Maithili sharn gupt ka jeevan parichay मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय

By | September 6, 2016

>> जीवन परिचय- राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म सन 1886 ईस्वी में चिरगांव जिला झांसी में हुआ था । इनके पिता सेठ रामचरण जी राम भक्त और काव्य प्रेमी थे । उन्हीं से गुप्त जी को काव्य संस्कार प्राप्त हुआ । इन्होंने कक्षा 9 तक ही विद्यालयीय शिक्षा प्राप्त की थी, किंतु स्वाध्याय से अनेक भाषाओं के साहित्य का ज्ञान प्राप्त किया। इन्होंने बचपन में ही काव्य रचना करके अपने पिता से महान कवि बनने का आशीर्वाद प्राप्त किया था। महावीर प्रसाद द्विवेदी के संपर्क में आने के बाद उनको अपना काव्य गुरु मानने लगे । पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त गुप्त जी के संस्कार को द्विवेदी जी ने संवारा और सजाया द्विवेदी जी के आदेश पर गुप्त जी ने सर्वप्रथम ‘भारत भारती’ नामक काव्य ग्रंथ की रचना कर युवाओं में  देशप्रेम की सरिता बहा दी। गुप्त जी गांधी जी के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रभाव में आए और उसमें सक्रिय भाग लिया । इन्होंने देश प्रेम, समाज सुधार, धर्म, राजनीति, भक्ति आदि सभी विषयों पर रचनाएं की । राष्ट्रीय विषयों पर लिखने के कारण ये राष्ट्रकवि कहलाये। सन 1948 ईसवी में आगरा विश्वविद्यालय तथा सन 1958 ईस्वी में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में डि०लीट् की मानक उपाधि से सम्मानित किया । 1954 में भारत सरकार ने पद्म भूषण की उपाधि से इन्हें अलंकृत किया। दो बार राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। उनका देहावसान 12 दिसंबर 1964 को हुआ।
>> साहित्यिक सेवाएं – गुप्त जी की प्रारंभिक रचनाएं कलकत्ता से प्रकाशित पत्रिका वैश्योपकरक में प्रकाशित होती थी । द्विवेदी जी के संपर्क में आने के बाद उनकी रचनाएं ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित होने लगी । सन 1909 में इनकी सर्व प्रथम पुस्तक ‘रंग में भंग’ का प्रकाशन हुआ।  इसके बाद सन 1912 ईसवी में ‘भारत भारती’ के प्रकाशित होने से इन्हें अपार ख्याति प्राप्त हुई। ‘साकेत’ नामक महाकाव्य पर हिंदी साहित्य सम्मेलन ने इन्हें ‘मंगला प्रसाद पारितोषिक’ प्रदान किया । इन्होंने अनेक अद्वितीय कृतियों का सृजन कर संपूर्ण हिंदी साहित्य जगत को विस्मित कर दिया । खड़ी बोली के स्वरूप निर्धारण और इसके विकास में इन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया।
>> रचनाएं – गुप्तजी आधुनिक काल के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि थे । इनकी 40 मौलिक तथा 6 अनुदित पुस्तकें प्रकाशित हुई है । इनकी प्रसिद्ध रचनाएं इस प्रकार हैं –
>> भारत भारती- इस काव्य ग्रंथ में देश के गौरव की कविताएं हैं ।
>> यशोधरा- इसमें गौतम के वन चले जाने के पश्चात उपेक्षित यशोधरा के चरित्र को काव्य का आधार बनाया गया है।
>> साकेत – इसमें साकेत (अयोध्या )का वर्णन है।
>> पंचवटी – इसमें सीता, राम और लक्ष्मण के आदर्श चरित्र का चित्रण है।
इसके अतिरिक्त जयद्रथ वध, जय भारत, द्वापर, सिद्धराज, अनघ, झंकार, नहुष, पृथ्वीपुत्र, रंग में भंग, गुरुकुल, किसान, हिंदू, चंद्रहास, मंगल घट, कुणाल गीत तथा मेघनाथ वध आदि महत्वपूर्ण रचनाएं हैं ।
>> भाषा शैली- गुप्त जी ने शुद्ध साहित्यिक एवं परिमार्जित खड़ी बोली में रचनाएं की है । इनकी भाषा सुगठित तथा ओज एवं प्रसाद गुण से युक्त है। उन्होंने अपने काव्य में संस्कृत, अंग्रेजी, उर्दू एवं प्रचलित विदेशी शब्दों का भी प्रयोग किए हैं । इनके द्वारा प्रयुक्त शैलिया हैं -प्रबंधात्मकता शैली, उपदेशात्मक शैली, विवरणात्मक शैली, गीति शैली तथा नाट्य शैली । वस्तुतः आधुनिक युग के प्रचलित अधिकांश शैली को गुप्त जी ने अपनाया है।

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