राशियां Amount

By | July 2, 2016

अचर किसे कहते हैं?
उस राशि को अचर कहते हैं जिसका मान प्रत्येक गणितीय क्रिया में नियत रहता है। अचर को प्रायः a,b,c…..से व्यक्त किया जाता है।

अचर दो प्रकार के होते हैं-

(1) निरपेक्ष अचर:- वह अचर, जिसका मान प्रत्येक गणितीय क्रिया में वही बना रहता है, निरपेक्ष अचर कहलाता है। जैसे- 1,2,3,π,√3,……..

(2) स्वेच्छ अचर:- वह अचर, जिसका मान एक विशेष क्रिया में नियत रहता है किन्तु सन्दर्भ बदलने पर जिसका मान बदल जाता है, स्वेच्छ अचर कहलाता है।ं
जैसे- y= mx+c एक रेखा का समीकरण है। इसमे m और c अचर हैं किन्तु भिन्न-भिन्न रेखाओं के लिए m और c के मान भिन्न-भिन्न होते हैं। अतः m और c स्वेच्छ अचर हैं।’
चर किसे कहते हैं?
उस राशि को चर कहते हैं, जिसका मान गणितीय क्रिया में बदलता रहता है। चर को प्रायः x, y, z, u, v,………..से व्यक्त किया जाता है।

चर दो प्रकार के होते हैं-

(1) स्वतंत्र चर:- उस चर को स्वतन्त्र चर कहते हैं जो कोई भी निर्दिष्ट स्वेच्छ मान ग्रहण कर सकता है।

(2) परतन्त्र चर:- उस चर को परतन्त्र चर कहते हैं, जिसका मान स्वतन्त्र चर पर निर्भर करता है।
जैसे-y=3x+4 में x=1 रखने पर y=7 प्राप्त होता है। अतः x स्वतन्त्र चर एवं y परतन्त्र चर है।’
फलन किसे कहते हैं?’,’यदि दो चर x और y इस प्रकार संबंधित हों कि x के प्रत्येक मान के लिये y के एक या अनेक मान हों तो y को x का फलन कहते हैं।’
फलन की सीमा किसे कहते हैं?’,’मानलो y = f(x) तथा a व l दो निश्चित संख्याएँ हैं। मानलो x,a की ओर अग्रसर है (x―a) तो y, l की ओर अग्रसर होता है (y―l)। अब यदि x के a के अत्यधिक निकट होने पर y भी  l के  अत्यधिक निकट होता है, तो इस स्थिति में l को  y की सीमा कहते हैं। इसे सांकेतिक रूप में निम्न प्रकार से लिखते हैं–
lim f (x) = 1
x―a’
अदिश राशियाँ किसे कहते हैं?
अदिश का अर्थ है दिशाहीन या दिशारहित। वे राशियाँ जिनमें केवल परिमाण होता है, दिशा नहीं होती, अदिश राशियाँ कहलाती हैं।
उदाहरण:- द्रव्यमान, लम्बाई, आयतन, घनत्व, समय, ताप, कार्य, ऊर्जा, विद्युत् धारा, आवेश आदि  अदिश राशियाँ हैं।
सभी अदिश राशियाँ, वास्तविक संख्याओं द्वारा योग, व्यवकलन, गुणा, भाग आदि मूल संक्रियाओं से सम्बंधित जिन नियमों का पालन किया जाता है उन सभी नियमों का पालन करती है। अतः अदिशों को सामान्य बीजगणित के नियमों द्वारा जोड़ा या गुणा किया जा सकता है।’
सदिश राशियाँ किसे कहते हैं?
सदिश का अर्थ है दिशा सहित। वे भौतिक राशियाँ जिनमें परिमाण और दिशा दोनों होते  हैं, सदिश राशियाँ कहलाती हैं।
उदाहरण-
बल, वेग, मन्दन, विस्थापन, बल-आघूर्ण, चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, चुम्बकीय आघूर्ण आदि सदिश राशियाँ हैं। इसे सदिश भी कहा जाता है। चूँकि सदिशों में दिशा भी होती है, अतः उन्हें सामान्य बीजगणितीय नियमों द्वारा जोड़ा, घटाया, भाग या गुणा नहीं किया जा सकता।
नोट-
किसी पृष्ठ के क्षेत्रफल को सदिश माना जाता है क्योंकि इसकी दिशा पृष्ठ के लम्बवत् होती है।’
मापन की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
वे राशियाँ जिनका मापन किया जा सकता है, भौतिक राशियाँ कहलाती हैं।
विभिन्न भौतिक धारणाओं की व्याख्या करने के लिए हमें विविध भौतिक राशियों, जैसे- लम्बाई, द्रव्यमान, समय, वेग इत्यादि की आवश्यकता होती है। भौतिक राशियों के परिणाम का पता हम अपनी ज्ञानेन्द्रियों से लगाते हैं, किन्तु हमारी ज्ञानेन्द्रियाँ केवल अनुमान ही बता सकती हैं, राशियों का यथार्थ परिमाण नहीं,
जैसे- दो पिण्डों को अलग-अलग हाथ से उठाकर हम बता सकते हैं कि कौन-सा पिण्ड हल्का है और कौन- सा भारी, किन्तु अलग-अलग उनके भार बता पाना कठिन है।इसी तरह दो छड़ों को देखकर यह बताया जा सकता है कि कौन-सी छड़ छोटी और कौन- सी लम्बी है, किन्तु उनकी यथार्थ लम्बाइयाँ बता पाना कठिन है। कभी-कभी ज्ञानेन्द्रियाँ के द्वारा प्राप्त जानकारी सही नहीं होती।
अतः भौतिक राशियों के परिमाणात्मक ज्ञान के लिए उनका मापन अत्यंत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त भौतिकी में कई भौतिकी घटनाओं को उनमें निहित राशियों के मध्य सम्बन्ध के पदों में व्यक्त किया जाता है। ये सम्बन्ध वाक्यों के रूप में या और अच्छी तरह गणितीय समीकरण के रूप में व्यक्त किये जाते हैं। भौतिकी के इन नियमों या समीकरणों को प्रमाणित करने के लिए भी निहित भौतिक राशियों का मापन आवश्यक होता है।’
मापन के मात्रक किसे कहते हैं?
भौतिक के मापने का अर्थ है किसी पूर्व निश्चित निर्देश राशि से तुलना करना। किसी भौतिक राशि को मापने के लिए उसके एक निश्चित परिमाण को मानक मानकर उसे एक विशिष्ट नाम दे दिया जाता है, जिसे उस भौतिक राशि का मात्रक कहते हैं।
इस प्रकार, किसी भौतिक राशि के मापन के लिए निर्देश मानक को उस भौतिक राशि का मात्रक कहते हैं। किसी भौतिक राशि के परिमाण को व्यक्त करने के लिए निम्नलिखित दो बातें ज्ञात होनी चाहिए―
(1) राशि का मात्रक
(2) उसका संख्यात्मक मान या संख्यांक’
मात्रक के गुण क्या-क्या हैं?
किसी भी मात्रक में निम्नलिखित गुण होने चाहिए―

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(1) मात्रक का परिमाण ऐसा होना चाहिए कि राशि का संख्यांक सामान्यतः न बहुत बड़ा हो और न ही बहुत छोटा।

(2) यह पुर्णतः निश्चित और स्पष्ट रूप से परिभाषित हो।

(3) समय के साथ उसमें परिवर्तन न हो।

(4) उसमें स्थायित्व का गुण हो।

(5) भौतिक राशि के अन्य मात्रकों से तुलना संभव हो अर्थात् उसका उसी भौतिक राशि के अन्य मात्रकों में परिवर्तन सहज हो

(6) वह सर्वमान्य हो।’
मूल राशियाँ और व्युत्पन्न राशियाँ किसे कहते हैं?
जो राशियाँ एक- दूसरे से पुर्णतः स्वतन्त्र रहती हैं, उन्हें मूल राशियाँ कहते हैं। ये संख्या में सात हैं:- लम्बाई, द्रव्यमान, समय, ताप, ज्योति-तीव्रता, विद्युतधारा और पदार्थ की मात्रा और जो राशियाँ मूल राशियों से व्युत्पन्न की जा सकती हैं, उन्हें व्युत्पन्न राशियाँ कहते हैं।’

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