बल force

By | July 2, 2016

force in hindi

जड़त्वीय और अजड़त्वीय निर्देश फ्रेमों से आप क्या समझते हैं?
जड़त्वीय फ्रेम:-जड़त्वीय फ्रेम वे निर्देश फ्रेम होते हैं जिनमें न्यूटन के गति के नियम लागू होते हैं। वे सभी फ्रेम जो एक-दूसरे के सापेक्ष विरामावस्था में होते हैं या एक-दूसरे के सापेक्ष समान वेग से चल रहे होते हैं, जड़त्वीय होते हैं।
अजड़त्वीय फ्रेम:- अजड़त्वीय फ्रेम वे फ्रेम होते हैं जिनमें न्यूटन के गति के नियम लागू नहीं होते हैं। सभी त्वरित तथा घूर्णी निर्देश फ्रेम अजड़त्वीय फ्रेम होते हैं।’
छदम बल किसे कहते हैं?
इस प्रकार का बल जो वास्तव में पिण्ड पर कार्य नहीं करता किन्तु निर्देश फ्रेम के त्वरित होने पर पिण्ड पर कार्यशील दिखाई देता है  छदम बल कहलाता है।
उदाहरण:-जब कोई व्यक्ति कार में बैठकर किसी तीक्ष्ण मोड़ पर मुड़ता है तो कार की गति त्वरित गति होती है। अतः कार एक अजड़त्वीय फ्रेम होगी।कार में बैठा व्यक्ति एक बल का अनुभव करता है जो उसे वृत्तीय मोड़ के केन्द्र से दूर फेंकने का प्रयास करता है। यह अपकेन्द्र बल छदम बल कहलाता है। ‘
वृत्तीय गति किसे कहते हैं?
जब कोई वस्तु एकसमान चाल से वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है, तो उसकी गति को एकसमान वृत्तीय गति कहते हैं।
उदाहरण:-(1) यदि रस्सी के एक सिरे से पत्थर के टुकड़े को बाँधकर रस्सी के दूसरे सिरे को हाथ से पकड़कर क्षैतिज तल या ऊर्ध्वाधर तल में घुमाया जाये तो पत्थर की गति वृत्तीय गति होगी।
(2) बिजली के पंखे के ब्लेड की गति भी वृत्तीय गति का उदाहरण है।
(3) पृथ्वी के चारों ओर चन्द्रमा की गति को भी लगभग वृत्तीय गति माना जा सकता है।’
अभिकेन्द्र बल किसे कहते है?
जब कोई कण एकसमान चाल से वृत्तीय गति करता है तो उसके केन्द्र की ओर एक त्वरण कार्य करता है जिसे उसका अभिकेन्द्र त्वरण कहते हैं। न्यूटन के गति के नियम से कण में त्वरण सदैव बल से ही उत्पन्न होता है तथा बल की दिशा त्वरण के अनुदिश होती है।अतः वृत्तीय गति करने वाले कण पर केन्द्र की दिशा में सदैव एक बल कार्य करता है। इस
बल को अभिकेन्द्र बल कहते हैं। किसी कण की वृत्तीय गति के लिए इस बल का उस पर लगा होना आवश्यक है।’
अभिकेन्द्र बल का क्या महत्व है?
कोई  भी वस्तु वृत्तीय गति तभी करती है जबकि उस पर अभिकेन्द्र बल लगा होता हो। अभिकेन्द्र बल की अनुपस्थिति में वृत्तीय गति संभव नहीं है।
यदि वृत्तीय गति करने वाली वस्तु से अभिकेन्द्र बल हटा लिया जाये तो वस्तु जड़त्व के कारण वेग की दिशा में अर्थात् वृत्तीय पथ की स्पर्श-रेखा की दिशा में दूर चली जाती है, वह वृत्तीय गति नहीं कर पाती।
उदाहरण:-
यदि रस्सी के एक सिरे से पत्थर के टुकड़े को बाँधकर रस्सी के दूसरे सिरे को हाथ से पकड़कर पत्थर के टुकड़े को वृत्तीय मार्ग में घुमायें तो रस्सी के टूटने पर पत्थर का टुकड़ा स्पर्श-रेखा की दिशा में दूर जा गिरता है। रस्सी के द्वारा पत्थर के टुकड़े पर अभिकेन्द्र बल लगाया जाता है। रस्सी के टूट जाने पर अभिकेन्द्र बल का मान शून्य हो जाता है। अतः पत्थर का टुकड़ा वृत्तीय  पथ की स्पर्श- रेखा की दिशा से दूर जा गिरता है।’
अपकेन्द्र बल को छद्म बल क्यों कहा जाता है? उदाहरण द्वारा समझिए।’,’कई परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं जबकि ऐसा प्रतीत होता है कि किसी वस्तु पर कोई बल लगा है जबकि वास्तव में उस पर कोई बल नहीं लगा होता है। इस प्रकार के आभासी बल को छद्म बल कहते हैं।

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उदाहरण:-कार में बैठा हुआ व्यक्ति किसी तीक्ष्ण मोड़ पर एक ऐसे बल( अपकेन्द्र बल)  का अनुभव करता है जो उसे मोड़ के केन्द्र से दूर फेंकने का प्रयास करता है। अतः उसका शरीर मोड़ के केन्द्र से दूर कार की दीवार की ओर झुक जाता है। वास्तव में मोड़ पर जब कार मुड़ती है तो उसमें बैठा व्यक्ति वृत्तीय गति कर रहा होता है। वृत्तीय गति करने के लिए अभिकेन्द्र बल की आवश्यकता होती है जो उसे नहीं मिल रहा होता है। अतः जड़त्व के कारण उसका शरीर सरल रेखा में चलता रहता है जिससे कार के मुड़ते समय व्यक्ति का शरीर दीवार की ओर झुक जाता है और उसे ऐसा प्रतीत होता है मानो कि उस पर एक बल कार्य कर रहा है जो उसे मोड़ के केन्द्र से दूर ले जाने का प्रयास करता है।इस प्रकार अपकेन्द्र बल एक छद्म बल या आभासी बल होता है जिसे वह प्रेक्षक अनुभव करता है जो वृत्तीय गति करने वाली वस्तु से दृढ़तापूर्वक जुड़ा रहता है।’

परिवर्ती बल किसे कहते हैं?
जब किसी वस्तु पर आरोपित बल का मान व दिशा समय के साथ या वस्तु की स्थिति के साथ बदलते रहते हैं तो इस प्रकार के बल को परिवर्ती बल कहते हैं।
उदाहरण:-
(1) किन्हीं दो वस्तुओं के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल दोनों वस्तुओं के बीच की दूरी पर निर्भर करता है, अतः गुरुत्वाकर्षण बल एक परिवर्ती बल है।

(2) सरल लोलक को मध्यमान स्थिति से विस्थापित करके छोड़ देने पर उस पर कार्य करने वाला प्रत्यानयन बल एक परिवर्ती बल होता है।’
बल किसे कहते हैं?
बल वह बाह्य कारक हैं, जो किसी वस्तु की विरामावस्था, गत्यावस्था, आकार या आकृति में परिवर्तन कर देता है अथवा परिवर्तन करने का प्रयास करता है। SI पद्धति में बल का मात्रक न्यूटन है। इसे संकेत N से प्रदर्शित करते हैं। बल एक सदिश राशि है।
प्रकृति में कई प्रकार से बल कार्यरत हैं, जैसे गुरुत्वाकर्षण बल, स्थिर वैद्युत बल, चुम्बकीय बल, विद्युत् चुम्बकीय बल, नाभिकीय बल आदि।पृथ्वी प्रत्येक वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करती है, यह बल गुरुत्वाकर्षण बल है। एक आवेशित वस्तु, दूसरी
आवेशित वस्तु पर बल लगाती है, यह स्थिर वैद्युत बल है। एक चुम्बक, दुसरे चुम्बक पर बल लगता है,यह चुम्बकीय बल है। पदार्थ का एक अणु दूसरे अणु पर बल लगता है, यह अंतर- आण्विक बल है। जब गतिशील आवेश किसी चुम्बकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है, तो उस पर विद्युत्- चुम्बकीय बल लगने लगता है। नाभिकीय बल न्यूक्लिऑनों को नाभिक के अन्दर बाँधे रखता है।’
दैनिक जीवन में बल के प्रभाव बताएँ।’,’दैनिक जीवन में बल के प्रभाव निम्न हैं:-
(1) बल स्थिर वस्तु को गत्यावस्था में ला देता है, या लाने का प्रयास करता है।
(2) बल वस्तु की गत्यावस्था में परिवर्तन कर देता है, या परिवर्तन करने का प्रयास करता है।
(3) बल वस्तु के आकार या आकृति में परिवर्तन कर देता है, या परिवर्तन करने का प्रयास करता है।’
जड़त्व किसे कहते हैं? जड़त्व के कितने प्रकार हैं?’,’किसी वस्तु का वह गुण जिसके कारण वह अपनी विरामावस्था या गत्यावस्था में स्वतः ही परिवर्तन करने में असमर्थ होती है, उसका जड़त्व कहलाता है। जड़त्व दो प्रकार के होते हैं:-

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(1):- विराम का जड़त्व:-यदि कोई वस्तु स्थिर है तो स्थिर ही रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाये। वस्तु के इस गुण को विराम का जड़त्व कहते हैं।

