब्राडबैंड ओवर पावर लाइन- निम्न तथा मध्यम वोल्टेज के इलेक्ट्रॉनिक पावर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर ब्रॉडबैंड कनेक्शन की सर्विस को ब्रॉडबैंड ओवर पावर लाइन करते हैं | यह उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जहां पर पॉवर लाइन के अलावा कोई और माध्यम उपलब्ध नहीं है | उदाहरण- ग्रामीण क्षेत्र इत्यादि |
वायरलेस कनेक्शन ( wireless connection )
वायरलेस ब्रॉडबैंड ग्राहक के स्थान और सर्विस प्रोवाइडर के बीच रेडियो लिंक का प्रयोग कर घर या व्यापार इत्यादि को इंटरनेट से जोड़ता है | वायरलेस ब्रॉडबैंड स्थिर या चलायमान होता है | इसे केबल या मॉडम इत्यादि की आवश्यकता नहीं होती | इसका प्रयोग हम किसी भी क्षेत्र में, जहां DLS केबल इत्यादि नहीं पहुंच सकते कर सकते हैं |
1. वायरलेस फिडेलिटी (wireless fidibility )- यह एक  सार्वत्रिक वायरलेस तकनीक है, जिसमें रेडियो आवृत्तियों को डाटा ट्रांसफर करने में प्रयोग किया जाता है | वाईफाई केबल या तारों के बिना ही उच्च गति से इंटरनेट सेवा प्रदान करती है | इसका प्रयोग हम रेस्तरां, कॉफ़ीशॉप, होटल, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, कनेक्शन सेंटर इत्यादि में कर सकते हैं |
2. वर्ल्ड वाइड इंटरआपरेबिलिटी फॉर माइक्रोवेव एक्सप्रेस ( world wide interoperability for microwave express )- वाईमैक्स सिस्टम आवासीय तथा इंटरप्राइजेज ग्राहकों को इंटरनेट की सेवाएं प्रदान करने के लिए बनाई गई है | यह वायरलेस मैक्स तकनीक पर आधारित है | वायमैक्स मुख्यता बड़ी दूरियों व ज्यादा उपयोगकर्ता के लिए वाई फाई की भांति, किंतु उससे भी ज्यादा गति से इंटरनेट सुविधा प्रदान करने के लिए प्रयुक्त होता है | वाईमैक्स को वाईमैक्स फोरम ने बनाया था | जिसकी स्थापना जून 2001 में हुई थी |
3. मोबाइल वायरलेस ब्रॉडबैंड सर्विस ( mobile wireless broadband service )- ब्रॉडबैंड सेवाएं मोबाइल टेलीफोन सर्विस प्रोवाइडर से भी उपलब्ध है | इस प्रकार की सेवाएं सामान्य रूप से मोबाइल ग्राहकों के लिए उचित है | इससे प्राप्त होने वाली स्पीड बहुत कम होती है |
4. सैटेलाइट (satellite)- सैटेलाइट टेलीफोन में तथा टेलीविजन सेवाओं के लिए आवश्यक लिंक उपलब्ध कराते हैं | इसके साथ ब्रॉडबैंड सेवाओं में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है |
इंटरकनेक्टिंग प्रोटोकॉल- प्रोटोकॉल नियमों का वह सेट है, जो डाटा कम्युनिकेशन की देख-रेख करता है | कुछ प्रोटोकॉल निम्न प्रकार के हैं –
1. टीसीपी आईपी ( TCP-IP)- कनेक्टिविटी (जिसमें डेटा की फार्मेटिंग, एड्रेसिंग, संचरण के रूल्स और इसे प्राप्त करने की विधि सम्मिलित है) प्रदान करता है | इस प्रोटोकॉल के मुख्य 2 भाग है –
A. TCP यह संदेश को प्रेषक के पास ही पैकेटों के एक सेट में बदल देता है | जिसे प्राप्तकर्ता के पास पुनः इकट्ठा कर संदेश को वापस हासिल कर लिया जाता है | इसे कनेक्शन ओरिएंटेड प्रोटोकॉल भी कहते हैं |
B. IP- यह विभिन्न कंप्यूटरों को नेटवर्क स्थापित करके आपस में संचार करने की अनुमति प्रदान करता है | आईपी नेटवर्क पर पैकेट भेजने का कार्य संभालती है | यह अनेक मानकों के आधार पर पैकेटों के एड्रेस को बनाए रखता है | प्रत्येक IP पैकेट में स्रोत तथा गंतव्य का पता होता है |
2. फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल ( file transfer protocol )– FTP प्रोटोकॉल के द्वारा इंटरनेट उपयोगकर्ता अपने कंप्यूटरों से फाइलों को विभिन्न वेबसाइटों पर अपलोड कर सकते हैं, या वेबसाइट से अपने pc में डाउनलोड कर सकते हैं | FTP सॉफ्टवेयर के उदाहरण है- फाइलजिला Filezilla, कासाब्लांका, FTP इत्यादि |
3. हाइपर टेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल ( Hyper text transfer protocol)- http यह इस बात को सुनिश्चित करता है कि संदेशों को किस प्रकार फॉर्मेट व संचरित किया जाता है व विभिन्न कमांडो के उत्तर में वेब सर्वर तथा ब्राउज़र क्या एक्शन लेंगे | http एक स्टेटलेस प्रोटोकॉल है, क्योंकि इसमें प्रत्येक निर्देश स्वतंत्र होकर क्रियान्वित होते हैं |
4. हाइपर टेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज ( hyper text markup language )– इसका प्रयोग वेब पेजों के डिजाइन बनाने में इस्तेमाल होता है | मार्क आप लैंग्वेज मार्कअप टैग जा सेट होता है, जो वेब ब्राउज़र को यह बताता है कि वेब पेज पर शब्दों में जो इत्यादि को उपयोगकर्ता के लिए किस प्रकार प्रदर्शित करना है |
5. टेलनेट प्रोटोकॉल ( telnet protocol)– टेलनेट सेशन वैध यूजर नेम तथा पासवर्ड प्रविष्ट करने पर शुरू हो हो जाता है | यह एक नेटवर्क प्रोटोकॉल है, जिसमें वर्चुअल कनेक्शन का इस्तेमाल करके द्विदिषीय टेक्स्ट ओरिएंटेड कम्युनिकेशन को लोकल एरिया नेटवर्क पर प्रदान किया जाता है |
6. यूजनेट प्रोटोकॉल (usenet protocol )- इसके अंतर्गत कोई केंद्रीय सर्वर या एडमिनिस्ट्रेटर नहीं होता है | इस सेवा के तहत इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का एक समूह किसी भी विषय विशेष पर अपने विचार सलाह दी का आपस में आदान प्रदान कर सकता है |
7. पॉइंट-टू-पॉइंट प्रोटोकॉल (point-to-point protocol )– यह एक डायल अकाउंट है जिसमें कंप्यूटर को इंटरनेट पर सीधे जोड़ा जाता है | इस प्रकार के कनेक्शन में एक मॉडम की आवश्यकता होती है | जिसमें डेटा को 9600 बिट्स/प्रति सेकंड में भेजा जाता है |
8. वायरलेस एप्लीकेशन प्रोटोकॉल (wireless application protocol )– यह वैप ब्राउज़र, मोबाइल डिवाइस में प्रयोग होने वाले वेब ब्राउज़र है | यह प्रोटोकॉल वेब ब्राउज़र को सेवाएं प्रदान करता है |
9. वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (voice over internet protocol )- यह IP नेटवर्को पर ध्वनि संचार का वितरण करने में प्रयोग होती है | जैसे- IP कॉल्स |
इंटरनेट सेवाएं- इंटरनेट से उपयोगकर्ता कई प्रकार की सेवाओं का लाभ उठा सकता है | जैसे कि- इलेक्ट्रॉनिक मेल, मल्टीमीडिया डिस्प्ले, शॉपिंग, रियल टाइम ब्रॉडकास्टिंग इत्यादि | इन में से कुछ मत पूर्ण सेवाएं इस प्रकार है-
1. चैटिंग (chatting )- यह विस्तृत स्तर पर भी उपयोग होने वाली टेक्स्ट आधारित संचारण है | जिसमें इंटरनेट पर आपस में बातचीत बातचीत कर सकते हैं | इसके माध्यम से उपयोगकर्ता चित्र, वीडियो, ऑडियो इत्यादि भी एक दूसरे के साथ शेयर कर सकते हैं | उदाहरण- skype, मैसेंजर, याहू इत्यादि |
2.  ईमेल (E-mail)- ईमेल के माध्यम से कोई भी उपयोगकर्ता किसी भी अन्य व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक रूप से संदेश भेज सकता है, तथा प्राप्त भी कर सकता है | ईमेल को भेजने के लिए किसी भी उपयोगकर्ता का ईमेल एड्रेस होना बहुत आवश्यक है | जो कि विश्व भर में उस ईमेल सर्विस पर अद्वितीय होता है | ईमेल में SMTP (सिंपल मेल ट्रांसफर प्रोटोकॉल) का इस्तेमाल किया जाता है | इसके अंतर्गत वेब सर्वर पर कुछ मेमोरी स्थान प्रदान कर दिया जाता है | जिसमें सभी प्रकार के मेल संग्रहित होते हैं | ईमेल सेवा का उपयोगकर्ता विश्व भर में कहीं से भी कहीं भी कर सकता है | उपयोगकर्ता ईमेल वेबसाइट पर उपयोगकर्ता नाम जो की समान्यतः उसका ईमेल एड्रेस होता है व पासवर्ड की सहायता से लॉगिन कर सकता है और अपनी प्रोफाइल को मैनेज करता है | ईमेल एड्रेस के दो भाग होते हैं जो कि जो एक प्रतीक @ द्वारा अलग होते हैं | इसका अगला भाग यूजरनेम तथा दूसरा भाग डोमेन नेम होता है | उदाहरण के लिए- [email protected] जहां पर sarkarivacancy1 username तथा gmail.com डोमेन नेम है |
3. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (video conferencing)- वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह किसी अन्य व्यक्ति या समूह के साथ दूर होते हुए भी आमने-सामने वार्तालाप कर सकते हैं | इस कम्युनिकेशन में उच्च गति इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है व इसके साथ एक कैमरे एक माइक्रोफोन तथा एक वीडियो स्क्रीन प्रथा एक साउंड सिस्टम की भी जरुरत होती है |
4. इ-लर्निंग (e-learning )- इसके अंतर्गत कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण, इंटरनेट आधारित प्रशिक्षण, ओनलाइन शिक्षा इत्यादि सम्मिलित है | जिसमें उपयोगकर्ता को किसी विषय पर आधारित जानकारी को इलेक्ट्रॉनिक रुप में प्रदान किया जाता है | इस जानकारी को वह किसी भी आउटपुट माध्यम पर स्वयं को प्रशिक्षित कर सकता है | यह कंप्यूटर या इंटरनेट से ज्ञान को प्राप्त करने का एक माध्यम है |
5. ई-बैंकिंग (e-banking )- इसके माध्यम से उपयोगकर्ता विश्व भर में कहीं भी अपने बैंक अकाउंट की को मैनेज कर सकता है | यह एक स्वचालित प्रणाली का अच्छा उदाहरण है, जिसमें उपयोगकर्ता की गतिविधियों (पूंजी निकालने, ट्रांसफर करने, मोबाइल रिचार्ज इत्यादि) के साथ उसका बैंक अकाउंट भी मैनेज होता है | इ-बैंकिंग से किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस pc मोबाइल इत्यादि पर इंटरनेट की सहायता से की जा सकती है | इस के मुख्य व व्यवहारिक उदाहरण है- बिल पेमेंट सेवा, फंड ट्रांसफर, रेलवे रिजर्वेशन, शॉपिंग इत्यादि |
6. इ-शॉपिंग (e-shopping)- इसे ऑनलाइन शॉपिंग भी कहते हैं | जिसके माध्यम से उपयोग करता कोई भी सामान जैसे किताबें, कपड़े, घरेलु सामान, खिलौने, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर तथा हेल्थ insurance का इत्यादि को खरीद सकता है | इसमें खरीदे गए सामान की कीमत चुकाने के लिए कैश ऑन डिलीवरी व ई-बेंकिंग का प्रयोग करते हैं | यह भी विश्व भर में कहीं से भी की जा सकती है |
7. ई-रिजर्वेशन (e-reservation)- यह किसी भी वेबसाइट पर किसी भी वस्तु या सेवा के लिए स्वयम को या किसी अन्य व्यक्ति को आरक्षित करने के लिए प्रयुक्त होती है | जैसे- रेलवे रिजर्वेशन, टिकट बुकिंग, होटल की बुकिंग इत्यादि में | इसकी सहायता से उपयोगकर्ता को टिकट काउंटर पर खड़े रहकर प्रतीक्षा करनी नहीं नहीं करनी होती है | इसे इंटरनेट के माध्यम से किसी भी जगह से कर सकते हैं |
8. सोशल नेटवर्किंग (social networking )- यह इंटरनेट के माध्यम से बना हुआ सोशल नेटवर्क होता है | जिसके माध्यम से सोशल नेटवर्क के अंतर्गत आने वाला कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति के संपर्क कर सकता है चाहे वह दोनों कहीं भी स्थित हों | सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर की जाती है तथा कम्युनिकेशन टेक्स्ट, वीडियों, ओडियों रुप में स्थापित हो सकता है | सोशल नेटवर्किंग साइट्स इस प्रकार है facebook, twitter, whatsapp आदि |
9. ई-कॉमर्स (e-commerce)- इसके अंतर्गत सामानों का लेनदेन व्यापारिक संबंधों को बनाए रखना व व्यापारिक जानकारियों को शेयर करना इत्यादि आता है | जिसमें धनराशि का लेनदेन इत्यादि भी सम्मिलित है | दूसरे शब्दों में यह इंटरनेट से संबंधित व्यापार है
10. एम-कॉमर्स(m-commerce)- यह किसी भी वस्तु या सामान इत्यादि को वायरलेस कम्युनिकेशन के माध्यम से खरीद लें तथा बेचने के लिए प्रयोग में होता है | इसमें वायरलेस उपकरणों जैसे मोबाइल टैबलेट इत्यादि का प्रयोग होता है | संक्षेप में जो कार्य कॉमर्स के अंतर्गत होते हैं वही सब कार्य मोबाइल इत्यादि पर करने को एम कॉमर्स कहते हैं |
इन्हें भी जाने
1. गूगलिंग google सर्च इंजन पर किसी तथ्य को सर्च करना गूगलिंग कहलाता है |
2. pop3 ईमेल को निकालने के लिए प्रयोग होने वाला प्रोटोकॉल है |
3. माउस पोटेटो वह व्यक्ति जो अपने ज्यादातर समय कंप्यूटर पर ही बिताता है, उसे माउस पटेटो कहते है | इन्हें काम्पहैड के नाम से भी जाना जाता है |
4. php यह एक कोडिंग भाषा है, जो कि इंटरनेशनल वेब पेजों  को बनाने के काम आती है | इसका नाम हाइपरटेक्स्ट प्री-प्रोसेसर है |
5. कुकी एक छोटा सा संदेश है जो वेब सर्वर द्वारा browser को दिया जाता है | ब्राउज़र संदेश को टेक्स्ट फाइल में संग्रहित करता है |
6. इच्छा के विरुद्ध प्राप्त हुए मेल को जंक ईमेल कहते हैं |

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