Output Device in hindi आउटपुट डिवाइस

By | June 16, 2016

Output Device in hindi आउटपुट डिवाइस (output device)-
आउटपुट डिवाइस का प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त परिणाम को देखने अथवा प्राप्त करने के लिए किया जाता है | आउटपुट डिवाइस, आउटपुट को हार्ड कापी अथवा सॉफ्ट कापी के रूप में प्रस्तुत करते हैं | सॉफ्ट कापी वह आउटपुट होता है जो उपयोगकर्ता को कम्प्यूटर के मानिटर पर दिखाई देता है अथवा स्पीकर में सुनाई देता है | जबकि होर्ड कापी वह आउटपुट होता है जो उपयोगकर्ता को पेपर पर प्राप्त होता है |
कुछ प्रमुख आउटपुट डिवाइस जो आउटपुट को सॉफ्ट कापी या हार्ड कापी के रूप में प्रस्तुत करते हैं –
1. मॉनिटर (monitor)- मॉनिटर को विजुअल डिस्प्ले डिवाइस भी कहते हैं | मॉनिटर कम्प्यूटर से प्राप्त परिणाम को सॉफ्ट कॉपी के रूप में दिखता है | मॉनिटर दो प्रकार के होते हैं; मोनोक्रोम डिस्प्ले मॉनिटर और कलर डिस्प्ले मॉनिटर |
मोनोक्रोम डिस्प्ले मॉनिटर टेक्स्ट को डिस्प्ले करने के लिए एक ही रंग का प्रयोग करता है और कलर डिस्प्ले मॉनिटर एक समय में 256 रंगों को दिखा सकता है | मॉनिटर पर चित्र छोटे-छोटे बिन्दुओं (DOTs) से मिलकर बनता है | इन बिन्दुओं को पिक्सल (Pixels) के नाम से जाना जाता है |
किसी चित्र की स्पष्टता ( Clearity ) तीन तथ्यों पर निर्भर करती है |
स्क्रीन का रिजोल्यूशन ( Resolution of screen) – किसी मॉनिटर को रिजोल्यूशन उसके क्षैतिज ( Horizontal) और उध्वार्धर ( vertical ) पिक्सेल्स की संख्या के गुणनफल के बराबर होता है | किसी मॉनिटर की रिसोल्यूशन जितनी अधिक होगी, उसके पिक्सेल उतने ही नजदीक होंगे और चित्र उतना ही स्पष्ट होगा |
डॉट पिच ( Dot Pitch )- दो कलर्ड पिक्सल के विकर्ण के बीच की दुरी को डॉट पिच कहते हैं | यदि किसी मॉनिटर का डॉट पिच कम-से-कम होगा तो उसका रिसोल्यूशन अधिक होगा और उस मॉनिटर में चित्र स्पष्ट होगा |
रिफ्रेश रेट ( Refresh Rate )- एक सेकेण्ड में कम्प्यूटर का मॉनिटर जितनी बार रिफ्रेश होता है, वह संख्या उसकी रेफरेश रेट कहलाती है | ज्यादा से ज्यादा रिफ्रेश होने पर स्क्रीन पर चित्र ज्यादा अच्छे और स्पष्ट दिखाई देते हैं |
कुछ प्रमुख प्रयोग में आने वाले मॉनिटर निम्न हैं-
कैथोड रे ट्यूब ( Cathode ray Tube –CRT )- यह एक आयताकार बॉक्स की तरह दिखने वाला मॉनिटर होता है | इसे डेस्कटॉप कम्प्यूटर के साथ आउटपुट देखने के लिए प्रयोग करते है | इसकी स्क्रीन में पीछे की तरफ फोस्फोरस की एक परत लगाई जाती है | इसमें एक इलेक्ट्रान गन होती है | CRT में एनालाग डाटा को इलेक्ट्रान गन के द्वारा मॉनिटर स्क्रीन पर भेजा जाता है | इलेक्ट्रान गन एनालाग डाटा को इलेक्ट्रान में परिवर्तित करता है तथा इलेक्ट्रान वर्टीकल और Horizontal प्लेट्स के बीच होते हुए फास्फोरस स्क्रीन पर टकराती है | इलेक्ट्रान स्क्रीन पर जिस जगह टकराती है उस जगह फोस्फोरस चमकने लगता है और चित्र दिखाई देने लगता है |
एलसीडी ( Liquid Crystal Display –LED )- LED के प्रकार की अधिक प्रयोग में आने वाली आउटपुट डिवाइस है | यह CRT की अपेक्षा काफी हल्का किन्तु महंगा आउटपुट डिवाइस है | इसका प्रयोग लैपटॉप, नोटबुक, डिजिटल घडी आदि में होता है | LED में दो प्लेट होती है | इन प्लेटों के बीच में एक विशेष प्रकार का Liquid भरा जाता है | जब प्लेट के पीछे से प्रकाश निकलता है तो प्लेट्स के अन्दर के द्रव एलाइन होकर चमकते हैं, जिससे चित्र दिखाई देने लगता है |
एलईडी ( Light Emitted Diode )- यह एक प्रकार का इलेक्ट्रानिक डिवाइस है | यह एक आउटपुट डिवाइस है जिसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त आउटपुट को देखने के लिए करते हैं | यह आजकल घरों में टेलीविजन की तरह प्रयोग किया जाता है | इसके अंदर छोटे-छोटे LEDs लगे होते हैं | जब विद्युत धारा इन LEDs से गुजरती है तो ये LEDs चमकने लगती है और चित्र LED स्क्रीन पर दिखाई लगता है |
3D मॉनिटर – यह के आउटपुट डिवाइस है जिसका प्रयोग आउटपुट को तीन डायमेंशन में देखने में होता है | यह 2D मॉनिटर की अपेक्षा ज्यादा स्पष्ट और साफ चित्र दिखाता है | यदि चित्र को 3D मॉनिटर में देखते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है की यह चित्र बिल्कुल वास्तविक चित्र है |
TFT ( Thin-Film-transistor )- TFT एक पिक्सल को कंट्रोल करने के लिए एक से चार ट्रांजिस्टर लगे होते हैं | ये ट्रांजिस्टर पैसिव मैट्रिक्स की अपेक्षा स्क्रीन को काफी तेज, चमकीला, ज्यादा कलरफुल बनाते हैं | इस आउटपुट डिवाइस की मुख्य बात ये है की इसमें बने चित्र को विभिन्न कोणों से देखा जा सकता है | TFT अन्य मॉनिटर की अपेक्षा अधिक महंगा होता है, लेकिन काफी अच्छी क्वालिटी का चित्र डिस्प्ले ( Display) करने वाला आउटपुट डिवाइस है |
प्रिंटर ( Printer )- प्रिंटर क प्रकार का आउटपुट डिवाइस है | इसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त डाटा और सुचना को किसी कागज पर प्रिंट करने के लिए करते हैं | यह ब्लैक और व्हाईट के साथ-साथ कलर डाक्यूमेंट को भी प्रिंट करता है | किसी भी प्रिंटर की क्वालिटी उसकी प्रिंटिंग क्वालिटी पर निर्भर करती है | किसी प्रिंटर की गति कैरेक्टर प्रति सेकेण्ड (CPS) में, लाइन प्रति मिनट (LPM) में , और पेज प्रति मिनट (PPM) में मापी जाती है |
किसी प्रिंटर की क्वालिटी डॉट्स प्रति इंच DPI में मापी जाती है, अर्थात पेपर पर प्रति इंच में जितने ज्यादा-से-ज्यादा बिंदु होंगे, प्रिंटिंग उतनी ही अच्छी होगी |
प्रिंटर को दो भागों में बांटा गया है –
1. इम्पैक्ट प्रिंटर (Impact Printer)
2. नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर ( Non Impact Printer)
इम्पैक्ट प्रिंटर ( Impact Printer)– यह प्रिंटर टाइपराइटर की तरह कार्य करता है | इसमें अक्षर छपने के लिए छोटे-छोटे पिन या हैमर्स होते है | इन पिनों पर अक्षर बने होते है | ये पिन स्याही से लगे हुए रिबन और उसके बाद पेपर पर प्रहार करते है, जिससे अक्षर पेपर पर छप जाते हैं | इम्पैक्ट प्रिंटर एक बार में एक कैरेक्टर या एक लाइन प्रिंट कर सकता है | इस प्रकार के प्रिंटर ज्यादा अच्छी क्वालिटी की प्रिंटिंग नही करते हैं |
इम्पैक्ट प्रिंटर चार प्रकार के होते हैं –
1. डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर ( Dot Matrix Printer) – इस प्रिंटर में पिनो की एक पंक्ति होती है जो कागज के उपरी सिरे पर रिबन पर प्रहार करती है | जब पिन रिबन पर प्रहार करते है तो डॉट्स (Dots) का एक समूह एक मैट्रिक के रूप में कागज पर पड़ता है, जिससे अक्षर या चित्र छप जाते है | इस प्रकार के प्रिंटर को पिन प्रिंटर भी कहते है | डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर एक बार में केवल एक कैरेक्टर ही प्रिंटर करता है |
2. डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy Wheel Printer) – डेजी व्हील प्रिंटर में कैरेक्टर की छपाई टाइपराइटर की तरह होती है | यह डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर की अपेक्षा अधिक रिजोल्यूशन की प्रिंटिंग करता है तथा इसका आउटपुट, डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर की अपेक्षा ज्यादा विश्वसनीय ( Reliable) होता है |
3. लाइन प्रिंटर (Line Printer) – इस प्रकार के इम्पैक्ट प्रिंटर द्वारा एक बार में पूरी लाइन प्रिंट होती है | ये भी एक प्रकार के इम्पैक्ट प्रिंटर होते हैं जो कागज पर दाब डालकर एक बार में पूरी एक लाइन प्रिंट करते हैं, इसीलिए इन्हें लाइन प्रिंटर कहते है | इनकी प्रिटिंग क्वालिटी ज्यादा अच्छी नही होती है लेकिन प्रिटिंग की गति काफी तेज होती है |
4. ड्रम प्रिंटर (Drum Printer) – ये एक प्रकार के लाइन प्रिंटर होते हैं, जिसमे एक बेलनाकार ड्रम ( Cylindrical Drum) लगातार घूमता रहता है | इस ड्रम में अक्षर उभरे हुए होते हैं | ड्रम और कागज के बीच में के स्याही से लगी हुई रिबन होती है | जिस स्थान पर अक्षर छापना होता है, उस स्थान पर हैमर कागज के साथ-साथ रिबन पर प्रहार करता है | रिबन पर प्रहार होने से रिबन ड्रम में लगे अक्षर पर दबाव डालता है, जिससे अक्षर कागज पर छप जाता है |
नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर (Non Impact Printer) – ये प्रिंटर कागज पर प्रहार नहीं करते हैं, बल्कि अक्षर ये चित्र प्रिंट करने के लिए स्याही की फुहार कागज पर छोड़ते हैं | नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर प्रिंटिग में इलेक्ट्रानिक केमिकल और इंकजेट तकनिकी का प्रयोग करते हैं | इसके द्वारा उच्च क्वालिटी के ग्राफिक्स और अक्षर छपा जाता है | ये प्रिंटर इम्पैक्ट प्रिंटर की तुलना में महंगे होते है लेकिन इनकी प्रिंटींग क्वालिटी अच्छी होती है |
नॉन इम्पैक्ट प्रिंटर के प्रकार –
1. इंकजेट प्रिंटर ( Inkjet Printer) – इंकजेट प्रिंटर में कागज पर स्याही की फुहार द्वारा छोटे-छोटे बिंदु डालकर छपाई की जाती है | इसकी छपाई की गति 1-4 पेज प्रति मिनट होती है | इसकी छपाई की गुणवत्ता भी अच्छी होती है | ये विभिन्न प्रकार के रंगों द्वारा अक्षर और चित्र छाप सकते हैं | इन प्रिंटरों की छपाई के लिए A4 आकार के पेपर का प्रयोग करते हैं | इंकजेट प्रिंटर पर रिबन के स्थान पर गीली स्याही से भरा हुआ कार्ट्रिज ( Cartridge) लगाया जाता है | यह कार्ट्रिज एक जोड़े के रूप में होते है | एक में काली स्याही भरी होती है तथा दुसरे में मैजेंटा (Magenta), पिली (Yellow), और सियान (green-bluish) रंग की स्याही भरी होती है | कार्टिज ही इस प्रिंटर का हेड होता है जो कागज पर स्याही की फुहार करके छपाई करता है |
2. थर्मल प्रिंटर (Thermal Printer) – यह पेपर पर अक्षर छापने के लिए ऊष्मा का प्रयोग करता है | ऊष्मा के द्वारा स्याही को पिघलाकर कागज पर छोड़ते हैं जिससे अक्षर या चित्र छपते हैं | फैक्स मशीन भी एक प्रकार का थर्मल प्रिंटर है | यह अन्य प्रिंटर की अपेक्षा धीमा और महंगा होता है और इसमें प्रयोग करने के लिए एक विशेष प्रकार के पेपर की आवश्यकता पड़ती है जो केमिकल युक्त पेपर होता है |
3. लेजर प्रिंटर (Laser Printer) – लेजर प्रिंटर के द्वारा उच्च गुणवत्ता के अक्षर और चित्र छापे जाते है | ये विभिन्न प्रकार के और विभिन्न स्टाइल के अक्षर छाप सकता है |
इसकी छपाई की विधि फोटोकापी मशीन से मिलती-जुलती है | इसमें कम्प्यूटर से भेजा गया डाटा लेजर किरणों की सहायता से इसके ड्रम पर चार्ज उत्पन्न कर देता है | इसमें एक टोनर होता है जो चार्ज के कारण ड्रम पर चिपक जाता है | जब यह ड्रम घूमता है और इसके नीचे से कागज निकलता है, तो टोनर कागज पर अक्षरों या चित्रों का निर्माण करता है | ये प्रिंटर अपनी क्षमता के अनुसार, 1 इंच में 300 से 1200 बिन्दुओं की सघनता द्वारा छपाई कर सकता है | ये एक मिनट में 5 से 24 पेज तक छाप सकता है |
4. इलेक्ट्रो मैग्नेटिक प्रिंटर (Electro Magnetic Printer) – इलेक्ट्रो मैग्नेटिक प्रिंटर या इलेक्ट्रो फोटोग्राफिक प्रिंटर बहुत तेज गति से छपाई करता है | ये प्रिंटर, पेज प्रिंटर की श्रेणी में आते हैं | ये प्रिंटर किसी डाक्यूमेंट में एक मिनट के अंदर 20,000 लाइनें प्रिंट कर सकता है अर्थात 250 पेज प्रति मिनट की दर से छपाई कर सकता है | इसका विकास पेपर कापियर तकनीक के माध्यम से किया गया था |
5. इलेक्ट्रो स्टैटिक प्रिंटर (Electro Static Printer) – इस प्रिंटर का प्रयोग सामान्यतः बड़े फार्मेट की प्रिंटिग के लिए किया जाता है | इसका प्रयोग ज्यादातर बड़े प्रिंटिंग प्रेस में किया जाता है, क्योंकि इनकी गति काफी तेज होती है तथा प्रिंट करने में खर्च कम आता है |
प्लॉटर ( Plotter )– प्लॉटर एक आउटपुट डिवाइस है, जिसका प्रयोग बड़ी ड्राइंग या चित्र जैसे की कंस्ट्रक्शन प्लान्स, मैकेनिकल वस्तुओं, मानचित्र आदि की ब्लूप्रिंट बनाने के लिए करते हैं | इसमें ड्राइंग बनाने के लिए पेन, पेन्सिल, मार्कर आदि राइटिंग टूल का प्रयोग होता है | इसमें एक समतल चौकोर सतह पर कागज़ लगाया जाता है | इस सतह से कुछ उपर एक ऐसी छड़ होती है, जो कागज के एक सिरे से दुसरे सिरे तक चल सकती है | इस छड़ पर अलग-अलग रंगों के दो या तीन पेन लगे होते हैं, जो छड़ पर आगे पीछे सरक सकते हैं | इस प्रकार छड़ और पेनों की सम्मिलित हलचल से समतल सतह के किसी भी भाग में कागज पर चिन्ह या चित्र बनाया जा सकता है | इसके द्वारा छपाई अच्छी होती है, परन्तु ये बहुत धीमे होते है तथा मूल्य भी अधिक लगता है |
प्लॉटर दो प्रकार के होते हैं-
1. फ़्लैट बैड प्लॉटर ( Flat Bed Plotter )– ये प्लॉटर साइज में छोटे होते हैं तथा इसे आसानी से मेज पर रखकर प्रिंटिंग की जा सकती है | इसमें जो पेपर प्रयोग होता है उसका आकर सिमित होता है |
2. ड्रम प्लॉटर (Drum Plotter )- ये साइज में काफी बड़े होते है तथा इसमें प्रयुक्त पेपर की लम्बाई असीमित होती है | इसमें पेपर के एक रोल का प्रयोग किया जाता है |
हेड फ़ोन्स ( Head Phones )- हेड फ़ोन एक प्रकार की आउटपुट डिवाइस है | जिसमे लाउड स्पीकर का एक जोड़ा होता है तथा इसकी बनावट ऐसी होती है कि ये सिर पर बेल्ट की तरह पहना जा सकता है तथा दोनों स्पीकर मनुष्य के कान के उपर आ जाते हैं | इसीलिए इसकी आवाज सिर्फ इसे पहनने वाला व्यक्ति ही सुन सकता है | किसी-किसी हैड फ़ोन के साथ माइक भी लगा होता है, जिससे सुनने के साथ-साथ बात भी की जा सकती है | इस उपकरण का प्रयोग प्रायः टेलीफोन आपरेटरों, काल सेंटर आपरेटरों, कमेंट्रेटर द्वारा किया जाता है | इसे स्टोरियो फ़ोन्स, हेड सेट, या कैन्स के नाम से भी जाना जाता है |
प्रोजेक्टर ( Projector )- यह एक प्रकार का आउटपुट डिवाइस है, जिसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्राप्त सुचना या डाटा को एक बड़ी स्क्रीन पर देखने के लिए करते हैं | इसकी सहायता से एक समय में बहुत सारे लोग एक समूह में बैठकर कोई परिणाम देख सकते हैं | इसका प्रयोग क्लास रूम ट्रेनिंग या एक बड़े कांफ्रेंस हाल जिसमे ज्यादा संख्या में दर्शक हो जैसी जगहों पर किया जाता है | इसके द्वारा छोटे चित्रों को बड़ा करके सरलतापूर्वक देखा जा सकता है |
इनपुट / आउटपुट पोर्ट ( Input/ Output Port )– पेरिफेरल डिवाइस को कम्पूटर से जोड़ने के जिस माध्यम का प्रयोग होता है, उन्हें इनपुट/आउटपुट पोर्ट कहते हैं | यह एक बाह्य इंटरफ़ेस होता है , जिसमे इनपुट/आउटपुट डिवाइस जैसे- प्रिंटर, मॉडेम और जॉयस्टिक आदि को कम्प्यूटर से जोड़ते हैं |
इनपुट/आउटपुट पोर्ट निम्न प्रकार के होते हैं –
पैरेलल पोर्ट ( Parallel Port )- पैरेलल पोर्ट एक माध्यम होता है, जिसमे आठ या उससे अधिक तारों को जोड़ सकते हैं | इसमें आठ तारों से एक साथ डाटा ट्रान्सफर होता है | इसी वजह से इसकी डाटा ट्रान्सफर की speed तेज होती है | इसका प्रयोग कम्प्यूटर से प्रिंटर को जोड़ने के लिए किया जाता है |
सीरियल पोर्ट ( Serial Port )– सीरियल पोर्ट के द्वारा एक बार में एक बिट डाटा भेजा जा सकता है | इसके द्वारा बहुत धीमी गति से डाटा ट्रान्सफर होता है | इसका प्रयोग माडेम, प्लाटर, बार कोड रीडर आदि को कम्प्यूटर से जोड़ने के लिए करते हैं | इस पोर्ट को कम्युनिकेशन पोर्ट या कॉम भी कहा जाता है |
युनिवर्सल सीरियल बस ( Universal Serial Bus-USB)– यह सर्वाधिक प्रयोग में आने वाला बाह्य पोर्ट है जो लगभग सभी कम्प्यूटरों में लगा होता है | सामान्यतः दो से चार USB पोर्ट कम्प्यूटर में लगे होते हैं | USB में प्लग और प्ले फीचर होते हैं जो किसी डिवाइस को कम्प्यूटर से जोड़ने तथा चलाने में सहायक होते हैं | एक सिंगल USB पोर्ट में 127 डिवाइसेज जो जोड़ा जा सकता है |
फायर वायर (Fire Wire)– इसका प्रयोग आडियो, वीडियो या मल्टीमिडिया जैसे की वीडियो कैमरा आदि को जोड़ने के लिए किया जाता है | यह एक महँगी तकनिकी है, जिसका प्रयोग बड़ी मात्रा में डाटा ट्रान्सफर करने के लिए किया जाता है | हार्ड डिस्क ड्राइव और नई DVD ड्राइव को फायर वायर के द्वारा कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है | इसके द्वारा 400 MB/Sec की दर से डाटा ट्रांसफर किया जा सकता है |

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क्या आप जानते हैं-
• मॉडेम का प्रयोग डाटा को प्राप्त करने और भेजने के लिए किया जाता है |
• कम्प्यूटर को चलाये जाने के लिए आवश्यक डिवाइस को स्टैण्डर्ड डिवाइस कहा जाता है, जैसे- कीबोर्ड, फ्लापी ड्राइव, हार्ड डिस्क आदि |
• मॉनिटर की रिफ्रेश रेट हर्ट्ज में नापी जाती है |
• मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र बनने के कारण मॉनिटर की स्क्रीन काली या रंगहीन हो जाती है | जो एक वायरस की कार्य करता है | अतः मॉनिटर का प्रयोग करते समय सभी चुम्बकिय उपकरण हटा देना चाहिए |
• ग्राफिक डिस्प्ले यूनिट मॉनिटर अल्फा न्यूमेरिक अक्षरों के साथ-साथ ग्राफ्स और डायग्राम को भी प्रदर्शित कर सकता है |

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