भौतिकी का अन्य विषयों से सम्बन्ध physics ka anya vishyon se sambandh

By | July 2, 2016

physics ka anya vishyon se samband

भौतिकी और गणित में क्या संबंध है?
भौतिकी एक यथार्थ विज्ञान है जो प्रयोग और मापन पर आधारित है। अतः भौतिकी के नियमों व सिद्धांतों को समझने के लिए गणित का ज्ञान होना आवश्यक है।सैद्धान्तिक भौतिकी के विकास में गणित एक शक्तिशाली साधन साबित हुआ है। गणित के बिना भौतिकी संसार का प्रसार हो पाना कठिन है। रेडियो, टेलीविजन, कंप्यूटर, उपग्रह इत्यादि गणित और भौतिकी की संयुक्त देन है। यह सत्य है कि एक व्यक्ति, जो अधिक गणित जानता है, दिये गये समय में भौतिकी के अधिक-से-अधिक सिद्धान्तों को समझ सकता है।’
भौतिकी और रसायन विज्ञान में क्या सम्बन्ध है?’,’रसायन विज्ञान में भौतिकी के नियमों और तकनीकों का उपयोग बहुतायत रूप से किया जाता है।
उदाहरण:-
1:-परमाणु संरचना की खोज भौतिकी वैज्ञानिकों ने की। परमाणु संरचना के अध्ययन से आवर्त-सारणी में तत्वों की व्यवस्था, संयोजकता की प्रकृति एवं रासायनिक बन्ध को सही ढंग से समझा जा सकता है।
2:- रेडियोएक्टिवता भौतिकी की देन है। इसका अध्ययन कर पदार्थ की अति सूक्ष्म मात्राओ का भी पता लगाया जा सकता है।’
जीव विज्ञान और भौतिकी में क्या सम्बन्ध है?
जीव विज्ञान में भी भौतिकी के नियमों और उसकी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण:-
1:-जीव विज्ञान में प्रयुक्त होने वाले सूक्ष्मदर्शी भौतिकी की देन है। जिसकी सहायता से कोशिका की संरचना को आसानी से समझा जा सकता है।

2:- भौतिकी के नियमों का प्रयोग करके रक्तचाप, श्वसन, नेत्रों द्वारा प्रतिबिम्ब बनने आदि का अध्ययन किया जाता है। ‘
खगोल विज्ञान और भौतिकी में क्या संबंध है?
खगोल विज्ञान के अंतर्गत भी भौतिकी के नियमों एवं तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
उदाहरण:-
1:- भौतिकी के नियमों द्वारा खगोलीय पिण्डों की गति का अधययन किया जाता है।

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2:-भौतिकी  यंत्रों जैसे, प्रकाशीय दूरदर्शी एवं रेडियो दूरदर्शी की सहायता से खगोलीय पिण्डों का अधययन किया जाता है। प्रकाशीय दूरदर्शी की सहायता से गैलीलियो ने बृहस्पति के उपग्रहों की तथा विलियम हर्शेल ने युरेनस ग्रह की खोज की थी। रेडियो दूरदर्शी की सहायता से नये खगोलीय पिण्डों जैसे, क्वासर्स, पल्सर्स आदि की खोज की गई।
अंतरिक्ष भौतिकी और खगोलीय भौतिकी के अंतर्गत खगोल विज्ञान का ही अधययन किया जाता है।’
भौतिकी का प्रौद्योगिकी से क्या संबंध है?
आधुनिक प्रौद्योगिकी को अनुप्रयुक्त भौतिकी माना जाता है क्योंकि प्रौद्योगिकी में भौतिकी के नियमों एवं सिद्धान्तों का उपयोग करके अनेक प्रकार के यंत्र, उपकरण एवं युक्तियों का निर्माण किया गया है।
उदाहरण:-
1:- आकाश और द्रव्य में विद्युत्-चुम्बकीय तरंगों के संचरण के सिद्धांत के अध्ययन से रेडियो, टेलीविजन, रडार आदि का विकास हुआ।

2:- सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण के नियम के अध्ययन से ही विभिन्न प्रकार के अंतरिक्ष यानों और उपग्रहों का प्रक्षेपण संभव हुआ।’
कुछ प्रौद्योगिक उपलब्धि व उनके वैज्ञानिक नियम बताएँ।’,’नीचे सारणी में कुछ प्रौद्योगिक उपलब्धियाँ तथा उनके वैज्ञानिक नियम दिये जा रहे हैं:-

प्रौद्योगिक उपलब्धि             वैज्ञानिक नियम
————–            ———–
1:-इलेक्ट्रिक जनरेटर   –    फैराडे के विद्युत्-चुम्बकीय –  प्रेरण के नियम।

