मात्रक Unit

By | July 2, 2016

मूल मात्रक और व्युत्पन्न मात्रक किसे कहते हैं
मूल राशियों के मात्रक को मूल मात्रक कहते हैं। दूसरे शब्दों में, उन मात्रकों को, जो एक- दूसरे से पूर्णतः स्वतंत्र होते हैं अर्थात् एक-दूसरे से व्युत्पन्न नहीं किये जा सकते, मूल मात्रक कहते हैं।
मूल मात्रकों के पदों में अन्य सभी भौतिक राशियों के मात्रक प्राप्त किये जा सकते हैं। मूल मात्रकों को और सरल मात्रकों में विभाजित नहीं किया जा सकता।

जो मात्रक मूल मात्रकों से प्राप्त किये जाते हैं, व्युत्पन्न मात्रक कहलाते हैं।
उदाहरणार्थ:- क्षेत्रफल का मात्रक वर्ग मीटर या मीटर2, लम्बाई के मात्रक मीटर से प्राप्त होता है। वेग का मात्रक मीटर/ सेकण्ड, लम्बाई और समय के मात्रकों से प्राप्त होता है। अतः क्षेत्रफल और वेग के मात्रक व्युत्पन्न मात्रक हैं। ‘
मात्रकों की क्या-क्या पद्धतियाँ  हैं?’,’मात्रकों की निम्नलिखित पद्धतियाँ हैं:-
(1) cgs पद्धति
(2) fps पद्धति
(3) mks पद्धति
(4) SI पद्धति’
पद्धति किसे कहते हैं?
इस पद्धति का पूरा नाम सेंटीमीटर – ग्राम- सेकंड पद्धति है। इस पद्धति में लम्बाई का मात्रक सेंटीमीटर, द्रव्यमान का मात्रक ग्राम तथा समय का मात्रक सेकण्ड होता है। इस पद्धति को फ्रांसीसी पद्धति या मीट्रिक पद्धति भी कहते हैं और इसे संक्षेप में स. ग. स. पद्धति भी लिखते हैं।’
fps पद्धति किसे कहते हैं?
इसका पूरा नाम फुट- पौण्ड- सेकेण्ड पद्धति है। इस पद्धति में लम्बाई का मात्रक फुट, द्रव्यमान का मात्रक पौण्ड तथा समय का मात्रक सेकण्ड होता है। यह पद्धति ब्रिटिश पद्धति कहलाती है। इसे संक्षेप में फ. प. स. पद्धति भी लिखते हैं।’
mks पद्धति किसे कहते हैं?
इस पद्धति का पूरा नाम मीटर- किलोग्राम-
सेकण्ड पद्धति है। इस पद्धति में लम्बाई का मात्रक मीटर, द्रव्यमान का मात्रक किलोग्राम तथा समय का मात्रक सेकण्ड होता है। इसे संक्षेप में म. क.स. पद्धति भी लिखते हैं। वास्तव में यह पद्धति cgs पद्धति का ही एक बड़ा रूप है।’
SI पद्धति किसे कहते हैं?
यह मात्रकों की एक अन्तर्राष्टीय पद्धति है। SI फ्रांसीसी नाम le systeme International d’ Unites का संक्षिप्त रूप है। यह पद्धति mks पद्धति का परिवर्द्धित रूप है।
SI पद्धति में सात मूल मात्रक और दो पूरक मूल मात्रक हैं जो नीचे सारणी में दिये गये हैं―

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राशि              मात्रक का मान          संकेत
—             ———          —-
मूल मात्रक
(1)लम्बाई               मीटर                    m
(2)द्रव्यमान            किलोग्राम                kg
(3)समय                सेकण्ड                   s
(4)ताप                  केल्विन                  K
(5)विद्युतधारा          ऐम्पियर                 A
(6)ज्योति-तीव्रता      कैन्डेला                 cd
(7)पदार्थ की मात्रा      मोल                   mol
पूरक मूल मात्रक
राशि                   मात्रक का मान          संकेत
(1)समतल कोण        रेडियन                 rad
(2)घन कोण             स्टेरेडियन              sr’
SI मात्रकों को लिखते समय किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है?’,’SI मात्रकों को लिखते समय निम्न बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है:-

(1) मात्रकों के संकेतों को अंग्रेजी वर्णमाला के छोटे अक्षरों में लिखा जाता है। जैसे- मीटर जे लिए m, किलोग्राम के लिए kg आदि। किन्तु वैज्ञानिक के नाम प्रर रखा गया संकेत को बड़े अक्षर में लिखा जाता है। जैसे- केल्विन के लिए K आदि।

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(2) संकेतों को हमेशा एकवचन रूप में लिखा जाता है, बहुवचन रूप में नहीं। जैसे- हमें 10m या 20 kg लिखना चाहिए, 10 ms या 20 kgs नहीं।

(3) मात्रकों के संकेतों के आगे कोई विराम चिन्ह नहीं लगाया जाता है। जैसे- यदि किसी वस्तु की लम्बाई 4 मीटर है तो उसे 4 m लिखा जाता  है, 4m. नहीं।

(4) मात्रकों का पूरा नाम अंग्रेजी में लिखते समय समस्त अक्षर छोटे अक्षर होने चाहिए। जैसे- हमें लम्बाई जा मात्रक meter लिखना चाहिए, न कि Meter। ‘
SI पद्धति के क्या-क्या लाभ हैं?
मात्रकों की अन्य पद्धतियों की तुलना में SI पद्धति के निम्न लाभ हैं:-

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(1) इस पद्धति में एक भौतिक राशि का केवल एक ही मात्रक होता है।

(2) cgs और mks पद्धति की भाँति SI पद्धति भी दाशमिक पद्धति है।

(3) इस पद्धति में सभी व्युत्पन्न मात्रक, मूल और पूरक मात्रकों के केवल गुणा और भाग द्वारा प्राप्त किये जा सकते हैं।

(4) यह एक अन्तर्राष्ट्रीय पद्धति है।’

6 thoughts on “मात्रक Unit

  1. Pankaj Kumar Prasad

    मात्रर्को की पध्दति से क्या तात्पर्य है ?

  2. PankajKumar

    मात्रर्को की पध्दति से क्या तात्पर्य है ?

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