Bhartiy sanvidhan ki anusuchi भारतीय संविधान की अनुसूची

By | September 4, 2016

>> प्रथम अनुसूची – इसमें भारतीय संघ के घटक राज्यो (29 राज्य) एवं संघ शासित (7) क्षेत्रों का उल्लेख है ।
>> नोट- संविधान के 69वें संसोधन द्वारा दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा दिया गया है।
>> द्वितीय अनुसूची – इसमें भारतीय राज व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति एवं उप सभापति, विधानसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, विधान परिषद के सभापति एवं उप सभापति, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायधीश और भारत के नियंत्रक, महालेखापरीक्षक आदि ) को प्राप्त होने वाले वेतन भत्ते और पेंशन आदि का उल्लेख किया गया है।
>> तृतीय अनुसूची – इसमें  विभिन्न पदाधिकारियों (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, मंत्री, उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ) द्वारा पद ग्रहण के समय ली जाने वाली शपथ का उल्लेख है ।
>> चौथी अनुसूची – इसमें विभिन्न राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों की राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है ।
>> पांचवी अनुसूची इसमें विभिन्न अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजाति के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उल्लेख है ।
>> छठी अनुसूची – इसमें असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यो के जनजाति क्षेत्रों के प्रशासन के बारे में प्रावधान है ।
>> सातवीं अनुसूची इसमें केंद्र एवं राज्यों के बीच शक्तियों के बंटवारे के बारे में दिया गया है । इसके अंतर्गत तीन सूचियां हैं – संघ सूची, राज्य सूची एवं समवर्ती सूची ।
>> संघ सूची – इस सूची में दिए गए विषय पर केंद्र सरकार कानून बनाती है । संविधान के लागू होने के समय इसमें 97 विषय थे।(वर्तमान में 100 विषय)
>> राज्य सूची – इस सूची में दिए गए विषय पर राज्य सरकार कानून बनाती है । राष्ट्रीय हित से संबंधित होने पर केंद्र सरकार भी कानून बना सकती है । संविधान के लागू होने के समय जिसके अंतर्गत 66 विषय थे । (वर्तमान में 61 विषय)
>> समवर्ती सूची – इसके अंतर्गत दिए गए विषय पर केंद्र एवं राज्य दोनों सरकारें कानून बना सकती है परंतु कानून के विषय सामान होने पर केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून ही मान्य होता है। राज्य सरकार द्वारा बनाया गया कानून केंद्र सरकार के कानून बनाने के साथ ही समाप्त हो जाता है। संविधान के लागू होने के समय समवर्ती सूची में 47 विषय थे । (वर्तमान में 52 विषय)
>> नोट – समवर्ती सूची का प्रावधान जम्मू कश्मीर राज्य के संबंध में नहीं है ।
>> आठवीं अनुसूची – इसमें भारत की 22 भाषा का उल्लेख किया गया है । मूल रूप से आठवीं अनुसूची में 14 भाषाएं थीं, 1967 ई० (21 वा) संसोधन में सिंधी को , 1992 ई० (71 वां संशोधन)  में संसोधन में कोंकणी, मणिपुरी तथा नेपाली को और 2003 ई० (92वां संशोधन) मैथिली, संथाली, डोगरी एवं बोडो को  आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया ।
>> नौंवी अनुसूची – संविधान में यह अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ी गयी । इसके अंतर्गत राज्य द्वारा संपत्ति के अधिकरण की विधियों उल्लेख किया गया है। इस अनुसूची में सम्मिलित विषयों को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है । वर्तमान में इस अनुसूची में 284 अधिनियम हैं ।
>> नोट- अब तक यह मान्यता थी कि संविधान की नौवीं अनुसूची में सम्मिलित कानूनों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती है । 11 जनवरी, 2007 के संविधान पीठ के एक निर्णय द्वारा यह स्थापित किया गया है की नौंवी अनुसूची में सम्मिलित किसी भी कानून को इस आधार पर चुनौती दी जा सकती है कि वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है तथा उच्चतम न्यायालय इन कानूनों की समीक्षा कर सकता है ।
>> 10वीं अनुसूची – संविधान में 52 वें संशोधन, 1985 के द्वारा जोड़ी गई है । इसमें दल-बदल से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है ।
>> 11 वीं अनुसूची – यह अनुसूची संविधान में 73 वे संवैधानिक संसोधन (1993) के द्वारा जोडी गई है । इसमें पंचायती राज संस्थाओं को कार्य करने के लिए 29 विषय प्रदान किए गए हैं ।
>> 12 वीं अनुसूची – यह अनुसूची संविधान में 74 वे संवैधानिक संसोधन (1993) के द्वारा जोडी गई है । इसमें शहरी क्षेत्र को स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को कार्य करने के लिए 18 विषय प्रदान किए गए है।

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