Kedaarnaath singh ka jeevan parichay केदारनाथ सिंह का जीवन परिचय

By | September 17, 2016

जीवन परिचय- केदारनाथ सिंह का जन्म 1934 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के चकिया नामक गांव में हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा गांव से तथा हाईस्कूल से m.a. तक की शिक्षा वाराणसी से हुई। सन 1964 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से आधुनिक हिंदी कविता में बिंब विधान विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त हुई। उनके कार्य क्षेत्र का विस्तार महानगर से ठेठ ग्राम अंचल तक है। वह उदय प्रताप कॉलेज वाराणसी, सेंट एंड्रयूज कॉलेज गोरखपुर, उदित नारायण कॉलेज पडरौना, तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर से संबंध रहे तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष पद से सेवानिवृत हुए ।
रचनाएं-उनकी रचनाएं इस प्रकार है- अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक रही है, यहां से देखो, अकाल में सारस, उत्तर कबीर, और अन्य कविताएं तथा बाघ।
कल्पना और छायावाद, आधुनिक हिंदी कविता में बिंब विधान तथा मेरे समय के शब्द उनकी आलोचना आदि प्रमुख रचनाएं हैं ।
काव्यगत विशेषताएं-केदारनाथ सिंह को अपनी रचनाओं पर अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं जिसमें ‘कुमार आशान’, कविता पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, मध्यप्रदेश का जशुआ सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान तथा व्यास सम्मान प्राप्त प्रमुख है। उन्होंने विधिवत काव्य रचना 1952-53 के आसपास आरंभ की। उन्होंने वाराणसी से ‘हमारी पीढ़ी’ पत्रिका का संपादन किया। तीसरा सप्तक कवियों में केदारनाथ जी भी थे। इनका पहला कविता संग्रह 1960 में प्रकाशित हुआ। इनके काव्य का प्रमुख वर्ण्य विषय ग्रामीण एवं शहरी समस्याएं हैं। कल्पना की शक्तिशाली क्षमता से समृद्ध उनकी कविता परिवेश के जटिल अनुभव को अत्यंत सहज रुप में व्यक्त करती है। उनकी कविता की दुनिया में रंग, रोशनी, रूप, गंध, दृश्य, सब एक दूसरे में खो जाते हैं। उन्होंने अनेक नए बिंबों का निर्माण किया है। साहित्य में स्थान-केदारनाथ सिंह ने अपने काव्य में ग्रामीण एवं शहरी समस्याओं को मुख्य विषय बनाया है। उन्होंने अपनी कविता में एकालाप के स्थान पर संवाद का प्रयोग किया है। चुप्पी और शब्द के रिश्ते की सही पहचान उनकी कृतियों में मिलती है। काम-काज, घर-हाट, खेत-खलीहान, गर्द-गुबार जैसे शब्द का प्रयोग कर अपनी कविता को इन्होंने नई चमक प्रदान की है। इनकी कविता नारों और आंदोलनों से नहीं बल्कि जीवन और उसके विविध सरकारों से अपनी यात्रा पूर्ण करती है। इस प्रकार आधुनिक कवियों में उनका महत्वपूर्ण स्थान है।

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