Padumlala punnalal bakhshi ka jivan prichay पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय

By | August 28, 2016

जीवन परिचय- बक्सी जी का जन्म सन 1894 ईस्वी में खैरागढ़ जिला जबलपुर मध्य प्रदेश में हुआ था । उनका जन्म एक साहित्य-सेवी परिवार में हुआ था। बीए तक की शिक्षा ग्रहण करके साहित्य सेवा की ओर प्रवृत्त हुए, उन्होंने अनेक कहानियां भी लिखी उनकी रचनाएं ‘सरस्वती’ पत्रिका में प्रकाशित होती रहती थी । उनकी प्रतिभा एवं योग्यता से प्रभावित होकर आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने 1920 ईस्वी में इन्हें प्रयाग बुलाया और ‘सरस्वती’ का सरकारी संपादक बनाया । आपने तीन चरणों में लगभग 11 वर्ष तक ‘सरस्वती’ का कुशल संपादन किया । प्रयाग से प्रकाशित ‘छाया’ नामक मासिक पत्रिका भी इन्होंने संपादन किया।  1935 ईस्वी में खैरागढ़ के विक्टोरिया हाई स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक नियुक्ति हुए और 14 वर्ष की सेवा के उपरांत 1949 ईस्वी में शिक्षा से कार्यमुक्त हो गए । आपकी साहित्य सेवाओं के लिए 1949 ईस्वी में हिंदी साहित्य सम्मेलन में आपको साहित्य वाचस्पति तथा 1960 ईस्वी में सागर विश्वविद्यालय ने डी लिट की उपाधि प्रदान की । 1950 ईसवी में मध्य प्रदेश साहित्य सम्मेलन के सभापति निर्वाचित हुए 1959 ईस्वी में दिग्विजय स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजनांदगांव में आप हिंदी विभाग के अध्यक्ष बने। 77 वर्ष की आयु में सन् 1971 में आप का निधन हो गया।
साहित्यक योगदान – बख्शी जी सरल स्वभाव के साहित्यकार थे । इनके स्वभाव की सरलता और सात्विकता इनके साहित्य में भी विद्यमान है । सतत अध्यन चिंतन और मनन से इन्होंने अपने साहित्यकार के व्यक्तित्व का निर्माण किया था । वह निबंधकार, कवि, कहानीकार, अनुवादक, संपादक, समालोचक तथा पत्रकार आदि के रूप में साहित्य जगत में जाने जाते हैं । उन्होंने निबंध लेखन में द्विवेदी युग तथा छायावाद दोनों का प्रतिनिधित्व किया तथा परिस्थिति के अनुरुप इनका निबंध साहित्य परिवर्तित परिवर्धित होता रहा है। कहानीकार के रूप में मौलिक तथा अनुदित दोनों प्रकार की कहानियां लिखी।
रचनाएं – इनकी रचनाएं अधोलिखित है –
1. निबंध संग्रह- प्रबंध-पारिजात,पंचपात्र, पद्मवन,  कुछ और कुछ, यात्री, मरकंद बिंदु, बिखरे पन्ने, तुम्हारे लिए, तीर्थ सलिल, त्रिवेणी आदि आपके निबंध संग्रह है ।
2. कहानी संग्रह- झलमला तथा अंजलि ।
3. काव्य संग्रह – शतदल तथा अश्रुदल।
4. समालोचना- विश्व साहित्य, हिंदी साहित्य विमर्श, साहित्य शिक्षा, हिंदी उपन्यास साहित्य, हिंदी कहानी साहित्य।

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5. जीवनी- मेरी अपनी कथा ।

6. संपादन- बख्शी जी ‘सरस्वती’ एवं ‘छाया’ के संपादक रहे । ‘मंजरी’ नामक पुस्तक का संपादन किया ।
भाषा-बख्शी जी का विचार है कि प्रत्येक विषय के वर्णन विवेचन के लिए अपनी भाषा को अपनाना चाहिए । विदेशी भाषा से न लेना चाहिए और ना ही इसके प्रति मोह दिखाना चाहिए । उन्होंने विदेशी शब्दों का बहिष्कार किया दैनिक प्रयोग में अपनी भाषा के साथ साथ घुल-मिल जाने वाले उर्दू भाषा के शब्द तेज, दिमाग, सुबह, जोर, और अंग्रेजी के  मास्टर, डॉक्टर, आदि को उन्होंने लिया है ।
अपने निबंधों में सरल संस्कृत तत्सम शब्दों का ही वे प्रयोग करते हैं । सामान्यता प्रचलित मुहावरे भी उनकी भाषा में आ गए हैं उन्होंने छोटे-छोटे प्रभावपूर्ण वाक्यों का प्रयोग किया है । कुल मिलाकर इनकी भाषा शुद्ध, साहित्यिक, सहज एवं बोद्धगम्य खड़ी बोली है । जो सामान्य विषयों के विवेचन में व्यवहारिक हो जाती ।
शैली –बक्शी जी की शैली के विविध रूप मिलते हैं। वह अधोलिखित है

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1. भावात्मक शैली – इस शैली के दर्शन ललित निबंधों में होते हैं इसमें आकर्षण, रोचकता एवं सजीवता है । यह छोटे-छोटे भाषा सरल, मधुर एवं भाव को व्यक्त करने में समर्थ है ।

2. विचारात्मक शैली – इसमें लेखक की गंभीरता, स्पष्टता, तार्किकता एवं संतुलन दिखाई देता है। विचारों को प्रभावशाली बनाने के लिए छोटी-छोटी घटनाएं, संवादों तथा वाक्यांशों को भी इन्होंने यथावसर प्रयोग किया है । भाषा सरल और गंभीर विचार प्रतिपादन में पूर्ण सक्षम है।
3. विवरणात्मक शैली – इस शैली में कथा की प्रधानता होती है और घटनाओं का यथातथ्य वर्णन होता है । इसमें कल्पना तथा अनुभूति भी होती है इन निबंधों की भाषा आकर्षक एवं प्रभावोत्पादक है।
4. व्याख्यात्मक शैली- गंभीर विषयों के प्रतिपादन में इस शैली का प्रयोग किया गया है। आलोचनात्मक निबंध में उपयोगी होती है विषय की गंभीरता के नाते इस में कहीं-कहीं क्लिष्ठता आ गई है।
5. हास्यव्यंगात्मक शैली – यह उनके ललित निबंधों में प्रयुक्त हुई है तथा भाषा प्रयुक्त होती है और इसकी प्रमुख विशेषता है आत्मव्यंजक शैली आत्मपरक निबंधों में इस शैली को अपनाया गया है। क्या लिखूं निबंध आत्माव्यंजक शैली का सुंदर नमूना है । इसमें लेखक की निजता और उसका व्यक्तित्व उभरकर सामने आता है।

2 thoughts on “Padumlala punnalal bakhshi ka jivan prichay पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय

  1. यशवन्त राजपूत

    इनका जन्म मध्यपृदेश के जबलपुर जिले के खैरागढ स्थान मे हुआ था

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