भारत का संविधान bharat ka samvidhan GK

संविधान किसी देश की शासन व्यवस्था को संचालन करने के कानूनी दस्तावेजों के समूह को संविधान कहते है। अर्थात किसी देश के नियम व कानूनों के दस्तावेज को संविधान कहते है।
भारत को संविधान की जरूरत
15 अगस्त 1947 से पहले भारत के आंतरिक एवं बाहरी मामलों का संचालन ब्रिटिश सरकार करती थी। अर्थात् 15 अगस्त 1947 से पहले भारत ब्रिटेन का उपनिवेश था जब तक भारत की शासन व्यवस्था ब्रिटेन द्वारा चलाई जा रही थी| ब्रिटिश सरकार भारतीयों का दमन करने लगी तत्पश्चात भारतीय स्वतंत्र भारत की मांग करने लगे। इसलिए भारत को अपनी शासन व्यवस्था चलाने के लिए संविधान की जरूरत पडी।
विश्व में संविधान का विचार देने वाले प्रथम व्यक्ति सर हेनरी मेन (ब्रिटेन) हैं।
विश्व का सबसे प्राचीन संविधान एवं प्रथम संविधान संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) का है।
संयुक्त राज्य अमेरिका का संविधान 4 मार्च 1789 को लागू हुआ जो विश्व का प्रथम संविधान था।
संविधान में कानूनों के क्रमांक को अनुच्छेद कहते है।
भारतीय संविधान में 26 जनवरी 1950 के तहत 395 अनुच्छेद थे। जो वर्तमान में संशोधित कर 450 हो गये है।
भाग: अनुच्छेदों को सुविधा की दृष्टि से भागों में बांटा गया है।
भारतीय संविधान में 26 जनवरी 1950 के तहत 22 भाग है। तथा वर्तमान में संशोधित कर 26 हैं|
अनुसूचि: अनुच्छेदों के अतरिक्त बनाये गये कानूनों को अनुसूचि में शामिल किया जाता है। अर्थात् वर्तमान में नये कानूनों को अनुसूचियों में शामिल किया जाता है।
भारतीय संविधान में 26 जनवरी 1950 के तहत 8 अनुसूचियां थी तथा वर्तमान में संशोधित कर इनकी संख्या 12 हो गई है।
संविधान में संशोधन करने की शक्ति मात्र संसद को प्राप्त है।
25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है क्योंकि 25 जनवरी 1950 के दिन केन्द्रीय निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी।
26 जनवरी को प्रति वर्ष गणतंत्र दिवस मनाया जाता है क्योंकि 26 जनवरी 1950 के दिन भारतीय संविधान लागू हुआ था।
66 वें गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2015 को अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि के रूप में भारत आये |
संविधान का संरक्षक सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय को कहा जाता है। संविधान में संघीय शब्द के स्थान पर संघ या यूनियन शब्द प्रयोग में लाया गया है।
भारतीय संविधान पर विदेशों से प्रभाव या प्रेरणा एक तिहाई प्राप्त है।

Also Read-  Bihari ka jivan parichay बिहारी

विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत है।
भारत का संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। इसमें अब 465 अनुच्छेद, तथा 12 अनुसूचियां हैं और ये 22 भागों में विभाजित है। परन्तु इसके निर्माण के समय मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, जो 22 भागों में विभाजित थे इसमें केवल 8 अनुसूचियां थीं।
विश्व का सबसे छोटा संविधान अमेरिका का है जिसमें केवल 7 अनुच्छेद है।
भारत का लिखित एवं निर्मित संविधान है।
भारत के संविधान में लचीलापन एवं कठोरता का समावेश है तथा एकात्मकता की तरफ झुका हुआ संघात्मक शासन है।
भारतीय संविधान में संसदीय शासन व्यवस्था है। तथा सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार अनुच्छेद 326 (61वें संविधान संशोधन 1989) द्वारा मतदान की उम्र 21 साल से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।भारत का संविधान धर्म निरपेक्षता पर बल देता है।

प्रस्तावना, मूल अधिकार, राज्य के नीति निर्देशक तत्व, मूल कर्तव्य भारतीय संविधान के प्रमुख अंग है।भारतीय संविधान में गणतन्त्रात्मक का व्यवस्था का प्रावधान है।
भारत का एक मात्र राज्य जम्मू कश्मीर का अपना अलग संविधान है।
देश के विभाजन के बाद भारत की संविधान सभा में 324 सदस्यों ने भाग लिया परन्तु बाद में केवल 299 रहे गये जिनकी प्रथन बैठक 31 अक्टूबर 1947 को हुई। इन सदस्यों में से 6 सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। जो है: जवाहर लाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल, राजेन्द्र प्रसाद, के.एम.मुंशी, अल्लादिया कृष्णास्वामी, तथा डॉ.भीमराव अम्बेडकर (प्रख्यात विधिवेत्ता और अर्थशास्त्री)
भीमराव अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे इनके पास संविधान के प्रारूप को पारित करवाने की जिम्मेदारी थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *