कार्य Work

कार्य किसे कहते हैं?
भौतिकी में कार्य होना तभी माना जाता है जबकि वस्तु पर बल लगाने पर उसमें विस्थापन हो,उसे कार्य कहते हैं। कार्य सम्पन्न होने के लिए दो बातें आवश्यक हैं–
(1) बल (2) विस्थापन
कार्य के मात्रक:-
(1) SI पद्धति में कार्य का मात्रक जूल(joule) है।
समीकरण (1) में यदि,
F=1 न्यूटन तथा d = 1 मीटर हो ,तो
W = 1 न्यूटन × 1 मीटर
= 1 न्यूटन- मीटर
=1 जूल
अतः यदि किसी वस्तु पर 1 न्यूटन का बल लगाने पर बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन 1 मीटर हो तो किया गया कार्य 1 जूल कहलाता है।
(2) cgs पद्धति में कार्य का मात्रक अर्ग (erg) है।
समीकरण (1) में यदि,
F = 1 डाइन तथा d = 1 सेमी हो, तो
W = 1 डाइन × 1 सेमी
= 1 डाइन – सेमी
= 1 अर्ग
अतः यदि किसी वस्तु पर 1 डाइन का बल लगाने पर बल की दिशा में वस्तु का विस्थापन 1 सेमी हो तो किया गया कार्य 1 अर्ग कहलाता है।’
धनात्मक कार्य किसे कहते हैं?
जब बल और विस्थापन की दिशा एकसमान होती है अथवा बल और विस्थापन के बीच का कोण न्यून कोण होता है तो बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक होता है।
उदाहरण:-
(1) किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से एक बाल्टी को रस्सी द्वारा, जो बाल्टी से बँधी है, बाहर निकालने में किया गया कार्य क्योंकि बल और विस्थापन की दिशा समान होती है।

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(2) जब एक घोड़ा गाड़ी को खींचता है तो किया गया कार्य धनात्मक होता है।’
ऋणात्मक कार्य किसे कहते हैं?
जब बल और विस्थापन की दिशा विपरीत होती है अथवा उनके मध्य का कोण अधिक कोण होता है तो किया गया कार्य ऋणात्मक कार्य कहलाता है।
उदाहरण:-
(1) किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से एक बाल्टी को रस्सी द्वारा, जो बाल्टी से बँधी है, बाहर निकालने में किया गया कार्य धनात्मक होता है किन्तु गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है, क्योंकि गुरुत्वीय बल और विस्थापन की दिशाएँ विपरीत हैं।

(2) दोलन कर रहे किसी लोलक को विरामावस्था में लाने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।’
शून्य कार्य किसे कहते हैं?
यदि बल वस्तु की गति के लंबवत् हो या बल लगाये जाने पर भी वस्तु का विस्थापन शून्य हो तो बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।
उदाहरण:-(1) यदि एक कुली अपने सिर पर सूटकेस रखकर प्लेटफार्म पर क्षैतिज गति करता है या खड़ा रहता है तो उसके द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।
(2) जब कोई वस्तु एकसमान वृत्तीय गति करती है
तो उस पर केन्द्र की दिशा में अभिकेन्द्र बल कार्य करता है। यह बल वस्तु की गति के लंबवत् होता है। अतः अभिकेन्द्र बल द्वारा किया गया कार्य शून्य होता है।’

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