इतिहास भाग 28

By | June 7, 2016

1351- कपास को यूनानी क्या कहते थे ? -सिन्डॉन
1352- खेत की जुताई के लिए किसका उपयोग किया जाता था ? -हल
1353- इस समय कौन से घातु मिलने के प्रमाण हैं ? -तांबा, टिन और कांस्य
1354- हड़पा सभ्यता में व्यापार कैसे होता था ? -लोग आंतरिक और बाह्य व्यापार में संलग्न थे । आंतरिक व्यापार बैलगाड़ी से संचालित होता था ।
1355- मेलूहा शब्द किसके लिए इस्तेमाल किया गया ? -मेसोपोटामिया के साक्ष्यों में इस शब्द का प्रयोग हड़प्पा के लिए किया गया है।
1356- सैंधव वासी मिठास के लिए किस चीज का इस्तेमाल करते थे ? -शहद
1357- हड़प्पा के समय व्यापार की कौन सी प्रणाली प्रचलित थी ? -वस्तु विनिमय प्रणाली
1358- हड़प्पा के समय क्या प्रमुख उद्योग थे ? -कपड़ा उद्योग, आभूषण निर्माण, शिल्पकर्म, बढ़ईगिरी, मिट्टी के बर्तन बनाना
1359- यहां के लोगों ने नगरों और घरों के विन्यास के लिए किस पद्धति को अपनाई ? -ग्रीड पद्धति
1360- हड़प्पा सभ्यता में शहरीकरण की प्रमुख विशेषता क्या थी ? -निकास प्रणाली
1361- हड़प्पा में कहां विशाल स्नानागार के साक्ष्य मिले हैं ? -मोहनजोदड़ो
1362- हड़प्पा में लिपि और धर्म की जानकारी कहां से मिलती है ? -सैंधवकालीन मुहरों से।
1363- इस समय कौन सी लिपि प्रचलित थी ? -चित्राक्षर लिपि ( चित्रों के माध्यम से संप्रेषण)
1364- इस लिपि में कितने चिह्न ज्ञात हैं ? -400 चित्र(चिह्न)
1365- चित्राक्षर लिपि को और किस नाम से पुकारा जाता है ? -बेन्डोफ्रेंड्रम लिपि
1366- इसे लिपि को किस तरफ से लिखा जाता है ? -बाईं से दाईं ओर
1367- आजादी( सन् 1947) के बाद भारत में सबसे अधिक कहां हड़प्पायुगीन स्थलों की खोज हुई ? -गुजरात
1368- किस सैंधव पुरा स्थल से घोड़े की हड्डियों के प्रमाण मिलते हैं ? -सुरकोटडा
1369- सैंधव स्थलों से किस जगह पर सर्वप्रथम कृषि के साक्ष्य उपलब्ध होते हैं ? -मेहरगढ़
1370- वह कौन-सा हड़प्पाकालीन स्थल है जो त्रि-स्तरीय था ? -धौलावीरा
1371- चावल के उत्पादन के साक्ष्य किस सैंधव पुरास्थल से प्राप्त हुए हैं ? -रंगपुर एवं लोथल
1372- किस प्राक्-हड़प्पा स्थल से कूड़ (हलरेखा) का पता चलता है ? -कालीबंगा
1373- पंजाब की किस नदी के नाम पर एक ताम्रपाषाणिक संस्कृति का नामाकरण किया गया था ? -सोन संस्कृति
1374- किस सैंधव पुरा स्थल से फर्श के निर्मित अलंकृत ईंटों का प्रयोग किया गया था ? -कालीबंगा
1375- उत्तर वैदिक कालखंड कब से कब तक था ? -1000 ई.पू. से 600 ई.पू. तक
1376- उत्तर वैदिक काल के जानकारी के स्त्रोत क्या हैं ? -यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद
1377- उत्तर वैदिक काल की विशेषता क्या है ? -चित्रित घूसर, मृदभाण्ड तथा लोहा
1378- किस उपनिषद में मनुष्य के जीवन को चार आश्रमों में बाटा गया है ? -छान्दोग्य उपनिषद
1379- मनुष्य के जीवन को किन चार आश्रमों में बांटा गया है ? -ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ तथा संन्यास ।
1380- नाटकों के मंचन को क्या कहा जाता था ? -शैलूष
1381- पांचाल राज्य किस चीज को लेकर विख्यात था ? – पांचाल राज्य किस चीज को लेकर विख्यात था ?
