Makhanlal chaturvedi ka jeevan parichay माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन परिचय

By | September 17, 2016

जीवन परिचय-माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 1889 ईसवी में मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित बाबई नामक ग्राम में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री नंद लाल चतुर्वेदी था। इन्होंने घर पर रहकर ही संस्कृत, बांग्ला, गुजराती तथा अंग्रेजी का अध्ययन किया। आपने जीवन के आरंभ में अध्यापन कार्य किया। अनेक प्रतिष्ठित पत्रों के संपादक होने का गौरव भी इन्हें प्राप्त हुआ। प्रभा, प्रताप तथा कर्मवीर आपके संपादन कौशल के साक्षी बने थे। यह ‘श्री गणेश शंकर विद्यार्थी’ से विशेष प्रभावित थे। चतुर्वेदी जी को अनेक सम्मान प्राप्त हुए। ‘हिमकिरीटनी’ पर इनको ‘देव पुरस्कार’ एवं ‘साहित्य अकादमी’ पुरस्कार प्राप्त हुए। उनकी साहित्य सेवा को भारत सरकार ने पद्म भूषण की उपाधि तथा सागर विश्वविद्यालय में डी लिट् की उपाधि द्वारा सम्मानित किया। इनका निधन सन 1968 में हुआ।
रचनाएं-हिमकिरीटनी, हिमतरंगिनी, युगचरण, समर्पण, माता, वेणुलो गूंजे धरा, आदि इनके कविता संग्रह हैं।
काव्यगत विशेषताएं-चतुर्वेदी जी के काव्य का मूल स्वर राष्ट्रवादी है जिसमें त्याग बलिदान, कर्तव्य भावना और समर्पण का भाव विद्यमान है। उनकी कविताओं में भारतीयता के दर्शन होते हैं उनके काव्य में भारतीयता, राष्ट्रीयता तथा विद्रोह का स्वर मुखरित हुआ है। माखनलाल चतुर्वेदी की भाषा खड़ी बोली है। उनकी भाषा भावानुकूल परिवर्तित होती रही है। उर्दू, फारसी तथा अरबी शब्दों का प्रयोग इनकी भाषा में मिलता है। इन्होंने मुक्तक काव्य शैली द्वारा अपने भावनाओं को स्वर प्रदान किया है। विषयानुसार इनकी रचना शैली ने विविधता अपनाई है। कहीं ओजस्वी हुंकार लिए त्याग और देश भक्ति के स्वर है तो कहीं ममता प्रेम और करुणासक्ति वाग्धारा प्रवाहित हुई है। भावात्मकता आपकी शैली का प्रधान गुण है। इन्होंने प्रस्तुतीकरण को मर्मस्पर्शी बनाया है।
साहित्य में स्थान-माखनलाल चतुर्वेदी कवि होने के साथ-साथ एक पत्रकार, निबंधकार और सफल संपादक भी थे। अतः उनकी साहित्य सेवा बहुमुखी थी। उनके व्यक्तित्व की तेजस्विता और फक्कड़पन उनके काव्य में भी सर्वत्र प्रतिबिंबित हुए हैं। स्वाभिमानी और स्पष्टवादी होने के साथ में अति भावुक भी थे यही कारण है कि उनकी काव्य रचनाओं में जहां एक ओर आग है तो दूसरी और करुणा की भागीरथी भी है। इन्होंने त्याग, बलिदान, देशभक्ति का अनूठा संगम हिंदी काव्य सरिता को प्रदान किया है। शब्द उनकी भावनाओं का अनुगमन करते प्रतीत होते हैं।

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