prachin itihas ke source. प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत

By | June 30, 2016

prachin itihas ke source

1 प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत
उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में समुद्र तक फैला यह उपमहाद्वीप भारतवर्ष के नाम से ज्ञात है । जिसे महाकाव्य तथा पुराणों में भारतवर्ष अर्थात् भारत का देश तथा यहां के निवासियों को भारतीय अर्थात् भारत की संतान कहा गया है। यूनानियों ने भारत को इंडिया तथा मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों ने हिंदुस्तान के नाम से संबोधित किया है । भारतीय इतिहास को अध्ययन की सुविधा के लिए तीन भागों में बाटा गया है –
1. प्राचीन भारत
2. मध्यकालीन भारत और
3. आधुनिक भारत
प्राचीन भारत
प्राचीन भारतीय इतिहास के विषय में जानकारी मुख्यतः चार स्त्रोतों से प्राप्त होती है- 1. धर्म ग्रंथ 2. एतिहासिक ग्रंथ 3. विदेशियों का विवरण 4. पुरातत्व संबंधी साक्ष्य
धर्म ग्रंथ एवं ऐतिहासिक ग्रंथ से मिलने वाली महत्वपूर्ण जानकारी
भारत का सर्व प्राचीन धर्म ग्रंथ वेद है, जिसके संकलनकर्ता महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास को माना जाता है । वेद चार है ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद ।
ऋग्वेद  ऋचाओं के क्रमबद्ध ज्ञान को ऋग्वेद कहा जाता है। इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्ति और 10462 ऋचाएं है। इस वेद की ऋचाओ कोेपढ़ने वाले ऋषि को होतृ कहते हैं । इस वेद से आर्य के राजनीतिक प्रणाली एवं इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है । विश्वामित्र द्वारा रचित ऋग्वेद के तीसरे मंडल में सूर्य देवता सावित्री को समर्पित प्रसिद्ध गायत्री मंत्र है । इसके 9 वें मंडल में देवता सोम का उल्लेख है । इसके 8 वें मंडल की हस्तलिखित विचारों को खिल कहा जाता है। चतुष्वर्णय समाज की कल्पना का आदि स्रोत ऋग्वेद के दसवें मंडल में वर्णित पुरुष सूक्ति है । जिसके अनुसार चार वर्णों ब्राम्हण, क्षत्रिय, वैश्य तथा शुद्ध आदि पुरुष ब्रह्मा के क्रमशः मुख, भुजाओं, जंघाओं और चरणों से उत्पन्न हुए हैं। वामनावतार के 3 पदों के आख्यान का प्राचीनतम स्रोत ऋग्वेद है । ऋग्वेद में इंद्र के लिए 250 तथा अग्नि के लिए 200  ऋचाओं की रचना की गई है । धर्मसूत्र चार प्रमुख जातियों की स्थितियों व्यवसाइयों साहित्य कर्तव्य तथा विशेषाधिकारों में स्पष्ट विभेद करता है । प्राचीन भारतीय इतिहास के साधन के रुप में वैदिक साहित्य में ऋग्वेद के बाद शतपथ ब्राह्मण का स्थान है ।
ईसा पूर्व एवं ईस्वी -वर्तमान में प्रचलित ग्रिगेरियन कैलेंडर या जूलियन कैलेंडर ईसाई धर्मगुरु ईसा मसीह के जन्म वर्ष पर आधारित है । ईसा मसीह के जन्म के पहले को ईसा पूर्व B.C ( before the birth of Jesus Christ)  कहा जाता है। इसा पूर्व में वर्षो की गिनती उलटे क्रम में होती है।
जैसे महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ईसापूर्व में एवं मृत्यु 483 ईसापूर्व में हुआ यानि इसा मसीह के जन्म के 563 वर्ष पूर्व महात्मा बुद्ध का जन्म एवं 483 वर्ष पूर्व मृत्यु हुआ । ईसा मसीह की जन्म तिथि से आरंभ हुआ सन इसवी सन कहलाता है। इसके लिए संक्षेप में  AD लिखा जाता है । AD का शाब्दिक अर्थ है इन द ईयर ऑफ लॉर्ड जीसस क्राइस्ट ।
यजुर्वेद– सस्वर पाठ के लिए मंत्र तथा बली के समय अनुपालन के नियमों का संकलन यजुर्वेद कहलाता है। इसके पाठ करता को अध्वर्यु कहते हैं । यह एक ऐसा वेद है जो गद्य एवं पद्य दोनों में है ।