1382- वैदिक काल का सबसे बड़ा और ज्यादा लौह पुंज कहां मिला है ? -अतरंजीखेड़ा
1383- धनवान व्यक्ति को क्या कहा जाता था ? -इभ्य
1384- उत्तर वैदिक काल में किन सिक्कों का जिक्र मिलता है ? -निष्क, शतमान तता कृष्णल
1385- मिट्टी के एक विशेष प्रकार के बनाए बर्तन को क्या कहा जाता था ? -चित्रित धूसर मृदभाण्ड ( PAINTED GREY WARE-PWG)
1386- 24 बैलों द्वारा खींचे जाने वाले हलों का उल्लेख कहां मिलता है ? -काठक
1387- किस उपनिषद में अन्न को ब्रह्मा कहा गया है ? -तैत्तिरीय उपनिषद
1388- यजुर्वेद में हल को क्या नाम दिया गया है ? -सीर
1389- उत्तर वैदिक काल के महत्वपूर्ण देवता थे ? -प्रजापति
1390- शुद्रों के देवता के रुप कौन प्रचलित थे ? -पूषन
1391- राज्याभिषेक का किस वेद में उल्लेख है ? -अर्थवेद
1392- छोटे न्यायालय को क्या कहा जाता था ? -ग्राम्य वादिन
1393- उत्तर वैदिक यज्ञ कौन-कौन से थे ? -राजसूय, वाजपेय, अश्वमेघ, अग्निष्टोम
1394- ऋग्वेद :- –श्रुति साहित्य में वेदों का प्रथम स्थान है। वेद शब्द ‘विद’ घातु से बना है , जिसका अर्थ है ‘जानना’
-वेदों से आर्यों के जीवन तथा दर्शन का पता चलता है ।
-वेदों की संख्या चार है। ये हैं- ऋग्वेद, यजुर्वेद, समावेद और अर्थवेद ।
-वेदों को संहिता भी कहा जाता है।
-वेदों के संकलन का श्रेय महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेद-व्यास को है ।
-ऋग्वेद में 10 मण्डलों में विभाजित है। इसमें देवताओं की स्तुति में 1028
श्लोक हैं। जिसमें 11 बालखिल्य श्लोक हैं ।
-ऋग्वेद में 10462 मंत्रों का संकलन है।
-प्रसिद्ध गायत्री मंत्र ऋग्वेद के चौथे मंडल से लिया गया है।
-ऋग्वेद का पहला ताथा 10वां मंडल क्षेपक माना जाता है ।
-नौवें मंडल में सोम की चर्चा है।
-आठवें मंडल में हस्तलिखित ऋचाओं को खिल्य कहा जाता है।
-ऋग्वेद में पुरुष देवताओं की प्रधानता है । 33 देवताओं का उल्लेख है।
-ऋग्वेद का पाठ करने वाल ब्राह्मण को होतृ कहा जाता था ।
-देवताओं में सबसे महत्वपूर्ण इंद्र थे ।
-ऋग्वेद में दसराज्ञ युद्ध की चर्चा है।
-उपनिषदों की कुल संख्या 108 है।
-वेदांग की संख्या 6 है।
-महापुराणों की संख्या 18 है।
-आर्यों का प्रसिद्ध कबीला भरत था ।ज
-जंगल की देवी के रूप में अरण्यानी का उल्लेख ऋग्वेद में हुआ है।
-बृहस्पति और उसकी पत्नी जुही की चर्चा भी ऋग्वेद में मिलती है।
-सरस्वती ऋग्वेद में एक पवित्र नदी के रूप में उल्लिखित है। इसके प्रवाह-क्षेत्र को देवकृत योनि कहा गया है।
-ऋग्वेद में धर्म शब्द का प्रयोग विधि(नियम) के रूप में किया गया है।
-ऋग्वेद की पांच शाखाएं हैं- वाष्कल, शाकल, आश्वलायन, शंखायन और माण्डुक्य
-अग्नि को पथिकृत अर्थात् पथ का निर्माता कहा जाता था ।
1395- यजुर्वेद :– यजुर्वेद में अनुष्ठानों तथा कर्मकांडों में प्रयुक्त होने वाले श्लोकों तथा मंत्रों का संग्रह है।
इसका गायन करने वाले पुरोहित अध्वर्यु कहलाते थे ।
