Abyay अव्यय के बारे में जाने हिंदी

By | July 21, 2016

विस्मयादिबोधक अव्यय

विस्मयादिबोधक अव्यय- जिन शब्दों में हर्ष, शोक, विस्मय, ग्लानि, घृणा, लज्जा आदि भाव प्रकट होते हैं वे विस्मयादिबोधक अव्यय कहलाते हैं। इन्हें ‘द्योतक’ भी कहते हैं। जैसे-
1.अहा ! क्या मौसम है।
2.उफ ! कितनी गरमी पड़ रही है।
3. अरे ! आप आ गए ?
4.बाप रे बाप ! यह क्या कर डाला ?
5.छिः-छिः ! धिक्कार है तुम्हारे नाम को।
इनमें ‘अहा’, ‘उफ’, ‘अरे’, ‘बाप-रे-बाप’, ‘छिः-छिः’ शब्द आए हैं। ये सभी अनेक भावों को व्यक्त कर रहे हैं। अतः ये विस्मयादिबोधक अव्यय है। इन शब्दों के बाद विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगता है।
प्रकट होने वाले भाव के आधार पर इसके निम्नलिखित भेद हैं-
(1) हर्षबोधक- अहा ! धन्य !, वाह-वाह !, ओह ! वाह ! शाबाश !
(2) शोकबोधक- आह !, हाय !, हाय-हाय !, हा, त्राहि-त्राहि !, बाप रे !
(3) विस्मयादिबोधक- हैं !, ऐं !, ओहो !, अरे, वाह !
(4) तिरस्कारबोधक- छिः !, हट !, धिक्, धत् !, छिः छिः !, चुप !
(5) स्वीकृतिबोधक- हाँ-हाँ !, अच्छा !, ठीक !, जी हाँ !, बहुत अच्छा !
(6) संबोधनबोधक- रे !, री !, अरे !, अरी !, ओ !, अजी !, हैलो !
(7) आशीर्वादबोधक- दीर्घायु हो !, जीते रहो !

समुच्चयबोधक अव्यय- दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को मिलाने वाले अव्यय समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं। इन्हें ‘योजक’ भी कहते हैं। जैसे-
(1) श्रुति और गुंजन पढ़ रहे हैं।
(2) मुझे टेपरिकार्डर या घड़ी चाहिए।
(3) सीता ने बहुत मेहनत की किन्तु फिर भी सफल न हो सकी।
(4) बेशक वह धनवान है परन्तु है कंजूस।
इनमें ‘और’, ‘या’, ‘किन्तु’, ‘परन्तु’ शब्द आए हैं जोकि दो शब्दों अथवा दो वाक्यों को मिला रहे हैं। अतः ये समुच्चयबोधक अव्यय हैं।
समुच्चयबोधक के दो भेद हैं-
1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक।
2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक।

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक

जिन समुच्चयबोधक शब्दों के द्वारा दो समान वाक्यांशों पदों और वाक्यों को परस्पर जोड़ा जाता है, उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। जैसे- 1.सुनंदा खड़ी थी और अलका बैठी थी। 2.ऋतेश गाएगा तो ऋतु तबला बजाएगी। इन वाक्यों में और, तो समुच्चयबोधक शब्दों द्वारा दो समान शब्द और वाक्य परस्पर जुड़े हैं।
समानाधिकरण समुच्चयबोधक के भेद- समानाधिकरण समुच्चयबोधक चार प्रकार के होते हैं-
(क) संयोजक।
(ख) विभाजक।
(ग) विरोधसूचक।
(घ) परिणामसूचक।

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(क) संयोजक- जो शब्दों, वाक्यांशों और उपवाक्यों को परस्पर जोड़ने वाले शब्द संयोजक कहलाते हैं। और, तथा, एवं व आदि संयोजक शब्द हैं।
(ख) विभाजक- शब्दों, वाक्यांशों और उपवाक्यों में परस्पर विभाजन और विकल्प प्रकट करने वाले शब्द विभाजक या विकल्पक कहलाते हैं। जैसे-या, चाहे अथवा, अन्यथा, वा आदि।
(ग) विरोधसूचक- दो परस्पर विरोधी कथनों और उपवाक्यों को जोड़ने वाले शब्द विरोधसूचक कहलाते हैं। जैसे-परन्तु, पर, किन्तु, मगर, बल्कि, लेकिन आदि।
(घ) परिणामसूचक- दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर परिणाम को दर्शाने वाले शब्द परिणामसूचक कहलाते हैं। जैसे-फलतः, परिणामस्वरूप, इसलिए, अतः, अतएव, फलस्वरूप, अन्यथा आदि।

2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक

किसी वाक्य के प्रधान और आश्रित उपवाक्यों को परस्पर जोड़ने वाले शब्द व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहलाते हैं।
व्यधिकरण समुच्चयबोधक के भेद- व्यधिकरण समुच्चयबोधक चार प्रकार के होते हैं-
(क) कारणसूचक। (ख) संकेतसूचक। (ग) उद्देश्यसूचक। (घ) स्वरूपसूचक।
(क) कारणसूचक- दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर होने वाले कार्य का कारण स्पष्ट करने वाले शब्दों को कारणसूचक कहते हैं। जैसे- कि, क्योंकि, इसलिए, चूँकि, ताकि आदि।
(ख) संकेतसूचक- जो दो योजक शब्द दो उपवाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं, उन्हें संकेतसूचक कहते हैं। जैसे- यदि….तो, जा…तो, यद्यपि….तथापि, यद्यपि…परन्तु आदि।
(ग) उदेश्यसूचक- दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर उनका उद्देश्य स्पष्ट करने वाले शब्द उद्देश्यसूचक कहलाते हैं। जैसे- इसलिए कि, ताकि, जिससे कि आदि।
(घ) स्वरूपसूचक- मुख्य उपवाक्य का अर्थ स्पष्ट करने वाले शब्द स्वरूपसूचक कहलाते हैं। जैसे-यानी, मानो, कि, अर्थात् आदि।

संबंधबोधक अव्यय

संबंधबोधक अव्यय- जिन अव्यय शब्दों से संज्ञा अथवा सर्वनाम का वाक्य के दूसरे शब्दों के साथ संबंध जाना जाता है, वे संबंधबोधक अव्यय कहलाते हैं। जैसे- 1. उसका साथ छोड़ दीजिए। 2.मेरे सामने से हट जा। 3.लालकिले पर तिरंगा लहरा रहा है। 4.वीर अभिमन्यु अंत तक शत्रु से लोहा लेता रहा। इनमें ‘साथ’, ‘सामने’, ‘पर’, ‘तक’ शब्द संज्ञा अथवा सर्वनाम शब्दों के साथ आकर उनका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों के साथ बता रहे हैं। अतः वे संबंधबोधक अव्यय है।
अर्थ के अनुसार संबंधबोधक अव्यय के निम्नलिखित भेद हैं-
1. कालवाचक- पहले, बाद, आगे, पीछे।
2. स्थानवाचक- बाहर, भीतर, बीच, ऊपर, नीचे।
3. दिशावाचक- निकट, समीप, ओर, सामने।
4. साधनवाचक- निमित्त, द्वारा, जरिये।
5. विरोधसूचक- उलटे, विरुद्ध, प्रतिकूल।
6. समतासूचक- अनुसार, सदृश, समान, तुल्य, तरह।
7. हेतुवाचक- रहित, अथवा, सिवा, अतिरिक्त।
8. सहचरसूचक- समेत, संग, साथ।
9. विषयवाचक- विषय, बाबत, लेख।
10. संग्रवाचक- समेत, भर, तक।
क्रिया-विशेषण और संबंधबोधक अव्यय में अंतर

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जब इनका प्रयोग संज्ञा अथवा सर्वनाम के साथ होता है तब ये संबंधबोधक अव्यय होते हैं और जब ये क्रिया की विशेषता प्रकट करते हैं तब क्रिया-विशेषण होते हैं। जैसे-
(1) अंदर जाओ। (क्रिया विशेषण)
(2) दुकान के भीतर जाओ। (संबंधबोधक अव्यय)