सामवेद यह गाए जा सकने वाली ऋचाओं का संकलन है । इसके पाठ करता को उद्रातृ कहते हैं । इसे भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है ।
अथर्व वेद अथर्व ऋषि द्वारा रचित किस वेद में रोग निवारण , तंत्र मन्त्र, जादू टोना ,शाप, वशीकरण , आशीर्वाद ,स्तुति प्रायश्चित, औषधि, अनुसंधान, विवाह ,प्रेम, राज कर्म, मातृभूमि महात्मा आदि विविध विषयोँ से सम्बद्ध मंत्र तथा सामान्य मनुष्य के विचारों ,विश्वासों ,अंधविश्वासों इत्यादि का वर्णन है। अथर्ववेद कन्याओं के जन्म की निंदा करता है। इसमें सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है।
सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद और सबसे बाद का वेद अथर्ववेद है ।
वेदों को भलीभांति समझने के लिए 6 वेदांगों की रचना हुई । यह है -ज्योतिष, शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्ति तथा छंद । भारतीय ऐतिहासिक कथाओं का सबसे अच्छा क्रमबद्ध विवरण पुराणों में मिलता है । इसके रचयिता लोमहर्ष अथवा उनके पुत्र उग्रश्रवा माने जाते हैं । उनकी रचना 18 है जिनमें से केवल पांच मत्स्य, वायु ,विष्णु ,ब्राह्मण एवं भागवत में ही राजाओं की वंशावली पाई जाती है ।
पुराणों में मत्स्य पुराण सबसे प्राचीन एवं प्रमाणित है । अधिकतर पुराण सरल संस्कृत श्लोक में लिखे गए हैं । स्त्रियां तथा शुद्र जिन्हें वेद पढ़ने की अनुमति नही थी वह भी पूराण सुन सकते थे। पुराणों का पाठ पुजारी मंदिरों में किया करते थे । इस्त्री की सर्वाधिक गिरी हुई स्थिति मैत्रेयनी संहिता से प्राप्त होती है । जिसमें जुआ और शराब की भांति स्त्री को पुरुष का तीसरा मुख्य दोष बताया गया है।
शतपथ ब्राम्हण में स्त्री को पुरुष का अर्धांगिनी कहा गया है ।
स्मृति ग्रंथों में सबसे प्राचीन एवं प्रमाणित मनुस्मृति मानी जाती है। यह शुंग काल का मानक ग्रंथ है ।
नारद स्मृति गुप्त युग के विषय में जानकारी प्रदान करता है ।
जातक में बुद्ध का पुनर्जन्म की कहानी वर्णित है ।
हीनयान का प्रमुख ग्रंथ कथावस्तु है। जिसमें महात्मा बुद्ध का जीवन चरित अनेक कथानकों के साथ वर्णित है ।
जैन साहित्य को आगम कहा जाता है । जैन धर्म का प्रारंभिक इतिहास कल्पसूत्र से ज्ञात होता है। जैन ग्रंथ भगवती सूत्र में महावीर के जीवन कृतियों तथा अन्य समकालिकको के साथ उनके संबंधों का विवरण मिलता है ।
अर्थशास्त्र के लेखक चाणक्य (कौटिल्य या विष्णुगुप्त ) हैं।यह 15 अध्यायों एवं 180 प्रकरणों में विभाजित है । इससे मौर्य कालीन इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है।
संस्कृत  साहित्य में ऐतिहासिक घटनाओं को क्रमबद्ध लिखने का सर्व प्रथम प्रयास कल्हण के द्वारा किया गया । कल्हण द्वारा रचित पुस्तक राजतरंगिणी है इसका संबध कश्मीर के इतिहास से है ।
अरबों की सिंध विजय का वृत्तांत चचनामा (लेखक अली अहमद) में सुरक्षित है।
अष्टाध्याई संस्कृत भाषा व्याकरण की प्रथम पुस्तक के (लेखक पाणिनि) है । इससे मौर्य के पहले का इतिहास तथा मौर्य युगीन राजनीतिक अवस्था की जानकारी प्राप्त होती है ।
कात्यायन की गार्गी संहिता एक ज्योतिष ग्रंथ है फिर भी उसने भारत पर होने वाले यवन आक्रमण का उल्लेख मिलता है । पतंजलि पुष्यमित्र शुंग के पुरोहित थे । इनके महाभाष्य में शुंगों के इतिहास का पता चलता है।

Read Also-  bharat ka bhugol. भारत का भूगोल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *