ऊर्जा Energy

ऊर्जा किसे कहते हैं?
किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को उसकी ऊर्जा कहते हैं। कोई वस्तु अपनी किसी अवस्था में जितना कार्य कर सकती है वही उस अवस्था में उसकी ऊर्जा होती है जब किसी वस्तु की
ऊर्जा समाप्त हो जाती है तो कार्य करने की उसकी क्षमता भी समाप्त हो जाती है। इस प्रकार कार्य को करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है

चूँकि ऊर्जा की माप कार्य की मात्रा के रूप में की जाती है, ऊर्जा के वे ही मात्रक हैं जो कार्य के हैं। इस प्रकार SI पद्धति में ऊर्जा का मात्रक जूल है। ऊर्जा एक अदिश राशि है।’
यांत्रिक ऊर्जा किसे कहते हैं?
किसी वस्तु द्वारा उसकी गति, स्थिति या विन्यास के कारण प्राप्त की गई या छोड़ी गई ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं। यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार के होते हैं―
(1) गतिज ऊर्जा:- किसी वस्तु में उसकी गति के कारण ऊर्जा को उसकी गतिज ऊर्जा कहते हैं।

(2) स्थितिज ऊर्जा :- किसी वस्तु में उसकी विशेष स्थिति अथवा विकृत अवस्था के कारण जो ऊर्जा होती है, उसे उसकी स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।’
गतिज ऊर्जा किसे कहते हैं?
किसी वस्तु में उसकी गति के कारण ऊर्जा को उसकी गतिज ऊर्जा कहते हैं।किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा की माप कार्य के उस परिमाण से की जाती है जो वस्तु अवरोधी बल के कारण गत्यावस्था से विरामावस्था में आने तक कर सकती है।
उदाहरण:-
बहता हुआ पानी लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठों को बहाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाता है, बन्दूक से दागी गयी गोली लक्ष्य में घुस जाती है। इन सभी घटनाओं से ज्ञात होता है कि गतिमान वस्तुओं में कार्य करने की क्षमता अर्थात् ऊर्जा होती है।’
स्थितिज ऊर्जा किसे कहते हैं?
किसी वस्तु में उसकी विशेष स्थिति अथवा विकृत अवस्था के कारण जो ऊर्जा होती है, उसे उसकी स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
उदाहरण:-
(1) बाँधों में एकत्रित जल में, पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर होने के कारण स्थितिज ऊर्जा होती है। इसका उपयोग टरबाइन को चलाकर विद्युत् उत्पन्न करने में किया जाता है।

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(2) घड़ी में चाबी भरने पर उसके स्प्रिंग में स्थितिज ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है जो घड़ी की सुइयों को चलती है।

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