Mahaveer Swami महावीर स्वामी

By | October 15, 2016

> जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव थे ।
> जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे। जो काशी के इक्ष्वाकु वंशीय राजा अश्वसेन के पुत्र थे। इन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में सन्यास जीवन को स्वीकारा । इनके द्वारा दी गई शिक्षा थी। (1) हिंसा न करना (2) सदा सत्य बोलना (3) चोरी न करना तथा (4)संपत्ति न रखना ।
> महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर हुए ।
> महावीर का जन्म 540 ईसापूर्व में कुंडग्राम (वैशाली) में हुआ था। इनके पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक कुल के सरदार थे और माता त्रिशला लिच्छवि राजा चेटक की बहन थी ।
> महावीर की पत्नी का नाम यशोदा एवं पुत्री का नाम अनोज्ज प्रियदर्शनी था ।
>महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था ।उन्होंने 30 वर्ष की उम्र में माता पिता की मृत्यु के पश्चात अपने बड़े भाई नंदिवर्धन से अनुमति लेकर सन्यास जीवन को स्वीकारा था ।
> 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद महावीर को जृम्भिक के समीप ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे तपस्या करते हुए संपूर्ण ज्ञान का बोध हुआ।  इसी समय से महावीर जिन (विजेता), अर्हत (पूज्य) और निग्रंथ (बंधन हीन) कहलाए।
> महावीर ने अपना उपदेश प्राकृत (अर्धमागधी) भाषा में दिया ।
> महावीर के अनुयायियों को मूलतः निग्रंथ कहा जाता था ।
> महावीर के प्रथम अनुयाई उनके दामाद प्रियदर्शनी के पति जामिल थे ।
> प्रथम जैन भिक्षुणी नरेश दधिवाहन की पुत्री चंपा थी ।
> महावीर ने अपने शिष्यों को 11 गणधरों में विभाजित किया था ।
> आर्य सुधर्मा अकेला ऐसा गंधर्व था जो महावीर की मृत्यु के बाद भी जीवित रहा और जो जैन धर्म का प्रथम थेरा या मुख्य उपदेशक हुआ।
>  लगभग 300 ईसा पूर्व में मगध में 12 वर्षों का भीषण अकाल पड़ा जिसके कारण भद्रबाहु अपने शिष्यों सहित कर्नाटक चले गए किंतु कुछ अनुयाई स्थूलभद्र के साथ मगद में ही रुक गए भद्रबाहु के वापस लौटने पर मगध के साधुओं से उनका गहरा मतभेद हो गया जिसके फलस्वरुप जैन मत श्वेतांबर एवं दिगंबर नामक दो संप्रदायों में बट गया ।
> स्थूल भद्र के शिष्य श्वेतांबर (श्वेत वस्त्र धारण करने वाले) एवं भद्रबाहु के शिष्य दिगंबर (नग्न रहने वाले) कहलाए ।
> जैन धर्म के सप्तभंगी ज्ञान के अन्य नाम स्यादवाद और अनेकांतवाद हैं ।
> जैन धर्म ने अपने आध्यात्मिक विचारों को सांख्य दर्शन से ग्रहण किया ।
> जैन धर्म मानने वाले कुछ राजा थे – उदयिन, वंदराजा, चंद्रगुप्त मौर्य, कलिंग नरेश खारवेल, राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष और चंदेल शासक ।
> मैसूर के गंग वंश के मंत्री, चामुंड के प्रोत्साहन से कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में 10वीं शताब्दी के मध्य भाग में विशाल बाहुबली की मूर्ति (गोमतेश्वर की मूर्ति) का निर्माण किया गया ।
> खजुराहो के जैन मंदिरों का निर्माण चंदेल शासकों द्वारा किया गया।
>  मौर्योत्तर युग में मथुरा जैन धर्म का प्रसिद्ध केंद्र था। मथुरा कला का संबंध जैन धर्म से है ।
> जैन तीर्थकरों की जीवनी भद्रबाहु द्वारा रचित कल्पसूत्र में है ।
> जैन धर्म के त्रिरत्न हैं – सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक आचरण।
>  त्रिरत्न के अनुशीलन में निम्न पांच महाव्रतों का पालन अनिवार्य है – अहिंसा, सत्य वचन, अस्तेज, अपरिग्रह एवं ब्रम्हचर्य।
> जैन धर्म में ईश्वर की मान्यता नहीं है ।
> जैन धर्म में आत्मा की मान्यता है ।
> महावीर पुनर्जन्म एवं कर्मवाद में विश्वास करते थे ।
> 72 वर्ष की आयु में महावीर की मृत्यु (निर्माण) 468 ईसा पूर्व में बिहार राज्य के पावापुरी राजगीर में हो गई ।
> मल्ल राजा सृस्तिपाल के राजा प्रसाद में महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था।

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