विद्युत अपघटन- रसायन विज्ञान

रसायन विज्ञान एवं निर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) मे विद्युत अपघटन (electrolysis) उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसके द्वारा किसी रासायनिक यौगिक में विद्युत-धारा प्रवाहित करके उसके रासायनिक बन्धों को को तोड़ा जाता है। उदाहरण के लिये जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर जल, हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन में विघटित हो जाता है जिसे जल का विद्युत अपघटन कहते हैं। विद्युत अपघटन के बहुत से उपयोग हैं। अयस्कों को प्रसंस्कारित करके उनमें निहित रासायनिक तत्व को शुद्ध करना एवं उसे अलग करना इसका सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं व्यावसायिक उपयोग है।

वह प्रक्रिया जिसमे किसी रासायनिक यौगिक में विद्युत-धारा प्रवाहित करके उसके रासायनिक बन्धों को को तोड़ा जाता है,विद्युत अपघटन कहलाता है

उदाहरण :-

जल में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर जल, हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन में विघटित हो जाता है जिसे जल का विद्युत अपघटन कहते हैं।

अयस्कों को प्रसंस्कारित करके उनमें निहित रासायनिक तत्व को शुद्ध करना एवं उसे अलग करना इसका सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं व्यावसायिक उपयोग है।

विद्युत अपघटन के लिये आवश्यक अवयव-

विद्युत अपघट्य (electrolyte) – किसी द्रव में स्थित चलायमान ऑयन
दिष्ट धारा का स्रोत
दो ठोस प्लेटें या छड़े, जिन्हें एलेक्ट्रोड कहते हैं |

उपरोक्त अवयवों की भूमिका इस प्रकार है-

चलायमान ऑयन विद्युतधारा के प्रवाह के लिये “वाहक” (कैरिअर) का काम करते हैं। यदि आयन चलायमान न हों (जैसे किसी ठोस में) तो विद्युत अपघ्टन सम्भव नहीं होगा।

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बाहर से विद्युत धारा प्रवाहित करने से आयन बनने या “डिस्चार्ज” होने के लिये आवश्यक उर्जा प्राप्त होती है।

दो विद्युताग्र – बाहरी विद्युत परिपथ एवं आयनिक विलयन को विद्युतीय दृष्टि से जोडने का काम करते हैं।

विद्युताग्र, विद्युत के चालक होने चाहिये। धातु, ग्रेफाइट और अर्धचालक पदार्थों के एलेक्ट्रोड बहुता प्रयोग में लाये जाते हैं।

एलेक्ट्रोड के पदार्थ का चुनाव इन् बातों से प्रभावित होता है- एलेक्ट्रोड और एलेक्ट्रोलाइट के बीच कोई क्रिया नहीं होनी चाहिये। एलेक्ट्रोड के निर्माण का खर्च कम होना चाहिये।

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