यजुर्वेद गद्य तथा पद्य दोनों में रचित है। इसके दो पाठान्तर हैं- 1.कृष्ण यजुर्वेद 2. शुक्ल यजुर्वेद
कृष्ण यजुर्वेद गद्य तथा शुक्ल यजुर्वेद पद्य में रचित है
यजुर्वेद में राजसूय, वाजपेय तथा अश्वमेघ यज्ञ की चर्चा है।
यजुर्वेद में 40 मंडल तता 2000 ऋचाएं(मंत्र) है।
1396- सामवेद :- –सामवेद में अधिकांश श्लोक तथा मंत्र ऋग्वेद से लिए गए हैं।​
-सामवेद का संबंद संगीत से है।
-इस वेद से संबंधित श्लोक और मंत्रों का गायन करने वाले पुरोहित उद्गातृ कहलाते थे ।
-इसमें कुल 1549 श्लोक हैं। जिसमें 75 को छोड़कर सभी ऋग्वेद से लिए गए हैं।
-सामवेद में मंत्रों की संख्या 1810 है।
1397- अथर्ववेद :- –अथर्ववेद की ‘रचना’ अर्थवा झषि ने की थी ।
-अथर्ववेद के अधिकांश मंत्रों का संबंध तंत्र-मंत्र या जादू-टोने से है।
-रोग निवारण की औषधियों की चर्चा भी इसमें मिलती है।
-अथर्ववेद के मंत्रों को भारतीय विज्ञान का आधार भी माना जाता है।
-अथर्ववेद में सभा तथा समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है।
-सर्वोच्च शासक को अथर्ववेद में एकराट् कहा गया है। सम्राट शब्द का भी उल्लेख मिलता है।
-सूर्य का वर्णन एक ब्राह्मण विद्यार्थी के रूप में किया गया है।
-उपवेद, वेदों के परिशिष्ट हैं जिनके जरिए वेद की तकनीकी बातों की स्पष्टता मिलती है।
-वेदों की क्लिष्टता को कम करने के लिए वेदांगों की रचना की गई ।
-शिक्षा की सबसे प्रामाणिक रचना प्रातिशाख्य सूत्र है ।
-व्याकरण की सबसे पहल तथा व्यापक रचना पाणिनी की अष्टाध्यायी है।
-ऋषियों द्वारा जंगलों में रचित ग्रंथों को आरण्यक कहा जाता है।
-वेदों की दार्शनिक व्याख्या के लिए उपनिषदों की रचना की गई ।
-उपनिषदों को वेदांत भी कहा जाता है।
-उपनिषद का शाब्दिक अर्थ है एकान्त में प्राप्त ज्ञान ।
-यम तथा नचिकेता के बीच प्रसिद्ध संवाद की कथा कठोपनिषद् में वर्णित है।
-श्वेतकेतु एवं उसके पिता का संवाद छान्दोग्योपनिषद में वर्णित है।
-भारत का सूत्र वाक्य सत्यमेव जयते मुण्डकोपनिषद् से लिया गया है।
1398- स्मृति साहित्य :- –    मनु स्मृति सबसे पुरानी स्मृति ग्रंथ है।
    हिंदु धर्म में स्मृति ग्रंथों का सर्वाधिक प्रभाव है।
    इसमें सामान्य जीवन के आचार-विचार तथा नियमों की चर्चा है।
    पुराणों के संकलन का श्रेय वेदव्यास को जाता है। पुराणों की संख्या 18 है।
    सबसे प्राचीन पुराण मत्स्य पुराण है जिसमें विष्णु के दस अवतारों की चर्चा है।
    रामायण और महाभारत धर्मशास्त्र की श्रेणी में आते हैं।
    रामायण की रचना महर्षि वाल्मीकि ने की थी । रामायण 7 काण्डों में विभक्त है।
    महाभारत की रचना वदेव्यास ने की थी । इसमें कौरव तथा पांडवों के बीच युद्ध का वर्णन है। महाभारत 18 पर्वों में विभक्त है । इसे जयसंहिता या शतसाहस्त्र संहिता भी कहा जाता है।
श्रीमदभागवत गीता महाभारत के भीष्म पर्व का अंश है।

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