Subhadra Kumari chauhaan ka jeevan parichay सुभद्रा कुमारी चौहान का जीवन

By | September 17, 2016

जीवन परिचय-सुभद्रा कुमारी चौहान जी का जन्म सन 1904 में प्रयाग के निहालपुर नामक मोहल्ले में हुआ था। इनके पिता का नाम ठाकुर रामनाथ सिंह था। क्रास्थवेट कॉलेज में शिक्षा प्राप्त करते हुए देश प्रेम से प्रभावित हुई और स्वतंत्रता संग्राम में रुचि लेने लगीं। आपका विवाह खंडवा निवासी ठाकुर लक्ष्मण सिंह के साथ हुआ। सुभद्रा जी ने काव्य रचना के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लेना आरंभ कर दिया। गांधी जी के असहयोग आंदोलन में भाग लेने के कारण उनको अनेक बार कारावास जाना पड़ा फिर भी यह राष्ट्रीय विचारों एवं गतिविधियों में संलिप्त रही और काव्य रचना करती रही। आप का देहावसान सन 1948 ईस्वी में हुआ।
रचनाएं-
>>कविता- मुकुल, त्रिधारा।
>> कहानी- सीधे-सादे चित्र, बिखरे मोती तथा उन्मादिनी कहानी संकलन ।
काव्यगत विशेषताएं-सुभद्रा जी की कविताओं में मुख्यतः राष्ट्र प्रेम संबंधी भावनाओं की अभिव्यक्ति परिलक्षित होती है। स्वतंत्रता संग्राम के समय इनकी कविताओं ने जन जागरण किया था। आपकी रचनाएं तरुण-तरुणियो के हृदय में राष्ट्र प्रेम उत्पन्न करती रही है। इनकी कविताएं राष्ट्र प्रेम की भावना से ओतप्रोत रही है।
सुभद्रा जी की कविताओं में वीर रस की प्रधानता रही है साथ ही वात्सल्य एवं श्रृंगार रस का भी सुंदर निरूपण हुआ है। सुभद्रा जी ने शुद्ध, सरल एवं सरस खड़ी बोली में काव्य रचना की है। सुभद्रा जी ने मुक्तक शैली में काव्य रचना की है। झांसी की रानी पर लिखी रचना में एक सुक्ष्म कथा सूत्र भी विद्यमान है। इन्होंने भावात्मकता के साथ वर्णनात्मक परिपक्वता का सुंदर संयोग करके अपनी शैलीगत सामर्थ्य का प्रभावी प्रमाण प्रस्तुत किया है ।
साहित्य में स्थान- सुभद्रा जी का काव्य एक सरल साहित्यकार की अनुभूतियां हैं। उनकी रचनाएं देश प्रेमी साहसी और बलिदानी व्यक्तित्व की निर्मात्री रही है। हिंदी के वीर काव्य के साथ-साथ वात्सल्यमयी लोरियाँ भी आपने सुनाई है। कभी इन्होंने वीरों को रणभूमि में बसंत बनाने को प्रेरित किया तो कभी बचपन को प्यार से पुकारा है। वीर और वात्सल्य का अनोखा संगम उनकी रचनाओं में प्राप्त होता है। महारानी लक्ष्मीबाई की गौरवगाथा गाकर आपने अपने कवित्व को हजारों हिंदी प्रेमियों की जिह्वा का श्रृंगार बनाया था। ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी’ यह पंक्तियां सुनकर श्रोता और वक्ता वीर रस और देशभक्ति की धारा में बहने लगते हैं। उनकी भाषा में सरलता और साहित्य का सहज सामंजस्य है। सुभद्रा जी हिंदी काव्य जगत की ओजपूर्ण प्रेरक काव्य की कवियित्री ऐसी महिला साहित्यकार है, जिन्होंने अकर्मण्य युवाओं को सक्रिय बनाकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने हेतु प्रेरित किया।

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