2:-कम्प्यूटर                –    इलेक्ट्रानिक परिपथ का –  आंकिक तर्क।

3:-आनुवंशिक इंजीनियरी – आनुवंशिकता में DNA की –  भूमिका।

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4:-वायुयान               –      तरलगतिकी बरनौली का – प्रमेय।

5:-कण त्वरण           –      विद्युत्-चुम्बकीय क्षेत्र में – आवेशित कणों की गति।

6:-रेडियो और टेलीविजन -विद्युत्-चुम्बकीय तरंगों का –  संचरण।

7:-परमाणु भट्ठी           –  मंदगामी न्यूट्रोनों के द्वारा                                           युरेनियम का विखंडन।

8:-रॉकेट नोदन            –     न्यूटन के गति के नियम।’
भौतिकी का समाज से क्या सम्बन्ध है?
भौतिकी ने मनुष्यों की जीवन पद्धति एवं विचारधारा में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है।
भौतिकी के नियमों एवं सिद्धान्तों का उपयोग करके प्रौद्योगिकी में अनेक प्रकार के यंत्रों, उपकरणों एवं युक्तियों का निर्माण किया गया है जिनके उपयोग से मानव के जीवन स्तर में काफी सुधर आया है। टेलीविजन, कम्प्यूटर, रोबोट आदि आज जीवन का एक जरुरी अंग बन गए हैं। शिक्षा, कृषि, उद्योग, चिकित्सा आदि क्षेत्रों में भौतिकी ने अविस्मरणीय योगदान दिया है।
भौतिकी के अध्ययन से मनुष्य का दृष्टिकोण वैज्ञानिक बनता है।भौतिकी के नियम व सिद्धांत प्रकृति के सत्य को खोजने में मनुष्य की सहायता करते हैं तथा उसकी ज्ञान पिपासा को दूर करते हैं।’

कुछ महान भौतिकशास्त्री और उनके कार्यो की विवेचना करें।’,’भौतिकिशास्त्री     –   देश      –    कार्य/खोज

न्यूटन    –   इंग्लैण्ड   –    सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम, प्रकाश का कणिका सिद्धांत, गति के नियम, परावर्तक दूरदर्शी।
फैराडे     –    इंग्लैंड    –    विद्युत्-चुम्बकीय प्रेरण के  नियम , डायनेमो, विद्युत्- अपघटन के नियम।
आइन्स्टीन  –  जर्मनी   –  आपेक्षिकता का सिद्धांत, प्रकाश-विद्युत् प्रभाव की व्याख्या, द्रव्य और ऊर्जा की तुल्यता।
गैलिलियो  –    इटली   –    गैलिलियन टेलिस्कोप।
राण्ट्र्जन    –   जर्मनी   –    X-किरणें।
मैक्सवेल –    स्काटलैंड  –  प्रकाश का विद्युत्- चुम्बकीय सिद्धांत, गैस के अणुओं के माध्य वेग- तरण नियम।
सर सी.वी. रमन –   भारत   –   रमन प्रभाव (प्रकाश का  रमन  विकीर्णन)।
जी.मारकोनी  –   इटली   –   बेतार सन्देश।
आर.ए. मिलिकन   –      अमेरिका   इलेक्ट्रान के आवेश का निर्धारण।
चैडविक    –     इंग्लैण्ड    –  न्यूट्रान की खोज।
सत्येन्द्र नाथ बोस   –  भारत   –  बोस आइन्स्टीन साख्यिकी का विकास।
मेघनाथ साहा   –   भारत   –  तापीय आयनीकारण   का सिद्धांत।
सुब्रह्मण्यम चन्द्रशेखर    –   भारत    –  तारों की जीवन गाथा।
जे.जे.थॉमसन    –  इंग्लैंड    –    इलेक्ट्रानों और   धनात्मक किरणों के लिये  e/m का निर्धारण।
बेकुरल     –      फ्रांस    –     रेडियो सक्रियता की  खोज।
पाउली     –      आस्ट्रिया  –  पाउली का अपवर्जन सिद्धांत।
एच.यूकावा  –    जापान   –   नाभिकीय बल का सिद्धांत।
डी-ब्राग्ली    –    फ्रांस   –    प्रकाश की द्वैती प्रकृति, इलेक्ट्रोन की तरंग प्रकृति।
हाइजेनबर्ग   –    जर्मनी   –  अनिश्चितता का सिद्धांत, मैट्रिक्स यान्त्रिकी का विकास।
नील्स बोर   –     डेनमार्क  –  हाइड्रोजन परमाणु का क्वाण्टम मॉडल।
माइकल्सन  –   यू.एस.ए.   –  माइकल्सन-मोरले  प्रयोग।
होमी जे.भाभा  –  भारत     –  ब्रम्हाण्ड किरणों की  बौछार
आर्किमिडीज    –   ग्रीस     –   आर्किमिडीज का सिद्धांत।’

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