(2):- गति का जड़त्व:- यदि कोई वस्तु चल रही है तो वह उसी वेग से उसी दिशा में तब तक चलती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाय। वस्तु के इस गुण को गति का जड़त्व कहते हैं।’
विराम के जड़त्व को उदाहरण सहित समझाइए।’,’विराम के जड़त्व के उदाहरण:-
(1) मोटरकार के एकाएक चलने पर उसमें बैठा व्यक्ति पीछे की ओर गिर जाता है।
(2) एक गिलास के ऊपर कार्ड तथा कार्ड के ऊपर सिक्का रखकर यदि कार्ड को तेजी से धक्का दिया जाये तो सिक्का गिलास में गिर जाता है।
(3) कम्बल को छड़ी से पीटने पर धूल के कण झड़ जाते हैं।
(4) पेड़ को हिलाने पर उसमें लगे फल नीचे गिरने लगते हैं।
(5) बन्दुक की गोली से खिड़की की काँच में स्पष्ट छेद बन जाता है, काँच चटकता नहीं, किन्तु पत्थर मारने से काँच चटक जाता है।’
गति के जड़त्व को उदाहरण सहित समझाइए।’,’गति के जड़त्व के उदाहरण :-

(1) चलती बस में एकाएक ब्रेक लगाने पर उसमें बैठे व्यक्ति आगे की ओर झुक जाते हैं।

(2) दौड़ते हुए घोड़े के एकाएक रुक जाने पर घुड़सवार आगे की ओर गिर जाते हैं।

(3) लम्बी कूद के खिलाड़ी कुछ दूर से दौड़कर आते हैं।

(4) चलती हुई रेलगाड़ी से कूदने वाला व्यक्ति चलती रेलगाड़ी की दिशा में गिर जाता है।

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(5) यदि चलती रेलगाड़ी में बैठा कोई व्यक्ति एक सिक्का ऊपर उछाले तो वह उस व्यक्ति के हाथ में ही वापस गिरता है।’
संवेग किसे कहते हैं?
संवेग किसी वस्तु की गति की कुल मात्रा का माप है।किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को उस वस्तु का संवेग कहते हैं। सूत्र के रूप में ,
संवेग = द्रव्यमान × वेग
SI पद्धति में संवेग का मात्रक किग्रा मीटर प्रति  सेकण्ड तथा cgs पद्धति में ग्राम सेमी प्रति सेकण्ड है।संवेग सम्बन्धी तथ्य―

(1) यदि दो वस्तुएँ समान वेग से चल रही हैं तो भारी वस्तु का संवेग  हल्की वस्तु के संवेग से अधिक होता है।

(2) यदि दो वस्तुओं का संवेग एकसमान है तो हल्की वस्तु का वेग भारी वस्तु के वेग से अधिक होता है।’
बल का आवेग क्या है?
जब कोई बल किसी वस्तु पर अल्प समयान्तराल के लिए लगाया जाता है तो बल और समयान्तराल के गुणनफल को बल का आवेग कहते हैं। बल का आवेग वस्तु के संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है।सूत्र के रूप में,
बल का आवेग = बल × समयान्तराल
SI पद्धति में आवेग का मात्रक न्यूटन-सेकण्ड है तथा cgs पद्धति में डाइन – सेकण्ड है।’
दैनिक जीवन में आवेग के उदाहरण लिखिए।’,’दैनिक जीवन में आवेग के उदाहरण:-

(1)क्रिकेट के खेल में तेजी से आती हुई गेंद को पकड़ते समय खिलाड़ी अपने हाथ पीछे की ओर
खींचता है।

(2) कुछ ऊँचाई से पक्के फर्श की अपेक्षा कच्चे फर्श पर कूदने से कम चोट लगती है। पक्के फर्श पर कूदने से पैर फौरन स्थिर हो जाते हैं।

(3) सर्कस के कलाकार जाली ता मोटे गद्दे पर कूदते हैं।

(4) काँच या मिट्टी के बर्तन पक्की जमीन पर गिरते ही टूट जाते हैं, किन्तु मुलायम फर्श पर गिरने पर नहीं टूटते।’
न्यूटन के गति के नियमों को बताइए।’,'(1) न्यूटन के गति का प्रथम नियम:- जो वस्तु स्थिर है, वह स्थिर ही रहेगी और जो वस्तु गतिशील है वह उसी वेग से उसी दिशा में तब तक चलती रहेगी, जब तक कि उस पर कोई बाह्य बल न लगाया जाये।

(2) न्यूटन के गति का द्वितीय नियम:-किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है और यह परिवर्तन बल की ही दिशा में होता है।

(3) न्यूटन के गति का तृतीय नियम:-प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है।’

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