Ramdhari singh Dinkar ka jeevan parichay रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय

By | September 16, 2016

जीवन परिचय-दिनकर जी का जन्म बिहार प्रांत के मुंगेर जिले के सिमरिया ग्राम में सन 1908 में हुआ था। आपने मैट्रिक की परीक्षा मोकामा घाट से उत्तीर्ण कर पटना विश्वविद्यालय से बीए की उपाधि प्राप्त की थी। मौकामा घाट में प्रधानाचार्य के पद पर कार्य करने के पश्चात सब रजिस्ट्रार के पद को भी सुशोभित किया। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय राजकीय प्रचार विभाग के उपनिदेशक के रूप में सेवा की आप मुजफ्फरपुर कॉलेज में हिंदी विभाग के अध्यक्ष एवं भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। भारत सरकार के गृह विभाग में हिंदी सलाहकार एवं आकाशवाणी के निदेशक के पद पर भी आसीन रहे। सन 1952 में भारत सरकार ने आप को राज्य भाषा के लिए मनोनीत किया। दिनकर जी को विविध संस्थाओं ने उनकी उत्कृष्ट कोटि की साहित्य सर्जना के लिए समय-समय पर सम्मानित किया। भागलपुर विश्वविद्यालय में सन् 1962 में आप को डि लीट् की मानक उपाधि प्रदान की। भारत सरकार द्वारा आपको पद्म विभूषण का अलंकार प्रदान कर सम्मानित किया गया। अंतराष्ट्रीय भाव से ओतप्रोत काव्य धारा को प्रवाहित करने वाले दिनकर जी का देहावसान सन 1974 ईस्वी में हो गया ।
साहित्यिक योगदान-रामधारी सिंह दिनकर का प्रवेश हिंदी जगत में एक कवि के रूप में हुआ। आप की राष्ट्रीय भाव से परिपूर्ण ओजस्वी वाणी स्वतंत्रता प्रेमी महानुभाव के हृदय में नवीन उत्पन्न करती थी। काव्य के अंतर्गत के विविध क्षेत्रों में भी आपका योगदान सराहनीय है। साहित्य सर्जन द्वारा हिंदी जगत को बहुत योगदान देते हुए देश के प्रतिनिधियों के सदस्यों के रूप में कार्य किया। कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, परशुराम की प्रतिज्ञा, राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय एकता, धार्मिक साहित्य, संस्कृति के चार अध्याय, भारतीय ‘संस्कृति के चार अध्याय’ साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत है।
भाषा- दिनकर जी ने भाषा के दो मुख्य रूपों को विशेषतया अपनी अभिव्यक्ति का साधन बनाया। जन सामान्य के लिए जहां सरल सुबोध एवं भाषा के व्यवहारिक रुप को अंगीकार किया गया। वही प्रबुद्ध जनों एवं साहित्यिक विषयों के लिए तत्सम शब्द प्रधान शुद्ध परिष्कृत संयुक्त भाषा को अपनाया इनकी भाषा में उच्चरिता एवं भाव अनुरूपता है। लोकोक्ति एवं मुहावरों के उपयुक्त प्रयोग से आपकी भाषा में निखार आ गया है।
शैली- रामधारी सिंह दिनकर की  शैली के निम्नलिखित रुप है-
भावात्मक शैली-इस शैली का प्रयोग विशेषता भाव प्रधान रचनाओं में हुआ है। लाक्षणिक एवं प्रवाह पूर्ण भाषा इनकी विशेषता है।
समीक्षात्मक शैली-इस शैली का प्रयोग शुद्ध कविता की खोज में मिलता है सूक्ति एवं उद्धरण शैली दिनकर जी की निबंध रचनाओं में शैली का प्रयोग प्रमुखता से हुआ है। जहां उनके जीवन के अनुभव स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं।
हिंदी जगत में स्थान-राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर जी हिंदी साहित्य के अप्रतिम विद्वान थे। हिंदी जगत उनकी साहित्यिक सेवाओं से अभिभूत है। उनकी रचनाओं में वैचारिक कविता एवं काव्यात्मक सौंदर्य का अद्भुत समन्वय है। इसलिए वे साहित्य प्रेमियों के लिए एक आदर्श प्रेरक कवि के रूप में समादृत है।

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One thought on “Ramdhari singh Dinkar ka jeevan parichay रामधारी सिंह दिनकर का जीवन परिचय

  1. Sandeep

    Ramdhari Singh
    Birth -1980
    Death- 1974
    ????????????
    Wrong information

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