आवर्त सारणी रसायन विज्ञान

आवर्त सारणी की सर्वप्रथम खोज मेण्डलीफ ने की थी। आवर्त सारणी (अथवा, तत्वों की आवर्त सारणी) रासायनिक तत्वों को उनकी संगत विशेषताओं के साथ एक सारणी के रूप में दर्शाने की एक व्यवस्था है। आवर्त सारणी में रासायनिक तत्त्व परमाणु क्रमांक के बढ़ते क्रम में सजाये गये हैं तथा आवर्त (पिरियड), प्राथमिक समूह, द्वितीयक समूह में वर्गीकृत किया गया है। वर्तमान आवर्त सारणी मैं 108 ज्ञात तत्व सम्मिलित हैं। सबसे पहले रूसी रसायन-शास्त्री मेंडलीफ (सही उच्चारण- मेन्देलेयेव) ने सन 1869 में आवर्त नियम प्रस्तुत किया और तत्वों को एक सारणी के रूप में प्रस्तुत किया।

मोजले ने आधुनिक आर्वत सारणी बनाया जिसके अनुसार-

आवर्त-सारणी-aavart-sarani

आर्वत सारणी में रखे हुए तत्वों के रासायनिक तथा भौतिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं।

आर्वत सारणी में उदग्र कतारों को समूह और क्षैतिज कतारों को अवधि कहते हैं।

इन तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यासों के आधार पर इन्हें चार उनके ब्लॉकों में विभाजित किया गया है।

1. S Block के तत्वों के सबसे अंतिम इलेक्ट्रॉन S उपकोश में होते हैं।

2. P Block के तत्वों के सबसे अंतिम इलेक्ट्रॉन P उपकोश में होते हैं।

3. इसी प्रकार d और f ब्लॉक के तत्वों के सबसे अंतिम इलेक्ट्रॉन d और f उपकोशों में होते हैं। d और f ब्लॉक के तत्त्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं।

इस आधुनिक आर्वत सारणी में सात क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं जिन्हें आर्वत कहते हैं।

Also Read-  bhartiy sanvidhan ki uddeshika भारतीय संविधान की उद्देशिका अथवा प्रस्तावना

आर्वत की संख्या तत्त्व के सबसे बाहरी कक्षा की संख्या को प्रदर्शित करतीं हैं। आर्वत सारणी में 9 उर्ध्वाधर खाने होते हैं जिन्हें समूह कहते हैं।

पुनः 8 समूहों को दो-दो उपसमूह में विभाजित किया गया है। इन्हें A और B उपसमूह कहते हैं।

उपसमूह A में स्थित किसी तत्त्व का अंतिम इलेक्ट्रॉन S या P उपकोश में होता है।

d और f ब्लॉक के तत्त्व उपसमूह B के अंतर्गत आते हैं।

8 वें समूह को 3 भागों में विभाजित करके सभी 9 तत्वों को उपयुक्त स्थान दिया गया है।

इस प्रकार कुल समूहों की संख्या 16 होती है जो इस प्रकार हैं-

IA, IIA, IIIB, IVB, VB, VIB, VIIB, VIIIB, IB, IIB, IIIA, IVA, VA, VIA, VIIA, Zero.

आधुनिक आवर्त सारणी में सात क्षैतिज पंक्तियाँ होती हैं जिन्हें अवधि और आर्वत कहते हैं।

अवधि की विशेषताएँ आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्व का धातुई गुण कम होता जाता है तथा अधातुई गुण में वृद्धि होती है।

आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्व की रासायनिक क्रियाशीलता घटती है और बाद में बढ़ती है।

किसी अवधि में तत्त्वों की संयोजकता 1 से बढ़कर 4 हो जाती है, तथा उसके बाद घटते- घटते शून्य हो जाती है।

किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 से बढ़कर 8 हो जाती है।

Also Read-  ऊर्जा Energy

आवर्त सारणी के किसी अवधि में इलेक्ट्रॉन- प्रीति का मान बाएँ से दाएँ जाने पर प्रायः बढ़ता है।

सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर विद्युत् ऋणात्मकता का मान क्रमशः बढ़ता जाता है।

आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर पर आयनन विभव का मान बढ़ता है।

सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर परमाणु आकार या परमाणु की त्रिज्या घटता है।

आवर्त सारणी के किसी अवधि में बाएँ से दाएँ जाने पर तत्त्व के ऑक्साइडों के भास्मिक गुण क्रमशः घटते जाते हैं।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *