Surykant tripathi nirala ka jeevan parichay सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जीवन परिचय

By | September 6, 2016

>> जीवन परिचय –निराला जी का जन्म सन 1897 ईसवी में बंगाल के मेदिनीपुर जिले में हुआ था। उनके पिता रामसहाय त्रिपाठी उन्नाव जिले के गढ़कोला गांव में रहने वाले थे और मेदिनीपुर में नौकरी करते थे । वहीं पर निराला की शिक्षा बंगला के माध्यम से आरंभ हुई । इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की । बचपन से ही इनको कुश्ती, घुड़सवारी और खेलों में बहुत अधिक रुचि थी । बचपन में ही इनका विवाह मनोहरा देवी हो गया था। रामचरितमानस से इन्हें विशेष प्रेम था। बालक सूर्यकांत के सिर से माता पिता की छाया अल्प आयु में ही उठ गयी। निराला जी को बंगला भाषा और हिंदी साहित्य का अच्छा ज्ञान था । इन्होंने संस्कृत और अंग्रेजी का भी अध्ययन किया था । इनक पत्नी एक पुत्र और एक पुत्री को जन्म देकर स्वर्ग सिधार गयीं। पत्नी के वियोग के समय ही आपका परिचय पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी से हुआ । निराला जी को बार-बार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा । आर्थिक कठिनाइयों के बीच ही उनकी पुत्री सरोज का देहांत हो गया । स्वामी रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद जी से बहुत प्रभावित थे । इनकी मृत्यु सन 1961 में हूई ।
>> साहित्यिक सेवाएं- महाकवि निराला का उदय छायावादी कवि के रूप में हुआ । इन्होंने अपने साहित्यिक जीवन का प्रारंभ ‘जन्मभूमि की वंदना’ नामक एक कविता की रचना करके किया । उन्होंने ‘सरस्वती’ और ‘मर्यादा’ पत्रिका का निरंतर अध्ययन करके हिंदी का ज्ञान प्राप्त किया । ‘जूही की कली’ कविता की रचना करने हिंदी जगत में अपनी पहचान बना ली । छायावादी लेखक के रूप में प्रसाद, पंत, और महादेवी वर्मा के समकक्ष ही इनकी गणना की जाती है । ये छायावाद के चार स्तंभों में सइ एक मने जाते हैं ।
>> रचनाएँ- निराला जी की प्रमुख रचनाएं निम्नलिखित है –
>> काव्य रचनाएं –
>’परिमल’ – यह निराला की छायावादी रचनाओं का संग्रह है । जिसमें प्रेम और सौंदर्य का वर्णन किया गया है। इसमें ‘बादल राग’, ‘भिक्षुक’ तथा ‘विधवा’ आदि प्रगतिशील रचनाएं भी संकलित है ।
>अनामिका – इसके दो संस्करण प्रकाशित हुए हैं। सन 1923 ईसवी में प्रकाशित प्रथम संस्करण में निराला जी की प्रारंभिक रचनाएं संकलित हैं । इनकी तीन कविताएं ‘पंचवटी प्रसंग’, ‘जूही की कली’ तथा ‘तुम और मैं’ विशेष उल्लेखनीय है। इसका द्वितीय संस्करण सन 1931 ईस्वी में प्रकाशित हुआ इसमें ‘राम की शक्ति पूजा’, ‘सम्राट अष्टम एडवर्ड के प्रति’, ‘सरोज स्मृति’, ‘दान’,  ‘तोड़ती पत्थर’ आदि कविताएं संग्रहित है ।
> गीतिका – इसका प्रकाशन सन 1926 ईस्वी में हुआ था । यह 101 गीतों का लघु संग्रह है । इसमें प्रेम, प्रकृति, राष्ट्रीय एवं दार्शनिक भावनाओं से परिपूर्ण कविताएं हैं ।
> तुलसीदास- गोस्वामी तुलसीदास पर लिखा गया एक खंड काव्य है ।
> कुकुरमुत्ता, नए पत्ते- ये  दो व्यंग प्रधान कविताओं का संग्रह है । इसमें सामाजिक भ्रष्टाचार पर तीखे व्यंग किए गए हैं ।
> अन्य रचनाएँ- अणिमा, अपरा, बेला, आराधना तथा अर्चना भी निराला की अनुपम काव्य रचनाएँ हैं।
>> गद्य रचनाएँ- लिली, चतुरी, अलका, प्रभावती, अप्सरा एवं निरुपमा इनकी श्रेष्ठ रचनाएँ हैं।
>>भाषा शैली- निराला जी ने अपनी रचनाओं में शुद्ध एवं परिमार्जित खड़ीबोली का प्रयोग किया है। भाषा में अनेक स्थलों पर शुद्ध तत्सम शब्दों का प्रयोग हुआ है, जिसके कारण इनके भावों को सरलता से समझने में कठिनाई होती है। इनकी छायावादी रचनाओं में जहां भाषा की क्लिस्टता मिलती है, वही इसके विपरीत प्रगतिवादी रचनाओं की भाषा अत्यंत सरल एवं व्यवहारिक है । छायावाद पर आधारित उनकी रचनाओं में कठिन एवं दुरूह शैली तथा प्रगतिवादी रचनाओं में सरल एवं सुबोध शैली का प्रयोग हुआ है।

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