समुच्चयबोधक अव्यय

समुच्चयबोधक अव्यय- दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को मिलाने वाले अव्यय समुच्चयबोधक अव्यय कहलाते हैं। इन्हें ‘योजक’ भी कहते हैं। जैसे-
(1) श्रुति और गुंजन पढ़ रहे हैं।
(2) मुझे टेपरिकार्डर या घड़ी चाहिए।
(3) सीता ने बहुत मेहनत की किन्तु फिर भी सफल न हो सकी।
(4) बेशक वह धनवान है परन्तु है कंजूस।
इनमें ‘और’, ‘या’, ‘किन्तु’, ‘परन्तु’ शब्द आए हैं जोकि दो शब्दों अथवा दो वाक्यों को मिला रहे हैं। अतः ये समुच्चयबोधक अव्यय हैं।
समुच्चयबोधक के दो भेद हैं-
1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक।
2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक।

1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक

जिन समुच्चयबोधक शब्दों के द्वारा दो समान वाक्यांशों पदों और वाक्यों को परस्पर जोड़ा जाता है, उन्हें समानाधिकरण समुच्चयबोधक कहते हैं। जैसे- 1.सुनंदा खड़ी थी और अलका बैठी थी। 2.ऋतेश गाएगा तो ऋतु तबला बजाएगी। इन वाक्यों में और, तो समुच्चयबोधक शब्दों द्वारा दो समान शब्द और वाक्य परस्पर जुड़े हैं।
समानाधिकरण समुच्चयबोधक के भेद- समानाधिकरण समुच्चयबोधक चार प्रकार के होते हैं-
(क) संयोजक।
(ख) विभाजक।
(ग) विरोधसूचक।
(घ) परिणामसूचक।

(क) संयोजक-
जो शब्दों, वाक्यांशों और उपवाक्यों को परस्पर जोड़ने वाले शब्द संयोजक कहलाते हैं। और, तथा, एवं व आदि संयोजक शब्द हैं।

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(ख) विभाजक-
शब्दों, वाक्यांशों और उपवाक्यों में परस्पर विभाजन और विकल्प प्रकट करने वाले शब्द विभाजक या विकल्पक कहलाते हैं। जैसे-या, चाहे अथवा, अन्यथा, वा आदि।

(ग) विरोधसूचक-
दो परस्पर विरोधी कथनों और उपवाक्यों को जोड़ने वाले शब्द विरोधसूचक कहलाते हैं। जैसे-परन्तु, पर, किन्तु, मगर, बल्कि, लेकिन आदि।

(घ) परिणामसूचक-
दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर परिणाम को दर्शाने वाले शब्द परिणामसूचक कहलाते हैं। जैसे-फलतः, परिणामस्वरूप, इसलिए, अतः, अतएव, फलस्वरूप, अन्यथा आदि।
2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक

किसी वाक्य के प्रधान और आश्रित उपवाक्यों को परस्पर जोड़ने वाले शब्द व्यधिकरण समुच्चयबोधक कहलाते हैं।
व्यधिकरण समुच्चयबोधक के भेद- व्यधिकरण समुच्चयबोधक चार प्रकार के होते हैं-
(क) कारणसूचक। (ख) संकेतसूचक। (ग) उद्देश्यसूचक। (घ) स्वरूपसूचक।

(क) कारणसूचक- दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर होने वाले कार्य का कारण स्पष्ट करने वाले शब्दों को कारणसूचक कहते हैं। जैसे- कि, क्योंकि, इसलिए, चूँकि, ताकि आदि।

(ख) संकेतसूचक- जो दो योजक शब्द दो उपवाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं, उन्हें संकेतसूचक कहते हैं। जैसे- यदि….तो, जा…तो, यद्यपि….तथापि, यद्यपि…परन्तु आदि।

(ग) उदेश्यसूचक- दो उपवाक्यों को परस्पर जोड़कर उनका उद्देश्य स्पष्ट करने वाले शब्द उद्देश्यसूचक कहलाते हैं। जैसे- इसलिए कि, ताकि, जिससे कि आदि।

(घ) स्वरूपसूचक- मुख्य उपवाक्य का अर्थ स्पष्ट करने वाले शब्द स्वरूपसूचक कहलाते हैं। जैसे-यानी, मानो, कि, अर्थात् आदि।

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